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दवा बिन मर रहे मरीज, पानी-बिजली की समस्या से लोग त्रस्त और सिस्टम योगा कार्यक्रम में व्यस्त

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Sweta Kumari

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7 जून 2019 : रिम्स में मेडिसिन आईसीयू में भर्ती मरीज की मौत हो गयी. मरीज हजारीबाग का  का रहने वाला था और आयुष्मान योजना के तहत 25 मई को इलाज के लिए रिम्स में भर्ती कराया गया था. 12 दिन तक भर्ती रहने के बाद भी दवा नहीं मिली और मरीज ने दम तोड़ दिया.

12 जूनः इसी तरह से रिम्स में ही आयुष्मान कार्डधारी मरीज की मौत दवा के अभाव में हो गयी.   मरीज जमशेदपुर का रहने वाला था और आयुष्मान योजना के तहत 8 जून को इलाज के लिये रिम्स में भरती हुआ था. डॉक्टरों ने जो दवा लिखा था, वह रिम्स में उपलब्ध नहीं था.

6 जून :  रांची के गाड़ीखाना भूईयां टोली में पानी के लिए मारपीट और चाकूबाजी हुई थी. इस घटना में 6 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे. उसमें कोतवाली थाने में मामला दर्ज करवाया गया था.

इसके अलावा सूबे के लगभग हर गली मोहल्ले में निगम के टैंकर से पानी लेने के लिए लोग एक दूसरे से उलझ जा रहे हैं.

13 जून : धनबाद में गोधर 6 नंबर में पानी को लेकर दो गुटों में  जमकर मारपीट हुई. जिसमें एक दर्जन लोग घायल हो गये. घायलों को इलाज के लिए पीएमसीएच में भर्ती कराया गया. इस घटना के बाद गोधर में माहौल तनावपूर्ण है.

7-10 जून :  दैनिक अखबार प्रभात खबर में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले तीन दिनों से बिजली की हालत राजधानी में बेहद खराब है. कई इलाकों में 5-7 घंटे बिजली काटी जा रही है. इतना ही नहीं 10 घंटे तक भी बिजली किसी–किसी इलाके में काटी जा रही है और लोग त्राहिमाम कर रहे हैं.

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सूबे के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में मरीज दवाओं के अभाव में दम तोड़ रहे हैं. आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद दवा और बाकि सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं.

राज्य के विभिन्न हिस्सों में पानी की समस्या से लोग हलकान हैं. पानी के लिए लोग एक-दूसरे का खून बहा रहे हैं. लंबी-लंबी लाइनों में लगकर लोग घंटों पानी का इंतजार कर रहे हैं और जब लेने की बारी आ रही है तो मारपीट और चाकूबाजी हो रही है.

बिजली की आंख मिचौली तो सूबेभर में लोगों को रूला रही है. प्रचंड गर्मी के बावजूद बिजली  की कमी ने लोगों का हाल बेहाल कर रखा है. राजधानी के कई इलाकों में तो महज तीन दिनों में ही 728 बार बिजली कटी. हालांकि हर दिन तो राजधानी में 5-7 घंटे बिजली काटी ही जा रही है.

सूबे में जनता बेसिक जरूरत बिजली और पानी के लिए त्राहि-त्राहि कर रही है. लेकिन इस समस्या का समाधान करने की जिम्मेवारी जिसपर है, वो पूरी व्यवस्था किसी दूसरे ही काम में लगी हुई है. सूबे के सीएम से लेकर सभी अधिकारियों तक योग कार्यक्रम की तैयारियों और अभ्यास में व्यस्त हैं. राज्य मुख्यालय से लेकर जिला मुख्यालय और प्रखंड स्तर तक के अधिकारी-कर्मचारी इसी काम में व्यस्त हैं. पूरा सिस्टम सिर्फ योग के पीछे सुबह से शाम तक भाग रहा है. इसके अलावा योग से लोगों को जोड़ने के लिए अधिकारी कई तरह की प्रतियोगिताओं का भी आयोजन करवा रहे हैं. जिसके लिए बकायदा उन्हें सरकार की ओर से निर्देश जारी किए गए हैं. जिसका पालन भी अधिकारी जी-जान लगाकर कर रहे हैं.

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सभी बस इस बात में ही व्यस्त हैं कि 21 जून को होने वाले अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के लिए की जा रही तैयारियों में कोई कमी ना रह जाए. लेकिन राज्य के लोग सही मायनों में जिन समस्याओं से जूझ रहे हैं, उसपर सिस्टम का ध्यान ही नहीं जा रहा. मेन स्ट्रीम मीडिया भी इसपर चुप है. सवाल नहीं उठा रहा.

योग करना शारीरिक और मानसिक रूप से बेहद जरूरी होता है. इसे लेकर लोगों को जागरूक करना भी एक बड़ा काम है. योग ना सिर्फ शरीर को स्वस्थ रखता है, बल्कि मन को शांत और स्थिर रखने में भी सहायक होता है. मगर योग भी तभी भाता है, जब जिंदगी स्थिर हो. सुबह से शाम तक अगर बिजली और पानी के इंतजाम के लिए जद्दोजहद करना पड़े, तो ऐसे में एक बड़ा सवाल है कि क्या योग की कीमत पर हम तमाम समस्याओं को भूल जायें. क्या सरकार और सिस्टम योग कार्यक्रम की आड़ में अपनी जिम्मेदारियों से मुंह फेर लें.

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