न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

पत्थलगड़ी वाला बीरबांकी : जहां साप्ताहिक बाजार में ही कर दिया जाता है मरीजों का ऑपरेशन, स्लाइन चढ़ाना तो रोज की बात

आरएमपी प्रैक्टिनसर्स भीड़भाड़ में ही कुर्सी पर ही करते हैं मरीजों का इलाज

2,819

Pravin Kumar

Ranchi : आमतौर पर कस्बाई और ग्रामीण इलाकों में लोग अपनी जरुरत की खरीददारी के लिए साप्ताहिक बाजार या हाट बाजार आते हैं. लेकिन हाल ही में पत्थलगड़ी का मामला देशभर की मीडिया में छाया हुआ था और इसे लेकर खूंटी जिला का अड़की प्रखंड भी बेहद चर्चा में रहा था. वर्षों से नक्सल प्रभावित इलाके के रूप में भी इस क्षेत्र को जाना जाता था.

बीरबांकी में लगने वाले हाट बाजार में लोग सिर्फ सामानों की खरीददारी करने ही नहीं आते बल्कि  बीमारी का इलाज कराने भी आते हैं. यहां लगने वाले सप्ताहिक हाट बाजार का इंतजार करना लोगों की मजबूरी है. इस क्षेत्र में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से चरमरायी हुई है. शनिवार को लगने वाले इस बाजार में करीब पांच आरएमपी प्रैक्टिनसर्स कुर्सी लगाकर ही मरीजों का इलाज करते हैं, वो भी खुले और भीड़भाड़ के बीच.

इतना ही नहीं यहां आसानी से देखा जा सकता है कि किस तरह से आरएमपी प्रैक्टिनसर्स कुर्सी पर बैठकर ही मरीजों को भरे बाजार में स्लाइन तो चढ़ाते ही हैं.  इसके अलावा छोटे- मोटे ऑपरेशन भी बिना झिझक के कर देते हैं.

इसे भी पढ़ें – दर्द-ए-पारा शिक्षक: बूढ़ी मां घर चलाने के लिए चुनती है इमली और लाह के बीज, दूध और सब्जियां तो सपने…

इसे भी पढ़ेंः पानी की विकराल समस्या : पानी का टैंकर देखते ही दौड़ पड़ते हैं वाल्मीकि बस्ती के लोग

बुनियादी सुविधा भी बहाल नहीं कर पायी है सरकार

प्रत्येक शनिवार को लगने वाले मुंडा अंचल के सबसे पुराने बाजार में से एक है बीरबांकी का बाजार. गौरतलब है कि इसी इलाके में पत्थलगड़ी को लेकर प्रशासन और स्थानीय लोगों के बीच टकराव की स्थिती बनी थी. बाद में कोचांग में घटित सामूहिक दुष्कर्म का मामला समाने आया था.

उस दौरान लोगों की नाराजगी इस बात को लेकर भी थी कि सरकार ने इस इलाके में बुनियादी सुविधा को बहाल नहीं किया है. इस बात का प्रमाण शनिवार को लगने वाले बीरबांकी बाजार में भी को देखने को मिल  रहा है. जहां एक बीमार आदमी को बाजार में आरएमपी प्रैक्टिसनर के द्वारा कुर्सी पर ही बैठाकर स्लाइन चढ़ाया जा रहा था. बाजार में चार से पांच आरएमपी प्रैक्टिसनर नजर आये. जहां बीमार लोगों की कतार लगी हुई थी.

महीने में एक या दो बार ही खुलते हैं स्वास्थ्य केंद्र

बीरबांकी बाजार में मिले ग्रामीण ने बताया कि, करूंगा, सिन्जुड़ी, कोचांग, तुतुई, साके, इचाहातु, बोहण्डा, रोकान, लोंगा, कसमार, नरंगा, तुबिल, चलकद, मुचिया, मदहातु, बगड़ी, लेबेद, हुडूवा, टोडंग, सिन्जानी, कोरवा, चुकलू, बघरा, बडानी, जैसे करीब आठ से दस दर्जन गांवों के लिए सरकार ने स्वास्थ्य व्यवस्था बहाल किया ही नहीं है.

इलाके में स्वास्थ्य उपकेंद्र बने तो हैं. लेकिन उसमें स्वास्थ्यकर्मी मौजूद नहीं रहते. वह भी महीने में एक दो बार ही खुलते हैं. इलाके की स्वास्थ्य व्यवस्था अभी भी झोलाछाप डॉक्टरों और आदिम युग की जड़ी-बूटी वाली व्यवस्था पर ही निर्भर है.

