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पटना : नीतीश-सुशील ने की बजट की तारीफ, विपक्ष ने की आलोचना

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Patna : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ‘‘हर घर जल’’ योजना के लिए केंद्रीय बजट की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसी ही पहल राज्य में उनकी सरकार ने की है.

हालांकि, राजद और रालोसपा जैसे विपक्षी दलों ने बजट को अमीर समर्थक बताते हुए इसकी आलोचना की.

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नीतीश-सुशील ने की तारीफ

राजग के सहयोगी दल जद(यू) का नेतृत्व करने वाले सीएम नीतीश कुमार ने अर्थव्यवस्था को पांच हजार अरब डॉलर तक बढ़ाने के मकसद के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए बजट की भी प्रशंसा की.

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कहा गया कि मुख्यमंत्री ने ‘हर घर जल’ योजना का स्वागत किया है. सात निश्चय के तौर पर ‘हर घर नल का जल’ योजना पहले ही बिहार में चल रही है.

नीतीश ने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहित करने का निर्णय पर्यावरण के हित में है. “स्वच्छ भारत मिशन’’ का विस्तारीकरण करते हुए गांव में ठोस कचरा प्रबंधन लागू करने की व्यवस्था सराहनीय है. जल संरक्षण का दृष्टिकोण स्वागत योग्य एवं प्रशंसनीय है.

नीतीश ने बजट में रेलवे की योजनाओं को पूर्ण करने के लिए जन-निजी-भागीदारी के तहत राशि उगाही की बात कही गई है. सरकार को ध्यान देना चाहिए कि इससे यह संदेश न जाए कि रेलवे का निजीकरण किया जाएगा.

बिहार के उपमुख्यमंत्री और वित्तमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि बजट गांव, गरीब व किसानों पर केन्द्रित तथा रोजगार पैदा करने वाला है. अमीरों पर कर लगाने और गरीबों को बिजली, आवास, रसोई गैस और सड़क मुहैया’’ कराने के लिए बजट की तारीफ की.

उन्होंने कहा कि बिहार के 9 लाख स्वयं सहायता समूह की 9 लाख महिलाओं को 1-1 लाख का कर्ज और उसके एक करोड़ सदस्यों को 5-5 हजार के ओवरड्राफ्ट की सुविधा मिलेगी. बांस, शहद और खादी को ग्रामीण उद्योग के तौर पर विकसित करने से स्थानीय स्तर पर रोजगार का सृजन होगा.

राबड़ी ने बजट को बताया धोखा

बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री और राजद नेता राबड़ी देवी ने कहा कि इस बजट में बिहार की जनता को धोखा दिया गया है. उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य दोनों जगह राजग के सत्ता में होने के मद्देनजर बिहार को विशेष राज्य का दर्जा या किसी प्रकार की विशेष स्थिति की घोषणा की जानी चाहिए.

पूर्व केंद्रीय मंत्री और रालोसपा प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि बजट में गरीबों, किसानों, बेरोजगार युवाओं और महिलाओं के हितों की अनदेखी की गई है. इसका उद्देश्य बड़े उद्योगपतियों के हितों को साधना और अर्थव्यवस्था को पटरी से उतारना है.

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