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इजराइल से लौटे किसान जयप्रकाश मंडल का लोगों ने किया स्‍वागत

Dumka : पांच दिवसीय इजराइल का भ्रमण कर जिले के किसान जयप्रकाश मंडल का किसानों एवं युवा साथियों ने दुमका रेलवे स्टेशन पर उनका स्वागत किया. श्री मंडल ने बताया की इजराइल के बारे में जैसा सुनते थे ठीक वैसा ही देखने को मिला. वहां किसानों ने एक एक बूंद पानी का उपयोग सिंचाई के लिए करता हैं. डीप इरीगेशन के माध्यम से फसलों की सिंचाई करता हैं. ड्रिप इरीगेशन से एक एक बूंद पानी पौधों के जड़ के पास गिरता है जिससे 50 प्रतिशत पानी बर्बाद होने से बच जाता है. ड्रिप इरीगेशन के माध्यम से खाद एवं दवा का छिड़काव किया जाता है. इससे खाद एवं दवा का 100 प्रतिशत उपयोग होता है. नहाने  में  जो पानी उपयोग होता है उसको फिर से रीसाइक्लिंग कर सिंचाई के काम में लाया जाता है.

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फल एवं सब्जी की खेती में ट्रे का प्रयोग किया जाता है

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वहां के किसानों ने सभी फसलों में ग्रीन हाउस पॉलीहाउस सीनेट का उपयोग करता है जिससे बाहरी कीड़े-मकोड़े का प्रवेश नहीं हो पाता है. साथ है नमी को बनाए रखता है. वर्तमान में बड़े पैमाने पर ग्रीन हाउस एवं सीनेट का व्यवहार कर रहा है. तापमान को नियंत्रित करने के लिए ग्रीन हाउस एवं पॉलीहाउस उपयुक्त है तापमान के हिसाब से मोटा एवं पतला पन्नी का प्रयोग ग्रीन हाउस में करते हैं. फल एवं सब्जी की खेती भरपूर मात्रा में होती है. फल एवं सब्जी की खेती में ट्रे का प्रयोग किया जाता है. ट्रे लगाने से पौधों में तीव्र गति से वृद्धि होती है, नमी को बनाए रखता है. दूसरा फायदा पौधों के पास खरपतवार नहीं उग पाता है जिससे पौधों को पोषक तत्व सही रुप से मिलता है.

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डीप इरीगेशन के माध्यम से खेती कर रेगिस्तान को हरा भरा बनाया

वहां के किसानों के द्वारा मल्चिंग का प्रयोग किया जाता है. इससे खरपतवार नियंत्रण के साथ साथ उसके पोषक तत्व का सही उपयोग होता है एवं नमी को बनाए रखता है. इजराइल में किसानों को सरकार द्वारा मुफ्त में खाद बीज मुहैया कराया जाता है लेकिन पानी सरकार से खरीदना पड़ता है. कारण समुद्र का पानी मैं नमक की मात्रा अधिक होने से सरकार द्वारा समुंद्र के पानी को रीसाइक्लिंग कर सिंचाई योग बनाता है. इसके बाद किसानों को सप्लाई दिया जाता है. इजराइल में 4 समुंद्र के साथ साथ दो रेगिस्तान भी है. डीप इरीगेशन के माध्यम से खेती कर रेगिस्तान को हरा भरा बनाया. इजराइल में सरकार द्वारा हर खेत तक पाइप के माध्यम से पानी पहुंचा दिया गया है.

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किसान सरकार से लीज लेकर भी खेती करते हैं

यहां अधिकतर किसानों का अपना फार्म हाउस है कई किसानों ने प्रोसेसिंग प्लांट भी लगा रखा है. जैसे मौसमी, संतरा, शकरकंद, सी ट्रैक्स आदि का प्लांट दिखाया गया. यहां अधिकतर काम मशीन के द्वारा किया जाता है. मशीन से काम करने से लागत कम आता है और मुनाफा अधिक होता है. इजराइल में साल भर में मात्र 400 MM बारिश होती है. मौसमी का खेती करने वाले किसान के पास 200 हेक्टेयर जमीन है एवं शकरकंद खेती करने वाले किसान के पास 400 हेक्टेयर जमीन है. दोनों के पास अपना प्रोसेसिंग प्लांट भी है. जिनके पास कम जमीन है वह किसान कॉपरेटिव बनाकर खेती करता है. इजराइल में किसानों का मात्र 7 प्रतिशत एवं सरकार का 93 प्रतिशत जमीन है. किसान सरकार से लीज लेकर भी खेती करते हैं.

इस मौके पर सौरभ  संथालिया, मनीष कुमार, सौरभ तिवारी, चंद्रशेखर कुमार, जतीन कुमार, दिनेश कापरी, अवधेश मांझी, उत्तम कुमार मंडल, हंसकुमार भंडारी, प्रकाश कुमार, रमाकांत शर्मा, कृष्णकांत तिवारी, शिवेंद्र जायसवाल, प्रमोद यादव, शिवानंद ओझा, जीवन मंडल, सिकन्दर, कागजी कुंवर, सोहन मरीक, अजीत मांझी, प्रकाश मांझी, प्रकाश कुमार मंडल, राजकिशर मंडल, प्रीतम कुमार पंजियारा, बालकिशोर मंडल आदि उपस्थित थे.

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