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वार्ड नंबर 26 के पार्षद के घर के पास गंदगी के बीच रहने को विवश हैं लोग

चिकनगुनिया और मलेरिया जैसी बीमारी से रहते हैं भयभीत

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Ranchi :  वार्ड पार्षद के घर के पास ही गंदगी का अंबार लगा हो और उस इलाके के लोग इस गंदगी से परेशान हों, तो सरकार के स्वच्छता अभियान की जमीनी हकीकत का अंदाजा साफ लगाया जा सकता है. वार्ड नंबर 26 के पार्षद अरुण कुमार झा के आवास के पीछे ही फैली गंदगी से इलाके के लोग परेशान हैं. वार्ड पार्षद अरुण झा के घर के पीछे हाउसिंग बोर्ड की जमीन पर कई मकान बने हुए हैं, लेकिन वहां नाली की व्यवस्था ही नहीं है. लोगों के घरों से निकलनेवाली गंदगी को निकासी नहीं मिलने के कारण घर के पास ही गंदगी का अंबार लग जाता है. इससे बीमारी का खतरा बना रहता है. आस-पास के लोग गंदगी की वजह से होनेवाली बीमारी जैसे चिकनगुनिया, डेंगू, मलेरिया को लेकर चिंतित हैं.

वार्ड नंबर 26 के पार्षद के घर के पास गंदगी के बीच रहने को विवश हैं लोगपास में ही रहनेवाली इंदू पांडेय ने बताया कि गंदगी की वजह से यहां रहना मुश्किल हो गया है. आलम ऐसा है कि हम अपने घरों की खिड़की भी नहीं खोल सकते हैं. खिड़की खोलते ही मच्छर और मक्खी घर में घुसने लगते हैं. इसके अलावा बदबू के कारण सांस लेना भी दूभर हो जाता है.

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गोबर की वजह से भी बढ़ रही है गंदगी

इलाके के लोगों का आरोप है कि इसी इलाके में रहनेवाले गणेश उरांव पास में ही गोबर फेंकते हैं. इससे भी गदंगी में इजाफा होता है. लोगों ने कई बार समझाया कि इस स्थान पर गोबर मत फेंकिये, लेकिन उनका कहना है कि वह गोबर यहां नहीं, तो और कहां फेंकेंगे. गणेश उरांव जिस स्थान पर गोबर फेंकते हैं, वह जमीन भी हाउसिंग बोर्ड की है. लोगों का कहना है कि बोर्ड ने भी कई बार नोटिस दिया, लेकिन गणेश की आदत में कोई सुधार नहीं हुआ. गणेश उरांव का कहना है कि पुरखों से वह यहां गोबर फेंकते आ रहे हैं, इसलिए यहीं फेंकेंगे.

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पार्षद कुछ करते नहीं

स्थानीय लोगों ने बताया कि पार्षद अरुण कुमार झा से कई बार इसकी शिकायत की गयी, लेकिन वह सुनते नहीं. गंदगी साफ कराने को भी कहा गया, यह भी उनसे नहीं हुआ. लोगों ने बताया कि दुर्गंध से जीना मुहाल हो गया है. लेकिन, न तो पार्षद और न ही नगर निगम इस ओर कोई ध्यान नहीं देता है. इस संबंध में जब वार्ड पार्षद से संपर्क करने की कोशिश की गयी, तो उन्होंने फोन उठाना भी जरूरी नहीं समझा.

वार्ड नंबर 26 के पार्षद के घर के पास गंदगी के बीच रहने को विवश हैं लोग
नाली की भी नहीं है व्यवस्था.

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