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73 साल से बिजली आने का इंतजार कर करे दुमका के अमझरी गांव के लोग, CM हेमंत सोरेन से राहत की अपील

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Ranchi : दुमका के गोपीकांदर प्रखंड के पंचायत मुसना का अमझारी गांव. देश की आजादी के बाद से अब तक ग्रामीणों को बिजली की सुविधा नसीब नहीं हुई है. ढिबरी के भरोसे ही गांव में काम चलाया जा रहा है. वर्ष 2014 में गांव में एक ट्रांसफर्मर लगा पर यह मात्र शो पीस ही है. गांव में सड़क सुविधाओं का भी अभाव है. ग्रामीणों ने अब सीएम हेमंत सोरेन से राहत की गुहार लगायी है. दुमका डीसी को भी लेटर लिख कर बुनियादी सुविधाएं दिये जाने का आग्रह किया है.

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बिजली आयी नहीं, आया बिजली बिल

अमझारी के सुनिराम टुडू, लुखी हांसदा सहित कई लोगों ने सीएम से मदद मांगी है. कहा है कि भुटका टोला और जोजो टोला आदिवासी टोला है. दोनों टोले में करीब 50 घर हैं. गांव में बिजली, पानी, शिक्षा, सड़क और अन्य जरूरी सुविधाओं का संकट अरसे से है. 1947 के बाद से अब तक बिजली की सुविधा यहां नहीं मिल सकी है. इसी तरह अब तक मात्र एक ही आदमी यहां मैट्रिक पास कर सका है. बिजली विभाग की ओर से करीब 6 साल पहले एक ट्रांसफार्मर और पोल के अलावा बिजली के तार लगाये गये थे. कुछ ग्रामीणों के घर में बिजली मीटर और बोर्ड देकर कोरम पूरा कर लिया गया. बिजली नहीं होने से बच्चों की पढ़ाई और दूसरे कामों पर असर पड़ रहा है. ढिबरी के भरोसे ही सब काम हो रहा है. दोनों टोला में बिजली चालू करायी जाये. साथ ही फर्जी बिजली बिलों को भी रद्द करें.

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एक चापाकल पर ही सबका लोड

गांव जाने का रास्ता.

जोजो टोला में करीब 25 घर हैं. इस टोले के एक सरकारी स्कूल में एक चापाकल है. इसी के भरोसे सभी परिवारों की प्यास बुझती है. पर चापाकल तक पहुंचने का रास्ता मुश्किलों भरा है. रास्तों में पत्थर और कीचड़ भरे होने से वहां तक जाकर पानी लाना बेहद मुश्किल है. गर्मी में इस टोले के लोग खेत में डाडी से पानी लाते हैं. जोजो टोला में नया चापाकल लगाने और दोनों टोले में सोलर टंकी की भी मांग की गयी है.

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रास्ता बनवाने का झांसा

अमझारी के दोनों टोले में कुल 300 मीटर का ही पक्का रास्ता है. दोनों टोलों में पीसीसी ढलाई का काम अधूरा रहने से ग्रामीणों के लिए बारिश महीने का सफर चैलेंज से भरा होता है. खराब रास्तों के कारण चलने फिरने और पर्व-त्योहार के समय तकलीफ आती है. चुनावों के समय इन रास्तों को बनवाने का झांसा सभी उम्मीदवार देते हैं. सरकार से दोनों टोलों में पूरी तरह से पीसीसी ढलाई कराने का आग्रह किया गया है.

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