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जो मुझपर गुजरी वह किसी पर ना गुजरे, मानव तस्करी की शिकार झारखंड की बेटी की दास्तान

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Ranchi : मानव तस्करी दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा संगठित अपराध है और डरा – धमकाकर, लालच देकर या किसी मजबूरी की वजह से इस अंधे कुएं में ढकेले जाने वाले लोग काफी परेशानियों और दुष्वारियों से दो चार होते हैं. झारखंड में मानव तस्करी का मकड़जाल टूटने की बजाये जकड़ता ही जा रहा है. वैसी ही एक घटना के बारे में झारखंड की एक बेटी ने अपनी आपबीती बतायी है. दरअसल झारखंड से ले जाकर गुड़गांव के एक परिवार को बेच दी गई थी लता (बदला हुआ नाम). पांच साल बाद लता अपनी दो माह की बच्ची के साथ झारखंड स्थित अपने गांव लौट आई. लता इन पांच वर्षों में कई दुखद स्थितियों से गुजरी, यहां तक कि उसके साथ एक घरेलू सहायक ने दुष्कर्म भी किया.

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लता की थाली में मुश्किल से खाना आ पाता था

दुनिया भर में 30 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी विरोधी दिवस के रूप में मनाया जाता है. लता की यह कहानी उन लाखों लोगों की याद दिलाती है जो हर साल मानव तस्करी का शिकार बन जाते हैं. उन्हें वेश्यावृत्ति, मजदूरी या घरेलू कार्यों में जबरन या एक अच्छी जिंदगी जीने का लालच देकर बेचा जाता है. लता के साथ पिछले साल उसके साथ काम करने वाले एक घरेलू सहायक ने दुष्कर्म किया. वह 19 घंटे तक काम करती थी फिर भी उसकी थाली में मुश्किल से ही खाना आ पाता था.

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वह लोग जब परीक्षा की तैयारी कर रहे होते थे मैं फर्स साफ कर रही होती थी

लता ने बताया कि हर दिन सुबह चार बजे से रात 11 बजे तक उसे काम करना पड़ता था. मैं घर का हर काम करती थी. उस परिवार के बच्चे जितनी उम्र के थे, उतनी ही उम्र मेरी भी थी. वह लोग जब अपनी परीक्षा की तैयारी करते थे तब मैं फर्श साफ कर रही होती थी. उसने बताया कि उसे सबकी थालियों का बचा हुआ खाना दिया जाता था और अगर थालियों में जूठा खाना नहीं बचता था तो उसे भूखे ही सोना पड़ता था.

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घरेलू सहायक ने किया दुष्कर्म

लता ने बताया कि उनकी दुनिया एक बार फिर तब तबाह हो गई जब उनके साथ एक घरेलू सहायक ने दुष्कर्म किया. लता ने कहा कि मुझे नहीं पता चल रहा था कि मेरे साथ क्या हुआ. मेरे पेट में दर्द हुआ, जिसके बाद घर के मालिक मुझे डॉक्टर के पास ले गया जहां मुझे पता चला कि मैं गर्भवती हूं. उन्होंने गर्भपात कराने की कोशिश भी की लेकिन तब तक काफी देर हो चुका थी. अब लता चाहती हैं कि वह जिन परिस्थितियों से गुजरीं, वैसी परिस्थितियों से कोई न गुजरे.

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भारत को माना जाता है मानव तस्करी का गढ़

नशीली दवाओं और हथियारों के कारोबार के बाद मानव तस्करी का नंबर है और भारत को एशिया में मानव तस्करी का गढ़ माना जाता है. संयुक्त राष्ट्र की परिभाषा के अनुसार, किसी व्यक्ति को डराकर, बल के प्रयोग से या दोषपूर्ण तरीके से किसी कार्य के लिए मजबूर करना, उसे एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाना या बंदी बनाकर रखने की गतिविधि मानव तस्करी कहलाती है. संयुक्त राष्ट्र के मादक पदार्थ और अपराध संबंधी विभाग की एक रिपोर्ट के मुताबिक प्रत्येक देश मानव तस्करी के दंश को  झेल रहा है, चाहे बात वहां से तस्करी की जाने की हो, तस्करी कर वहां लाए जाने की हो या उस जगह से गुजरने की हो. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के मुताबिक भारत में साल 2016 में 20,000 महिलाएं और बच्चे मानव तस्करी का शिकार हुए. तस्करी के खिलाफ एक सख्त कानून बनाए जाने के लिए पिछले सप्ताह लोकसभा में तस्करी विरोधी विधेयक पारित हुआ है. संयुक्त राष्ट्र ने मानव तस्करी के खिलाफ जागरुकता फैलाने के लिए 30 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी विरोधी दिवस मनाने का फैसला किया था.

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