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हर दिन मौत का सफर करने को विवश है लातेहार के बेंदी पंचायत की जनता

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Latehar : लातेहार जिला मुख्यालय से महज़ 15 किमी की दूरी में स्थित है बेंदी पंचायत है. इस पंचायत में कुल 12 गांव हैं और आबादी पांच हज़ार के करीब. वहीं पूरा ग्राम पंचायत चारो ओर से नदियों से घिरा हुआ है. वहीं ग्राम और पंचायत तक के लिए एक भी पहुंच पथ नहीं है,  क्योंकि नदियों पर आज़ादी के बाद भी किसी ने पुल निर्माण की पहल नहीं की. सरकार के प्रतिनिधि मनिका विधायक हरे कृष्णा सिंह और जिला प्रशासन भी बेंदी पंचायत कि 12 ग्राम की समस्या से अवगत है लेकिन अब तक पुल निर्माण कि प्रक्रिया कागजों और बैठकों तक ही सिमित है. जब भी मनिका विधायक हरे कृष्णा सिंह और जिला प्रशासन से इस समस्या के बारे में बताया जाता है तो जवाब यही मिलता है प्रक्रिया में है.

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विधायक और प्रशासन से सिर्फ मिलते हैं आश्वासन  

इस परिस्तिथि में 12 ग्राम के पांच हज़ार ग्रामीण, शिक्षक, छात्र– छात्राएं, स्वास्थ्यकर्मी हर दिन मौत का सफर तय करने को मजबूर है. बेंदी पंचायत में धरधरी नदी है. इस नदी के ऊपर से बरकाकाना –बरवाडीह रेलखण्ड की  लाइन गुजरी है जिसपर रेलवे लाइन ट्रैक पुल सह पैदल पुल बना हुआ है इसी पुल का सहारा लेकर प्रतिदिन ग्रामीण लातेहार जिला मुख्यालय आते और जाते हैं. जिसमें ग्रामीणों को लगातार जान माल का खतरा बना रहता है.

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जान माल दोनों का खतरा बना रहता है

ग्राम पंचायत स्तिथ राजकीय मध्य विद्यालय हेसला की शिक्षिका लक्ष्मी कुमारी, प्राथमिक विद्यालय गोदना की शिक्षिका हीरामणि टोप्पो, पंचायत वार्ड सदस्य इन्द्रावती देवी, छात्रा ललिता कुमारी, कविता कुमारी बताती हैं कि स्कूल आने जाने के लिए कोई बेहतर पथ सुविधा नहीं है. बरसात के दिनों में नदी में पानी आ जाती है और नदी में कोई पुल नहीं है इसलिए एक मात्र सहारा रेलवे लाइन का पैदल पुल ही है जिसमें जान माल दोनों का खतरा बना रहता है. बेंदी ग्राम पंचायत कि मुखिया रेनू बैजंती ने बताया कि पुल निर्माण कि मांग आवेदन देकर मुख्यमंत्री, मुख्या सचिव आदि कई लोगों से की गयी है,  लेकिन कोई पहल होता ही नहीं. वहीं बताया कि केवल बेंदी पंचायत ही नहीं, पुल के अभाव में कुमंडी, हेहेगारा सहित और भी कई ग्राम पंचायत प्रभावित हैं. पुल के अभाव में और सभी लोग रेलवे कि ही खतरनाक पुल का सहारा लेते है जिला मुख्यालय आने जाने के लिए .

वहीं मनिका विधायक हरे कृष्णा सिंह आदिवासी ग्रामीणों को हर वर्ष यही कहते नज़र आते हैं कि इस वर्ष पुल बनेगा लेकिन पुल निर्माण नहीं होता है.

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