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आम की खेती से खास बने खूंटी के बागवान दाम नहीं मिलने से हलकान

10 रुपये टोकरी के हिसाब आम बेचने को मजबूर हैं किसान

Ranchi: झारखंड का खूंटी जिला जिसकी पहचान नक्सली एरिया के रूप में होतो थी लेकिन पिछले कुछ वर्षों से खूंटी में बंजर पड़ी भूमि में आम के बाग लहलहा रहे हैं. एक समय था कि फलों का राजा आम की चर्चा होते ही जेहन में बिहार, बंगाल, उत्तर प्रदेश या दक्षिण भारत का नाम आ जाता था. झारखंड के खासकर छोटानागपुर प्रमंडल में आम की फसल न के बराबर होती थी, लेकिन अब समय बीत चुका है और खूंटी जिले ने आम की फसल में एक अलग स्थान बनाया है. अब खूंटी के लगभग सभी प्रखंडों में आम की भरपूर फसल होती है. इस साल भी खूंटी में आम की खूब फसल हुई है लेकिन आम का दाम नहीं मिलने से किसान हलकान हैं.

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आलम यह है कि किसानों को 10 रुपये टोकरी के हिसाब से आम बेचना पड़ता है. खूंटी का देशी आम (बीजू) काफी प्रसिद्ध है. आज भी शहरी क्षेत्रों में बीजू आम की भरपूर मांग है. लेकिन साधन नहीं होने के कारण खूंटी के किसान अपनी फसल को वहीँ बेचने पर मजबूर हैं. सड़क किनारे आम बेचनेवाले मिल जायेंगे. टोकरी में आम भरकर ग्राहकों का घंटों इन्तजार करते हैं यहां के किसान और थक हारकर 10 रुपये में पूरी टोकरी बेचना इनकी मज़बूरी बन गयी है.

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एनजीओ के सहयोग से प्रशिक्षित हुए किसान

कम समय में भरपूर उत्पादन देने वाले आम के पौधे सुलभता से मिलने के कारण लोगों का झुकाव आम की खेती की ओर हुआ है. सिर्फ तोरपा प्र्रखंड में दो हजार एकड़ से अधिक भूखंड में आम की खेती की गयी है. तोरपा प्रखंड के गुफू, खेरखई, सहित कई गांव आज न सिर्फ झारखंड, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी आम के उत्पादन में अपनी पहचान बनायी है. महिलाओं द्वारा काफी संख्या में आम के पौधे लगाये गये हैं. स्वयंसेवी संस्था प्रदान का इस क्षेत्र में बहुत बड़ा योगदान है, जिसने लोगों को आम की खेती के लिए पे्ररित किया और उन्हें तकनीक के साथ प्रशिक्षण भी मुहैया कराया. मनरेगा, बिरसा मुंडा बागवानी योजना सहित विभिन्न सरकारी विभागों ने भी खेती को बढ़ावा देने में भूमिका निभायी. खेरखई, उकड़ीमाड़ी, उड़ीकेल, सुंदारी, पैरा, किंशु, कुमांग सहित दर्जनों ऐसे गांव हैं, जहां इस साल आम की बंपर फसल हुई है.  दियांकेल गांव के आम की बगवानी करने वाले किसान बिलकन टोपनो और उनकी पत्नी अनिता धान बताते हैं कि इस साल आम की अच्छी पैदावार है, पर लाकडाउन के कारण फसल की अच्छी कीमत नहीं मिल रही है.

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