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स्थानीय विधायक चाहते हैं सिंदरी टाउनशिप के लोग, अब तक पार्टियों ने नहीं दिया ध्यान

पार्टी उम्मीदवारों की जीत और हार का फैसला सिंदरी टाउनशिप के वोट से ही निर्धारित होते रहे हैं.

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Dhanbad : झारखंड विधानसभा चुनाव से पहले सिंदरी टाउनशिप से भाजपा उम्मीदवार बनाने की मांग रविवार को उस समय मुखर हो गयी जब भाजपा सिंदरी नगर कार्यालय में जिलाध्यक्ष चन्द्रशेखर सिंह को जन्मदिन पर बधाई देने के लिए सिंदरी नगर भाजपा कार्यकर्ताओं का जुटान हुआ.

जिला भर में दबंग भाजपा नगर अध्यक्ष के नाम से मशहूर सिंदरी भाजपा नगर अध्यक्ष विजय सिंह ने सिंदरी के वरीय भाजपा कार्यकर्ता व जिला समिति सदस्य शैलेश सिंह को लड्डू खिलाते हुए एलान किया कि आगामी विधानसभा चुनाव में शैलेश सिंह को सिंदरी विधानसभा उम्मीदवार बनाने की मांग प्रदेश भाजपा आलाकमान से की जायेगी.

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वोटिंग में बड़ी भूमिका, पर नहीं मिला टिकट

सिंदरी विधानसभा गठन से लेकर अब तक जितने भी विधानसभा चुनाव हुए हैं सिंदरी टाउनशिप के मतदाताओं की अहम भूमिका रही है. पार्टी उम्मीदवारों की जीत और हार का फैसला सिंदरी टाउनशिप के वोट से ही निर्धारित होते रहे हैं. बावजूद इसके आज तक किसी भी राजनीतिक दल ने सिंदरी से विधानसभा उम्मीदवार देने की जद्दोजहद नहीं की.

हालांकि साल 2014 विधानसभा में कांग्रेस ने हिम्मत दिखायी और सिंदरी टाउनशिप के एसीसी वर्कर्स युनियन महामंत्री रहे जयराम सिंह यादव को सिंदरी विधानसभा से टिकट दिया. वहीं साल 2005 एवं 2009 में लोजपा के टिकट पर शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी अपने बल बूते चुनाव लड़े. इसके अलावा कोई भी राजनीतिक दल आज तक सिंदरी टाउनशिप के लोगों पर विश्वास नहीं जताया. यह बात सिंदरी टाउनशिप के लोगों को भाले की तरह चुभती है. राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं में भी असंतोष और उदासीनता का बोध सहज पढ़ा जा सकता है.

साल 1980 में सिंदरी नगर भाजपा गठन के बाद से दिवंगत वीरेन्द्र सिंह के नेतृत्व में शैलेश सिंह, राज बिहारी पाठक, रवि शर्मा, दीपक कुमार दीपू, मनोज मिश्र, अरविंद खत्री समेत दर्जनों सिंदरी टाउनशिप के युवाओं ने भाजपा की नींव सिंदरी टाउनशिप में मजबूत की लेकिन भाजपा ने इन कार्यकर्ताओं को तवज्जो नहीं दी.

23 हजार में 19 हजार वोट भाजपा को

कार्यक्रम के दौरान विजय सिंह ने कहा कि सिंदरी टाउनशिप के 54 बूथों पर लगभग 65 हजार मतदाता हैं. लेकिन मतदान प्रतिशत बहुत कम रहता है. साल 2019 लोकसभा चुनाव में 23 हजार लोगों ने ही मतदान किया जिसमें से 19300 वोट भाजपा को मिले हैं. वोट नहीं देने के पीछे मतदाताओं का तर्क है कि स्थानीय विधायक नहीं होने से सिंदरी के लोगों को लाभ नहीं मिलता. ऐसे में वोट देकर किया फायदा. विजय सिंह का कहना है कि सिंदरी टाउनशिप से उम्मीदवार होने पर सिंदरी के मतदाताओं में उत्साह का माहौल होगा और वे बढ़ चढ़ कर मतदान करेंगे, वोटिंग प्रतिशत में काफी इजाफा होगा.

