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झारखंड में दल-बदल मामला : तीन साल 10 महीने चली सुनवाई, फैसला 20 को

  • स्पीकर कोर्ट में मार्च 2015 में पहली और 12 दिसंबर 2018 को हुई थी अंतिम सुनवाई
  • मार्च 2015 से 12 दिसंबर 2018 तक हुई कुल 64 सुनवाई
  • भाजपा की ओर से 57 नेता-कार्यकर्ताओं की हुई गवाही, झाविमो की ओर से आठ गवाही

Pravin Kumar

Ranchi : झारखंड के छह विधायकों के खिलाफ चल रहे दल-बदल मामले में स्पीकर 20 फरवरी को फैसला सुना सकते हैं. स्पीकर कोर्ट में दल-बदल मामले को लेकर मार्च 2015 में पहली सुनवाई हुई थी. 12 दिसंबर 2018 को अंतिम सुनवाई हुई. भाजपा की ओर से 57 नेता-कार्यकर्ताओं ने गवाही दी थी. जबकि, झाविमो की ओर से आठ नेता-कार्यकर्ताओं ने गवाही थी. छह विधायकों के दल-बदल को लेकर झारखंड विकास मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी और विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने झारखंड विधानसभा के अध्यक्ष से 10 और 11 फरवरी 2015 को 10वीं अनुसूचि के तहत दल-बदल के मामले में कार्रवाई करने की मांग की थी. स्पीकर के कोर्ट में तीन साल दस महीने तक चली इस मामले की सुनवाई पिछले साल 12 दिसंबर को पूरी हुई थी. इसके बाद स्पीकर ने फैसला सुरक्षित रखा था.

झाविमो के छह विधायक भाजपा में शामिल हुए थे

वर्ष 2014 में हुए झारखंड विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 37 सीटों पर जीत हासिल की थी. जबकि, झाविमो ने आठ सीटें जीती थीं. झाविमो से चुनाव जीतने के बाद इनमें से छह विधायक भाजपा में शामिल हो गये. इन छह विधायकों के भाजपा में शामिल होने के साथ ही भाजपा में विधायकों की संख्या 43 हो गयी. 81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 41 विधायकों की जरूरत होती है. जबकि, भाजपा के साथ आजसू पार्टी के चार विधायक भी सरकार के साथ हैं.

ये विधायक भाजपा में हुए थे शामिल

  1. चंदनकियारी से अमर बाउरी :अमर बाउरी ने 2014 में पहली बार चुनाव जीता. इससे पहले वह 2009 में भी झाविमो के टिकट पर चुनाव लड़कर आजसू पार्टी से हार गये थे. 2014 में उन्होंने पूर्व मंत्री उमाकांत रजक को हराया. भाजपा में शामिल होने के बाद सरकार में उन्हें भूमि सुधार राजस्व मंत्री बनाया गया.
  2. सारठ से रणधीर सिंह : रणधीर सिंह सरकार में कृषि मंत्री हैं. 2014 में पहली दफा चुनाव जीते. इससे पहले 2009 के चुनाव में वह सारठ विधानसभा क्षेत्र से लोकतांत्रिक समता दल से चुनाव लड़े थे. इस चुनाव में झामुमो के शशांक शेखर भोक्ता को जीत मिली थी. साल 2014 में रणधीर सिंह झाविमो के टिकट पर चुनाव जीते.
  3. हटिया से नवीन जायसवाल : दल-बदल के घेरे में आये नवीन जायसवाल ने आजसू पार्टी से राजनीति की शुरुआत की. 2009 में हटिया विधानसभा चुनाव में तीसरे नंबर पर थे. कांग्रेस के विधायक गोपाल शरण नाथ शाहदेव के निधन के बाद हटिया की रिक्त सीट पर 2012 में हुए उपचुनाव में नवीन जायसवाल आजसू पार्टी से चुनाव जीते. 2014 में नवीन जायसवाल ने झाविमो का दामन थामा और चुनाव लड़े. नवीन जायसवाल ने भाजपा की सीमा शर्मा को हराकर दोबारा इस सीट पर जीत हासिल की. चुनाव जीतने के बाद झाविमो छोड़कर भाजपा में शामिल हो गये.
  4. बरकट्ठा से जानकी यादव : बरकट्ठा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीते. 2005 के चुनाव में वह राजद के टिकट से चुनाव लड़े थे. 2009 के चुनाव में भी वह झाविमो के टिकट पर चुनाव लड़े और वह दूसरे नंबर थे. 2104 में झाविमो ने जानकी यादव को फिर चुनाव लड़ाया. इस बार चुनाव जीतने के बाद वह भाजपा में शामिल हो गये. फिलहाल जानकी यादव आवास बोर्ड के अध्यक्ष भी हैं.
  5. सिमरिया से गणेश गंझू : सिमरिया विधानसभा क्षेत्र से गणेश गंझू 2014 में पहली बार झाविमो के टिकट से चुनाव जीते. चुनाव जीतने के बाद वह भी भाजपा में शामिल हो गये. बाद में सरकार ने गणेश गंझू को मार्केटिंग बोर्ड का अध्यक्ष बनाया. 2009 में गणेश गंझू झामुमो के टिकट से चुनाव लड़े थे और वह दूसरे नंबर पर थे.
  6. डालटनगंज से आलोक चौरसिया : आलोक चौरसिया भी पहली बार चुनाव जीतनेवालों में शामिल हैं. 2014 में झाविमो के टिकट से चुनाव लड़कर उन्होंने कांग्रेस के पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी को हराया. भाजपा में शामिल होने के बाद सरकार ने आलोक चौरसिया को वन विकास निगम का अध्यक्ष बनाया.

क्या कहते हैं झाविमो के मीडिया प्रभारी

झाविमो के मीडिया प्रभारी तौहीद आलम ने कहा कि विधायकों का पार्टी मर्ज होने का दावा सरासर बेबुनियाद और बेतुका है. पार्टी अपने दमखम से लिट्टीपाड़ा और लोहरदगा उपचुनाव लड़ी. जिला परिषद एवं नगर निगम का चुनाव भी अपने सिंबल पर लड़ते आ रही है, तो पार्टी मर्ज कहां हुई. चुनाव आयोग एवं विधानसभा की ओर से भी झारखंड विकास मोर्चा के नाम से पत्र भी प्रेषित किया जाता रहा है, जो अब तक जारी है. ऐसे में विधायकों का दावा बेतुका और बेबुनियाद है. आनेवाले चुनाव में जनता इन्हें सबक सिखायेगी. झाविमो के छह विधायकों को भाजपा ने तोड़कर दो को मंत्री और तीन को बोर्ड और निगम का अध्यक्ष बनाया. भाजपा ने लोकतंत्र की हत्या कर राज्य की जनता के मतों का खरीद-फरोख्त करने का काम किया है.

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