JharkhandPalamuRanchi

#Palamu: एमओ खा जा रहे आदिम जनजाति का अनाज? ऑनलाइन में दो माह की इंट्री कर दे रहे एक माह का राशन

PRAVIN/JAMES

Jharkhand Rai

Ranchi: पीडीएस डीलरों द्वारा राशन की कालाबाजारी, कम अनाज वितरण करना, कोरोना संकट के दौरान दो माह के बदले एक माह का राशन देना जैसे मामलों में कई पर कार्रवाई की गयी है.

लेकिन जब राशन की उपलब्धता सुनिश्चित कराने वाले एमओ (मार्केटिंग ऑफिसर) द्वारा ही इस तरह की गड़बड़ी की जा रही हो तो जरूरतमंदों को कैसे राशन मिल पायेगा?

डाकिया योजना के तहत आदिम जनजातियों के घर तक 35 किलो अनाज पहुंचवाने की जिम्मेवारी एमओ पर है.

Samford

इसे भी पढ़ें : #CoronaUpdates: देश में 1336 नये केस, 61 जिले संक्रमण मुक्त- स्वास्थ्य मंत्रालय

ये है पूरा मामला 

मामला पलामू जिले के डालटनगंज सदर प्रखंड केसुआ पंचायत के बिन्हुआ टोला का है. यहां दो ऐसे आदिम जनजाति परिवार हैं जिनके नाम से दो-दो राशन कार्ड बने हैं जबकि लाभुक को एक कार्ड से खाद्यान्न दिया जा रहा है.

मनोहर बैगा पिता गिरवर बैगा के नाम से 2 राशन कार्ड (202005051112 व 202005574268) बनाये गये हैं. ऑनलाइन रिकॉर्ड के अनुसार दूसरे कार्ड से प्रत्येक माह राशन का उठाव किया जा रहा है.

इसी प्रकार कार्ड सं 20200557412 जो अन्छू परहिया के नाम से है, उसकी मृत्यु बहुत पहले ही हो चुकी है. लेकिन उनके नाम से भी हर माह 35 किलो का राशन उठाव किया जा रहा है.

दूसरी तरफ बसन्ती कुवंर (20200557426863) को कार्ड रहने के बावजूद अप्रैल 2018 के बाद से खाद्यान्न वितरित नहीं किया जा रहा है, जबकि उनके कार्ड में भी ऑनलाइन रिकॉर्ड नियमित राशन वितरण का दिखाया जा रहा है.

सुआ गांव के बिन्हुआ टोला के परहिया परिवारों को एमओ द्वारा अप्रैल एवं मई 2020 का खाद्यान्न मुहैया कराना था, लेकिन लाभुकों को सिर्फ एक माह का राशन दिया गया.

लेकिन उनके कार्ड में जून 2020 तक राशन की मात्रा दर्ज कर दी गयी है. जब लाभुकों को उनके कार्ड में दर्ज मात्रा की जानकारी बाद में मिली तो वे काफी आक्रोशित हैं, क्योंकि यहां समुदाय में साक्षर लोगों की संख्या नगण्य है.

आदिम जनजाति परिवार इस डर से शिकायत भी दर्ज नही करा रहे हैं कि कही उनको जो अनाज मिल रहा है उससे भी हाथ न धोना पड़ जाये.

इसे भी पढ़ें : #CoronaWarriors की मौत होने पर मिलेगा शहीद का दर्जा, ओडिशा सरकार ने 50 लाख की आर्थिक मदद समेत की कई घोषणाएं

निजी डीलरों के ही नक्शे कदम पर सरकारी डीलर यानी एमओ

डालटनगंज सदर प्रखण्ड के सुआ पंचायत, बिन्हुआ टोला में करीब 35 आदिम जनजाति परहिया परिवार अत्यन्त गरीबी की हालत में जिन्दगी गुजार रहे हैं.

झारखंड सरकार के खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग के दिशा-निर्देशानुसार प्रखण्ड स्तर पर नियुक्त अधिकारी की ये प्रशासनिक जवाबदेही है कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गठित स्वयं सहायता समूहों से 35 किलो का खाद्यान्न पैकेट सुनिश्चित करे.

साथ ही एमओ या प्रखण्ड आपूर्ति पदाधिकारी को राशन वितरण की जवाबदेही दी गयी है. राज्यभर के 168 प्रखण्डों में यह व्यवस्था लागू की गयी है.

निजी डीलरों के ही नक्शे कदम पर सरकारी डीलर यानी एमओ या प्रखण्ड आपूर्ति पदाधिकारी भी भ्रष्टाचार में शामिल हो जायें तो आम गरीब अपनी फरियाद किसके पास लेकर जाये.

क्या कहते हैं प्रखण्ड आपूर्ति पदाधिकारी

न्यूजविंग ने जब डालटनगंज सदर प्रखण्ड के प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी से आदिम जनजातियों के अनाज वितरण में गड़बडी के मामले में जानकारी लेनी चाही तो उन्होंने पहले बताया कि आदिम जनजाति को डाकिया योजना के तहत मिलने वाले अनाज के लिए कोई दुकानदार नियुक्त नहीं है. इसे प्रखण्ड आपूर्ति पदाधिकारी ही देखते हैं.

जब एक परिवार के दो राशन कार्ड से राशन वितरण दिखाकर एक एक कार्ड का ही अनाज देने का प्रमाण दिखाया गया तो एमओ ने कहा कि मैं मामले को देखता हूं और जांच करता हूं.

एमओ रणधीर ने फिर कहा- राशन उनके घर तक पहुंचाने का काम स्वयंसेवक उपेन्द्र करते हैं. गड़गड़ी अगर हो रही है तो वही कर रहे होंगे.

इसे भी पढ़ें : रिम्स के कोविड-19 वार्ड में जिस महिला की मौत हुई, उसका सैंपल निगेटिव आ चुका थाः रिम्स निदेशक

Advertisement

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Related Articles

Back to top button
%d bloggers like this: