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12 साल से कम उम्र की बच्चियों से रेप पर सीधे सजा-ए-मौत, संसद में पास हुआ बिल

12 से 16 साल की उम्र की बच्चियों से रेप पर आजीवन कारावास

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New Delhi: बारह साल से कम उम्र की बच्चियों के साथ बलात्कार करने पर अब फांसी की सजा मिलेगी. वहीं 16 साल से कम उम्र की बच्चियों से दुष्कर्म पर आजीवन कारावास की सजा होगी. केन्द्र सरकार ने ध्वनिमत से दंड विधि संशोधन विधेयक को पारित कर दिया, जिसमें छोटी बच्चियों के साथ बलात्कार के मामलों में कड़ी सजा के प्रावधान किए गए हैं.

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लोकसभा में पहले ही पारित हो गया है बिल

लोकसभा इस बिल को पहले ही पारित कर चुकी है. इस संबंध में अध्यादेश 21 अप्रैल को जारी किया गया था. विपक्ष ने इस बिल को सदन की संयुक्त प्रवर समिति के पास भेजने के लिए हंगामा भी किया, लेकिन गृहराज्य मंत्री किरण रिजिजू ने विपक्ष की मांग खारिज कर दी. करीब दो घंटे तक इस बिल को लेकर पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई. अंत में इसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया.

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दुष्कर्म के दोषियों को कड़ी सजा जरुरी- रिजिजू

गृहराज्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि देश में 12 से 16 साल की बच्चियों के साथ बलात्कार के काफी मामले सामने आ रहे हैं. इसलिए अपराधियों के लिए कठोर सजा के प्रावधान जरूरी है. उन्होंने कहा कि 16 साल से कम उम्र की बालिका के साथ बलात्कार करने पर न्यूनतम सजा दस साल से बढ़ाकर 20 साल सश्रम कारावास किया गया है. इस मामले में अधिकतम सजा ताउम्र कैद और जुमार्ना होगा. इसी तरह से 12 साल से कम उम्र की बालिकाओं के साथ बलात्कार के दोषियों को भी कम से कम 20 साल सश्रम कारावास की सजा का प्रावधान है. इन मामलों में मृत्युदंड भी दिया जा सकता है.

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रेप के अन्य मामलों में भी न्यूनतम सजा 10 साल की गई

बलात्कार के अन्य मामलों में भी न्यूनतम सजा सात साल से बढ़ाकर 1० साल की गयी है. रिजिजू ने कहा कि बलात्कार के सभी मामलों में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद दो महीने के अंदर जांच पूरी करनी होगी. पहले जांच के लिए अवधि तीन महीने थी. इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि बलात्कार से संबंधित मामले महिला अधिकारी ही दर्ज करें और वे दक्ष हों. जांच का काम भी महिला अधिकारी को ही सौंपा जाएगा. बलात्कार के मामले में किसी अधिकारी के खिलाफ भी मामला दर्ज करने के लिए पहले अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी.

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अस्पतालों में रेप पीड़िता का होगा मुफ्त ईलाज, पीड़िता के चरित्र पर सवाल नहीं उठा सकेंगे वकील

गृह राज्य मंत्री ने कहा कि सभी अस्पतालों के लिए बलात्कार पीड़तिा का नि:शुल्क इलाज होगा. इसके साथ ही सुनवाई के दौरान कोई वकील पीड़िता के चरित्र पर सवाल नहीं कर सकेगा. वह अदालत में महिला के चरित्र को लेकर कोई मुद्दा नहीं उठाएगा. मामला न्यायिक मजिस्ट्रेट के संज्ञान में आने पर उसे तुरंत इसे उद्धृत करना होगा. उन्होंने कहा कि बलात्कार से जुड़े मामलों में फॉरेंसिक जाँच के लिए हर शहर में विशेष प्रयोगशालाएं बनायी जायेंगी. सुनवाई पूरी करने के लिए भी दो महीने की समय सीमा तय की गयी है, जबकि अपील पर सुनवाई छह महीने के अंदर पूरी करनी होगी. रिजिजू ने कहा कि 12 साल और 16 साल से कम उम्र की बालिकाओं के साथ बलात्कार के मामलों में अग्रिम जमानत नहीं मिल सकेगी.

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