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झारखंड में प्रति व्यक्ति आय की रफ्तार धीमी, राज्य के लोग अब भी गरीब

देश के परिप्रेक्ष्य में अब भी झारखंड 17वें से 18वें स्थान पर

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Ranchi :  झारखंड सरकार अलग राज्य गठन का 18वीं वर्षगांठ मना रही है. राज्य के 3.55 करोड़ की आबादी में से सरकारी आंकड़े कहते हैं कि झारखंड में प्रति व्यक्ति आय 50 हजार रुपये से कुछ ज्यादा है. यह राज्य के सकल घरेलू उत्पाद के आधार पर तय आय है. अलग राज्य के गठन के समय ग्रामीण क्षेत्र में रहनेवाले लोगों की आमदनी 9869 रुपये थी, जबकि शहरी क्षेत्र में रहनेवाले लोगों की आमदनी 24665 रुपये थी. 2015-16 में प्रति व्यक्ति आय की दर 6.20 फीसदी कम हुई थी. झारखंड को देशभर में प्रकृतिगर्भा क्षेत्र माना जाता है. यहां पर 33 फीसदी से अधिक खनिज संपदा है, पर यहां के लोग आज भी गरीब हैं.

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अब सरकार ग्रामीण और शहरी क्षेत्र का वर्गीकरण अलग-अलग नहीं कर रही है. सामान्य तौर पर राज्य में रह रहे लोगों की आमदनी सरकार विभिन्न सेक्टरों के आधार पर कर रही है. इसमें कृषि, खनन, मैन्यूफैक्चरिंग, वानिकी, सर्विस सेक्टर और अन्य विषयों को शामिल किया गया है. आंकड़ों की बाजीगरी को छोड़ दें, तो सुदूरवर्ती क्षेत्रों में रहनेवाले लोगों का जीवन स्तर कुछ खास नहीं सुधरा है. हां, शहरी क्षेत्रों में पलायन बदस्तुर जारी है. आज भी राज्य के 86,45,042 जनजातीय आबादी में से 50 प्रतिशत आबादी मूलभूत समस्याओं और आजीविका का स्तर बढ़ाने के लिए जूझ रही है. ये लोग गरीबी रेखा से नीचे जीवन गुजर-बसर करने को मजबूर हैं. अलग राज्य का गठन यहां की जनजातीय आबादी और अन्य सामान्य आबादी के रहन-सहन के स्तर को ऊपर उठाने और यहां की संस्कृति, सभ्यता को बनाये रखने के लिए किया गया था.

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18 वर्षों में सत्ताधारी और मंत्रियों ने भुला दिया एंबेसेडर

18 सालों में एंबेसेडर में चलनेवाले अधिकारी और मंत्री फारच्युनर, मिस्टुबिशी पाजेरो और टाटा सफारी जैसे वाहनों में चल रहे हैं. अधिकारी सियाज और अन्य महंगी गाड़ियों में चलते हैं. मंत्रियों के लिए भी सरकार की तरफ से कभी मारूति सुजूकी ईस्टीम खरीदी गयी, तो कभी टाटा सफारी, तो कभी फारच्युनर, तो कभी मिस्टुबिशी पाजेरो. एंबेसेडर वाहन शुरुआती दौर में 2000-2001 में खरीदे गये थे. अब ये वाहन कबाड़ हो गये हैं. राज्य मंत्रालय में बैठनेवाले विभागीय प्रमुखों की भी पहली पसंद अब एंबेसेडर नहीं रही. अब उन्हें सियाज, एक्सएक्स-4 और होंडा सिटी और अन्य वाहन चाहिए.

गरीबों की स्थिति ज्यों की त्यों रही

राज्य के गरीबों की स्थिति ज्यों की त्यों बनी हुई है. यहां पर 52 लाख से अधिक बीपीएल परिवार हैं. इनके लिए इंदिरा आवास, प्रधानमंत्री आवास योजना, लाल कार्ड और अन्य सुविधायें देने की घोषणा की गयीं. अब इन्हें सरकार की तरफ से आयुष्मान भारत योजना से जोड़ा गया है. पर इनके रहन-सहन का स्तर पुराने ढ़र्रे पर ही चल रहा है. आज भी खनन क्षेत्र में 10 फीसदी आबादी रोज कमाने-खाने की जुगत में लगी हुई है. वहीं मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र में 24 फीसदी लोग अब भी अपनी जिंदगी की गाड़ी चला रहे हैं. मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर का योगदान राज्य के सकल घरेलू उत्पाद दर में 22-25 फीसदी के बीच है. वहीं कृषि पर राज्य के 12 फीसदी लोग निर्भर हैं.

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झारखंड में प्रति व्यक्ति आय की स्थिति

वर्ष                        प्रति व्यक्ति आय

1999-2000            24665 रुपये

2011-12                41254 रुपये

2012-13                44176 रुपये

2013-14                43779 रुपये

2014-15                48781 रुपये

2015-16                44524 रुपये

2016-17                49174 रुपये

2017-18                उपलब्ध नहीं

2018_19               50,100 रूपये

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