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संसद का बजट सत्र 31 जनवरी से, 14 दिन चलेगा, सरकार चौंकायेगी, खुलेगा पिटारा!

संसद का बजट सत्र 14 दिनों का होगा. बजट सत्र 31 जनवरी से शुरू होगा. यह केंद्र सरकार का फैसला है.  इतने लंबे बजट सत्र के सरकार के फैसले से कयास लगने लगे हैं कि सरकार सामान्य श्रेणी के गरीबों के लिए कोटा की तर्ज पर कुछ और चौंकाने वाले बड़े फैसले ले सकती है.

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NewDelhi : संसद का बजट सत्र 14 दिनों का होगा. बजट सत्र 31 जनवरी से शुरू होगा. यह केंद्र सरकार का फैसला है. इतने लंबे बजट सत्र के सरकार के फैसले से कयास लगने लगे हैं कि सरकार सामान्य श्रेणी के गरीबों के लिए कोटा की तर्ज पर कुछ और चौंकाने वाले बड़े फैसले ले सकती है. यह संकेत है कि सरकार नागरिकता संशोधन विधेयक, तीन तलाक को दंडनीय बनाने वाले बिल जैसे लंबित विधेयक भी पास कराने की कोशिश कर सकती है. बता दें कि चुनाव से पहले बजट संबंधी औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए महज कुछ दिनों का सत्र पर्याप्त होता है, लिहाजा लंबा सत्र विपक्ष को कुछ सोचने को विवश कर रहा है. आम चुनाव से पहले सरकार पूर्ण बजट पेश करने की स्थिति में नहीं होती. बजट सत्र में कुछ महीनों का खर्च उठाने के लिए लेखानुदान मांग पेश किया जाता है. इसे वोट ऑन अकाउंट या फिर अंतरिम बजट भी कहा जाता है. वोट ऑन अकाउंट के लिए कुछ दिनों का सत्र ही पर्याप्त होता है लेकिन सरकार ने 14 दिनों का सत्र बुलाया है.

एक फरवरी को अंतरिम बजट पेश हो जायेगा

एक फरवरी को अंतरिम बजट पेश हो जायेगा, ऐसे में सियासी गलियारों में चर्चा तेज हो गयी हैं कि चुनाव पूर्व सरकार अपने तरकश से जनरल कोटा की तर्ज पर कुछ और तीर छोड़ सकती है. बजट सत्र आम चुनाव से ठीक पहले शुरू हो रहा है, ऐसे में इस बात की संभावना वैसे भी बहुत कम है कि विपक्ष विवादित मुद्दों पर सहयोगी रुख अपनाये. हालांकि, 10 प्रतिशत जनरल कोटे से जुड़े बिल पर यह भी देखा गया कि ज्यादातर पार्टियों को इसका विरोध करते नहीं बना. इस बात की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि सरकार इसी तरह के कुछ और दांव खेल सकती है, जिसमें विपक्ष भी विरोध करने में हिचके. शीतकालीन सत्र में संसद का काम काफी प्रभावित हुआ और राज्यसभा में मुश्किल से कुछ काम हुआ. हालांकि जनरल कोटा बिल इसका अपवाद रहा, जिस पर पूरे दिन राज़्य सभा में कार्यवाही चलती रही.

किसानों को वित्तीय राहत पहुंचाने का फैसला संभव

कहा जा रहा है कि जिस तरह अचानक लाये गये इस बिल को कैबिनेट से मंजूरी मिलने के 2-3 दिनों के भीतर ही संसद की मंजूरी भी मिल गयी, उसी तरह सरकार चुनाव से पहले कुछ और कदम उठा सकती है. इसमें ऐसे कदम भी शामिल हो सकते हैं, जिनमें संसद की मंजूरी की जरूरत नहीं होगी. उदाहरण के तौर पर, किसानों को वित्तीय राहत पहुंचाने जैसे फैसले शामिल हैं. अयोध्या का राम मंदिर भी एक अहम मसला है. विश्व हिंदू परिषद जैसे हिंदूवादी संगठन और आरएसएस सरकार से मांग कर रहे हैं कि इसके लिए संसद से कानून पास कराया जाये. हालांकि, प्रधानमंत्री मोदी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि राम मंदिर पर वह कोर्ट के फैसले का इंतजार करेंगे और अदालती प्रक्रिया में विधायिका द्वारा दखल नहीं देंगे.

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