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माता-पिता जेल में, घर में हुई चोरी, FIR कराने गयी नाबालिग तो बोले प्रभारी- किसी बड़े को लेकर आओ

Ranchi: राजधानी रांची के तुपुदाना ओपी में एक 16 वर्षीय लड़की एफआइआर दर्ज कराने गयी तो थाना प्रभारी ने एफआइआर दर्ज करने से मना कर दिया. ओपी प्रभारी कन्हैया सिंह ने उससे कहा कि तुम बच्ची हो, किसी बड़े आदमी को लेकर आओ, तभी एफआइआर दर्ज की जायेगी.

तुपुदाना में वॉल पुट्टी की फैक्ट्री के मालिक और मालकिन किसी मामले में जेल में है. उनके तीन नाबालिग बच्चे हैं. तीन तारीख को चोर ने उनकी फैक्ट्री का ताला तोड़कर 10 लाख रुपये के सामान की चोरी कर ली. बच्ची आरोपी को पहचानती है और उसके खिलाफ थाने में एफआइआर दर्ज कराने गयी थी. लेकिन थाना प्रभारी ने बच्ची को लौटा दिया.

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इस घटना से बच्चे काफी परेशान है. इस मामले पर थाना प्रभारी ने कहा है कि बच्ची थाने आयी थी और बच्ची की फरियाद को सुनने के लिए एक अधिकारी को कहा गया था.

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बता दें कि दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 154 और 155 के तहत थाना प्रभारी की लीगल ड्यूटी है कि वो किसी भी अपराध की शिकायत मिलने के बाद एफआईआर दर्ज करे. साथ ही शिकायत देने वाले को इसकी रिसीविंग मुफ्त में दे.

अगर पुलिस अधिकारी एफआईआर दर्ज करने से मना करता है, तो उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता यानी आईपीसी की धारा 166 के तहत कार्रवाई की जा सकती है. आईपीसी की धारा 166 के तहत ऐसे पुलिस अधिकारी को 6 महीने से लेकर 2 साल तक की सजा हो सकती है. इसके साथ ही उस पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है.

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इसके अलावा पीड़ित व्यक्ति के पास जिले के पुलिस अधीक्षक और पुलिस महानिदेशक के पास भी शिकायत करने का विकल्प है. इसके बाद भी अगर पुलिस शिकायत नहीं दर्ज करती है, तो आप कोर्ट जा सकते हैं और मानवाधिकार आयोग की मदद ले सकते हैं.

न्यायिक मजिस्ट्रेट को सीआरपीसी की धारा 156 के तहत शक्ति मिली है कि वो पुलिस को मामले की शिकायत दर्ज करने का आदेश दे सकता है.

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