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एक भी नेता खड़ा नहीं किया जा सका

वहीं सिंदरी महाविद्यालय के लेक्चरर अनिल आशुतोष ने न्यूज़ विंग से बातचीत में कहा कि राजनीतिक संत कहे जाने वाले दिवंगत अरुण कुमार राय एकमात्र ऐसे सियासत के नेता थे जिन्होंने सिंदरी में कार्यरत मजदूरों की व्यथा से दुःखी होकर सिंदरी टाउनशिप की जमीन से राजनीतिक सफर शुरू किया और लगातार तीन बार विधायक और तीन बार सांसद बने. लेकिन, उन्होंने भी सिंदरी टाउनशिप में एक भी सुदृढ़ कार्यकर्ता नहीं बनाया.
अपने उत्तराधिकारी के तौर पर बलियापुर प्रखंड के बड़ादाहा गांव के आनंद महतो को चुना. आनंद महतो भी सिंदरी टाउनशिप के बदौलत ही लगातार चार बार मार्क्सवादी समन्वय समिति (मासस) के टिकट पर विधायक बने लेकिन उन्होंने भी सिंदरी टाउनशिप की ओर ध्यान नहीं दिया.

बीस साल तक अंबूज मंडल मासस के सिंदरी नगर अध्यक्ष रहे लेकिन टाउनशिप में संगठन को न मजबूती दी और न ही कद्दावर चेहरा खड़ा कर सके. जबकि मासस सिंदरी टाउनशिप के श्रमिकों के बदौलत ही विधानसभा चुनाव जीतती रही.

भाजपा-मासस दोनों ने छला

सिंदरी विधानसभा के लोगों का मानना है कि पहले लाल झंडा ने और इसके बाद भाजपा ने सिंदरी वासियों को छलने का ही काम किया है. लोटा-झोटा-सोटा आन्दोलन और सिंदरी खाद कारखाना बंदी के चश्मदीद गवाह अनिल आशुतोष बताते हैं कि मासस का संगठन इतना मजबूत था कि बाहरी-भीतरी आन्दोलन के दौरान समूचे सिंदरी टाउनशिप को लाल झंडे ने घेर लिया था. लोगों को घरों से निकलना मुश्किल था. सिंदरी के लोग घरों से निकले तो इसकी वजह धनबाद के चर्चित सूर्यदेव सिंह थे. मगर यही मासस सिंदरी कारखाना बंदी के समय चुपचाप बैठी रही. अगर सिंदरी के लोगों की घेराबंदी की तरह ही मासस के नेता और कार्यकर्ता कारखाना बंदी का विरोध करते तो आज तस्वीर दूसरी होती.

वहीं कांग्रेस के मंडल अध्यक्ष रह चुके प्रशांत दुबे कहते हैं कि साल 2002 में कारखाना बंदी के उपरांत सिंदरी के लोगों को जले पर नमक छिड़कने का काम सिंदरी विधायक फूलचंद मंडल ने किया. लोगों के घरों में बिजली नहीं, पानी नहीं, पढ़ाई-लिखाई, खाना-पीना सब चौपट और विधायक फूलचंद मंडल सिंदरी वासियों का हमदर्द बनने के बदले यह कहने पहुंचे कि कारखाना बंद हुआ सब बाहरी सिंदरी छोड़ अपने घर वापस जाओ.

2001 से भाजपा के वोट प्रतिशत में लगातार इजाफा

साल 2001 से भाजपा के वोट प्रतिशत में लगातार इजाफा हो रहा है वहीं वोट प्रतिशत में काफी गिरावट है. भाजपा के सक्रिय राजनीति में साल 1980 से जुड़े सिंदरी नगर के शैलेस सिंह कहते हैं कि साल 2005 के मुकाबले 2009, 2014 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव में सिंदरी टाउनशिप से भाजपा के वोट प्रतिशत में काफी इजाफा हुआ है. आगामी विधानसभा चुनाव में भी सिंदरी टाउनशिप से भाजपा को अप्रत्याशित वोट मिलने की उम्मीद है. पर दुर्भाग्य है कि सिंदरी टाउनशिप को नजरअंदाज किया जाता है.

शैलेश सिंह ने बताया कि पिछले पांच विधानसभा चुनाव 1995, 2000, 2005, 2009, 2014 तक भाजपा सिंदरी विधानसभा के बलियापुर और गोबिंदपुर में अपनें प्रतिद्वंदी मासस से पीछे रहती है और सिंदरी टाउनशिप के वोट से चुनाव जीत जाती है. विधायक टाउनशिप से दूर रहे तो परेशानी स्वभाविक है. आनंद महतो, राज किशोर महतो,  फूलचंद मंडल विधायक बने लेकिन सिंदरी टाउनशिप के लोगों से दूर-दूर ही रहे.

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