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आरोपी झारखंड का, लेकिन बंद था बिहार के मुंगेर जेल में, पटना हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी

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Patna: पटना हाईकोर्ट में एक सनसनीखेज मामला सामने आया. एक आरोपी झारकंड का था, झारखंड पुलिस को उसकी तलाश थी, लेकिन उसे छ महीने तक बिहार के मुंगार जेल में बंद रखा गया. मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति डॉ रवि रंजन की खंडपीठ ने बिहार पुलिस की कार्यशैली पर नाराज़गी जताते हुए मौखिक रूप से कहा कि प्रथम दृष्टया यह मामला निजी स्वतन्त्रता के मौलिक अधिकार के हनन का है और आरोपी मुआवज़े का हकदार प्रतीत होता है. मामले की अगली सुनवाई 4 जुलाई को होगी.

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क्या था पूरा मामला ?
याचिकाकर्ता उत्तम शर्मा मुंगेर के कासिम बाजार थाना अंतर्गत आर्म्स एक्ट एवं शराबबंदी कानून के तहत मई, 2017 में गिरफ्तार हुआ. झारखंड के साहेबगंज जिलान्तर्गत रांगा थाना में दर्ज मामले के सिलसिले में याचिकाकर्ता उत्तम शर्मा की कोर्ट में पेशी हेतु रिमांड आदेश मुंगेर पुलिस को अगस्त 2017 में मिला. याचिकाकर्ता को 17 अक्टूबर, 2017 को मुंगेर की निचली अदालत से जमानत मिल गई. ज़मानत मिलने के बाद कानूनन मुंगेर पुलिस को झारखण्ड से आई रिमांड आदेश की तामिल करते हुए आरोपी को साहेबगंज पुलिस को सौंपना चाहिए था, लेकिन आरोपी 5 महीने से अधिक मुंगेर जेल में ही पड़ा रहा. वहीं आरोपी याचिकाकर्ता की तरफ से नवंबर, 2017 में साहेबगंज की निचली अदालत में ज़मानत हेतु अर्ज़ी डाली गई तो निचली अदालत ने इस आधार पर ज़मानत अर्ज़ी खारिज़ कर दी कि आरोपी उत्तम शर्मा झारखण्ड के किसी जेल में है ही नही !

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इसके बाद याचिकाकर्ता की ओर से पटना हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की गई.  हाईकोर्ट ने उक्त याचिका के सिलसिले में जब राज्य सरकार से गत 15 अप्रैल तक जवाब मांगा, तब आनन-फानन में मुंगेर पुलिस ने 13 अप्रैल, 2018 को याचिकाकर्ता को मुंगेर जेल से हटा कर साहेबगंज (झारखण्ड) पुलिस को रिमांड पर दे दिया. हाईकोर्ट ने इस पूरे प्रकरण में मुंगेर पुलिस के रवैये पर हैरानी जताई और प्रथम दृष्टया इसे याचिकाकर्ता के मौलिक अधिकार का हनन करार दिया.

साभार न्यूज़4नेशन वेब पोर्टल

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