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लोगों ने कहा- बंद हो मॉब लिंचिंग,आने वाली पीढ़ी को न पढ़ाये हिंदू-मुस्लिम का पाठ

मॉब लिंचिंग के विरोध में विभिन्न सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों ने दिया धरना, हर समुदाय के लोग हुए शामिल

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Ranchi: मॉब लिंचिंग आखिर कब तक, तबरेज अंसारी के अपराधियों को सजा मिले, राज्य में मॉब लिंचिंग पर रोक लगे समेत अन्य पोस्टरों के साथ लोग एकजुट दिखे.

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क्या युवा और क्या बुजुर्ग सबकी जुबान पर एक ही बात थी, मॉब लिंचिंग में रोक लगे. न कोई धर्म और न कोई जात, मांग सिर्फ इंसाफ की. बुधवार को मॉब लिंचिंग के विरोध में ये नाराज देखने को मिला राजभवन के समक्ष आयोजित एक दिवसीय धरने में.

जिसे विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने आयोजित किया था. इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि राज्य में लगातार मॉब लिंचिंग की घटनाएं हो रही है, जबकि सरकार चुप है.

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सरकार की चुप्पी और बढ़ती मॉब लिंचिंग की घटनाएं राज्य में बड़े सवाल खड़े करती है. आक्रोशित लोगों ने कहा कि सरकार अगर अब भी इस पर कदम नहीं उठाती है तो कभी सरकार की भी मॉब लिंचिंग हो सकती है.

जनता के विश्वास का घोंटा गला

धरने में बिहार के पूर्व एमपी अली अनवर अंसारी शामिल हुए. इस दौरान उन्होंने कहा कि राज्य में लगातार हो रही मॉब लिंचिंग की खबरें देश भर में सुर्खियों में है.

इसके बावजूद राज्य सरकार चुप्पी साधे है. जबकि सरकार को चाहिये कि अब तक हुई 18 मौतों पर अपनी चुप्पी तोड़े. ऐसे कांडों को आगे रोकने की योजना बनाये.

सरकार ऐसे तो ‘सबके साथ-सबके विकास’ की बात करती है. लेकिन ऐसी घटनाओं के कारण सरकार ने जनता के विश्वास का गला घोंट दिया है.

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अंजाम देने वाले एक नहीं, ये साजिश है

धरना में शामिल कुछ लोगों ने बातचीत के दौरान कहा कि राज्य में मॉब लिंचिंग साजिश के तहत हो रही है. ऐसी घटनाओं को अंजाम देने वालों को तो सजा मिलना ही चाहिये.

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लेकिन एक सोची-समझी साजिश के तहत राज्य भर में ऐसे कांड हो रहे हैं. ऐसे लोगों से सचेत रहना चाहिये. सिर्फ आपराधिक तत्व नहीं, बल्कि एक मिलीजुली साजिश के तहत ऐसा किया जा रहा. तभी तो सरकार भी चुप्पी साधे हुए है.

राज्यपाल को दिया गया ज्ञापन

धरना के बाद राज्यपाल को आठ सूत्री ज्ञापन सौंपा गया. जिसमें तबरेज अंसारी के दोषियों को कड़ी सजा, लिंचिंग कांडों की फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई, लिंचिंग कांडों के लिए जवाबदेह डीसी और एसपी को बनाया जाये, पूरे प्रदेश को भय मुक्त बनाया जाये, लिंचिंग के पीड़ित परिवारों का भरण पोषण और जीवन यापन की समुचित रोजगार व्यवस्था उपलब्ध कराने समेत अन्य मांगें की गयी.

धरना-प्रदर्शन में आवामी इंसाफ मंच झारखंड, ऑल इंडिया पसमांदा महाज, केंद्रीय सरना समिति, भाकपा माले समेत अन्य संगठन शामिल थे. जबकि कांग्रेस, जेवीएम, जेएमएम समेत अन्य दलों और संगठन शामिल हुए.

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