बीमारी के बारे में नहीं बताते आरएमपी प्रैक्टिसनर्स

Related Posts

आदिवासी जन परिषद झारखंड में समता जजमेंट लागू करने के लिए करेगा आंदोलन

बैठक में विधानसभा चुनाव 2019 पर मंथन, करम परब, कार्यकर्ता सम्मेलन, मिलन समारोह पर चर्चा

SMILE

इलाके की बदहाल स्वास्थ्य सेवा के कारण ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. झारखंड का स्वास्थ्य महकमा लाख दावे कर ले, लेकिन राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति में कोई सुधार नहीं हो रहा है.  खासकर उन इलाकों में जो वन क्षेत्र में आते हैं. बीरबांकी बाजार में कुछ ऐसा ही नजारा दिखा, जहां बुदू ओडीया को आरएमपी प्रैक्टिसनर्स के द्वारा छपरी में कुर्सी पर बैठाकर स्लाइन चढ़ाया जा रहा था.

ओडीया से बीमारी के बारे में पूछने पर उन्होंने बताया कि, कमजोरी के कारण दो बार गिर गया था, पांच दिन बिस्तर पर पड़ा रहा. आरएमपी प्रैक्टिसनर्स को बुलाया, लेकिन वो घर पर देखने नहीं आया. घरवाले बाजार लेकर आये, जहां एक बोतल स्लाइन चढ़ाया जा चुका है और यह दूसरा चढ़ रहा है. बीमारी के बारे में आरएमपी प्रैक्टिसनर्स ने कुछ पूछने पर बताने से मना कर देता है. साथ ही प्रैक्टिसनर्स का कहना है कि हम लोगों का इलाज करते हैं, जिससे लोगों को कुछ राहत मिल जाती है.

इलाके के अधिकतर लोग बीमारी की वजह से टोना टोटका मानते हैं. जिसे डायन बिसाही का नाम दे देते हैं.  बुदू ओडीया से बात करने पर लगा कि उसे अपनी बीमारी के बारे में कभी जानकारी हो ही नहीं पायेगी.

इसे भी पढ़ें – समय पर ऑफिस नहीं पहुंचते हैं झारखंड के सीनियर आइपीएस

स्वास्थ्य केंद्र में सिर्फ टीकाकरण होता है

बाजार में ही एक दूसरे आरएमपी प्रैक्टिसनर्स के पास इलाज कराने सिंजुडी गांव से आए पलटू स्वासी का कहना है कि, इलाके में स्वास्थ्य उपकेंद्र सप्ताह में एक ही दिन खुलता है. जहां सिर्फ टीकाकरण ही किया जाता है. कभी कोई डॉक्टर स्वास्थ्य उपकेंद्र में नहीं आते. लोगों को इलाज कराना होता है तो बाजार आना पड़ता है.

स्वास्थ्य सुविधा के लिए ढांचागत सुविधा का अभाव: डॉ अशोक कुमार

अड़की मेडिकल ऑफिसर इनचार्ज डॉक्टर अशोक कुमार ने इस बारे में बताया कि, इलाके में स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए ढांचागत सुविधा का अभाव है. स्वास्थ्य उपकेंद्र का अपना भवन तक नहीं है. बीरंबाकी और कोचांग में किराये के भवन में स्वास्थ्य उपकेंद्र चल रहे हैं. पत्थलगड़ी के पहले इलाके में दो नर्स बहाल थीं. कोचांग दुष्कर्म की घटना के बाद वह वापस आ गयीं.

उन्होंने कहा कि रांची और खूंटी से जाकर लोग टीकाकरण का कार्य करते हैं. बाजार में खुले में स्लाइन चढ़ाने के सवाल पर कहते हैं कि इलाके में स्वास्थ्य सुविधा का अभाव है. तीन मेडिकल प्रैक्टिसनर्स इलाके में हैं. वह आम रोगियों का इलाज भी करते हैं. साथ ही उन्होंने इस बात को स्वीकार किया कि बाजार में खुलेआम रोगियों को स्लाइन चढ़ाना गलत है.  उन्होंने कहा कि मामले की जांच की जायेगी और ग्रामीणों के लिए स्वास्थ्य सुविधा बहाल जल्दी ही करने का प्रयास होगा.

इसे भी पढ़ेंः 19 संस्थानों की संबद्धता रद्द करने को लेकर छात्रों का यूनिवर्सिटी में हंगामा,  यूनिवर्सिटी ने परीक्षा तिथि टाली  

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

You might also like
%d bloggers like this: