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आयुष्मान भारत योजना से दूर भाग रहे मरीज, गोल्डन कार्डधारी के इलाज में भी हो रही देरी

इलाज में देरी और लापरवाही से भयभित रहते हैं मरीज और उनके परिजन

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Ranchi: केंद्र सरकार द्वारा देशवासियों के लिए प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना आयुष्मान भारत योजना का शुभारंभ किया गया. ताकि लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराई जा सके और इलाज के अभाव में लोगों की मौत ना हो. लेकिन जिस धरती से इस योजना का शुभारंभ हुआ, वहीं के मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है. स्थिति तो अब ऐसी बन गई है कि लोग इस योजना के तहत अपना इलाज भी कराना नहीं चाहते.

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मरीजों का मानना है कि आयुष्मान भारत योजना से ज्यादा बेहतर है, पैसा देकर इलाज करा लिया जाये. यह स्थिति सरकारी कार्यशैली की वजह से उत्पन्न हो रही है. दरअसल, राज्य के सबसे बड़े अस्पताल में आयुष्मान भारत योजना के तहत गोल्डन कार्डधारी को इलाज में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. उनके इलाज में भी महीनों समय लग जा रहा है. जिस वजह से मरीज अब पैसे देकर ही इलाज कराना सही समझ रहे हैं. मरीजों का मानना है कि पैसे देने से जल्दी इलाज हो जाता है.

पुरन बेदिया नहीं कराना चाहते आयुष्मान भारत के तहत अपने बच्चे का इलाज

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पुरुलिया के रहने वाले पुरन बेदिया अपने बच्चे बिरसई बेदिया का इलाज कराने रिम्स पहुंचे हैं. उन्होंने 9 नवबंर को ही अपने बेटे को रिम्स में भर्ती कराया था. बेहतर इलाज की उम्मीद लिए पुरन बेदिया पुरुलिया से रांची आये थे. लेकिन रांची आने के बाद उनका अनभुव अच्छा नहीं रहा. उन्होंने बताया कि बिरसई काम करते वक्त फिसल गया जिससे दाहिने पांव में चोट आयी थी. डॉ ने कहा कि रॉड लगाना पड़ेगा. लेकिन 10 से भी ज्यादा दिन हो गये, लेकिन ऑपरेशन की प्रक्रिया शुरु भी नहीं की गई. जबकि बेटे का सभी जांच करा दिया गया है और जांच रिपोर्ट भी आ गई है. पुरन ने बताया कि डॉक्टरों का कहना कि इंप्लांट नहीं है तो कैसे ऑपरेशन करें, जबकि पैसे देने से तुरंत ऑपरेशन करने की बात कही जाती है. इसलिए उन्होंने पैसे देकर ही इलाज कराने निर्णय लिया है.

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नहीं मिल रहा है गोल्डन कार्ड का लाभ

रिम्स के ऑर्थो वार्ड में भर्ती मरीज के परिजनों ने बताया कि उन्हें गोल्डन कार्ड का कोई लाभ नहीं मिल रहा है. गोल्डन कार्ड से इलाज कराना काफी कठिन है. इसके लिए कई प्रकार की प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है. सरकार ने तो योजना बना दी, लेकिन इसे कितना सफलतापूर्वक संचालित किया जा रहा है इसकी मॉनिटेरिंग करना भी जरुरी है.

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इंप्लांट आने में समय लगता है : डिप्टी सुपरिटेंडेंट

रिम्स के डिप्टी सुपरिटेंडेंट डॉ संजय कुमार ने बताया कि इंप्लांट आने में समय लगता है. आयुष्मान भारत के अतंर्गत इसकी प्रक्रिया अलग है. मरीज के आवश्यकता के अनुरुप इंप्लांट की डिमांड की जाती है. इसके लिए टेंडर निकाला जाता है. जिसमें कुछ समय लग जाता है.

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