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#ParaTeachers का आंदोलन दशहरा तक के लिए स्थगित, एक बार फिर मनाने में सफल रहा शिक्षा विभाग

Ranchi : पारा शिक्षकों के लिए नियमावली बनाने को लेकर गुरुवार को शिक्षा मंत्री नीरा यादव और आला अधिकारियों ने उनके साथ वार्ता की. लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला.

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इस दौरान पारा शिक्षकों को आश्वासन दिया गया है कि अक्टूबर में आचार संहिता लागू होने के पहले नियमावली दे दी जायेगी जिसके बाद मोर्चा ने दशहरा तक आंदोलन स्थगित करने की बात कही.

एकीकृत पारा शिक्षक संघर्ष मोर्चा की ओर से बताया गया कि सरकार को दशहरा तक का समय दिया गया है. इसके पहले कहा गया था कि अगर उच्चस्तरीय कमेटी की बैठक में सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो मोर्चा आंदोलन करेगा.

इसके लिए 25 सिंतबर से ही पारा शिक्षक मोरहाबादी मैदान में एकजुट हुए. आंदोलन स्थगित होने के बाद सभी वापस लौटे.

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मुख्यमंत्री के आदेश पर लिखित प्रस्ताव मांगा शिक्षा मंत्री ने

बैठक में पारा शिक्षकों का एक प्रतिनिधिमंडल उपस्थित था. हालांकि बैठक में पारा शिक्षकों के नियमावली संबधी निर्णय और प्रस्ताव लाये जाने थे. साथ में पारा शिक्षकों को नियमावली का प्रारूप दिया जाना था.

लेकिन ऐसा नहीं हुआ. एकीकृत पारा शिक्षक संघर्ष मोर्चा के प्रतिनिधिमंडल को मंत्री नीरा यादव ने कहा कि पारा शिक्षक क्या चाहते है, उनकी मांगों को लिखित में दिजिये.

पारा शिक्षकों को इस दौरान बताया गया कि मुख्यमंत्री ने उच्चस्तरीय कमेटी को यह आदेश दिया है कि पारा शिक्षक क्या चाहते है उसका लिखित मांगा जाय.

बैठक में जाने के पहले पारा शिक्षकों को उम्मीद थी कि उनके हित में निर्णय लिया जायेगा. पारा शिक्षकों ने इस बैठक को शून्य बताया. प्रतिनिधिमंडल को नियमावली से संबधित कोई जानकारी नहीं दी गयी.

पारा शिक्षकों ने अपने प्रस्ताव में क्या दिया

शिक्षा मंत्री नीरा यादव की ओर से पारा शिक्षकों से प्रस्ताव मांगे जाने पर, प्रतिनिधिमंडल ने तुरंत लिखित प्रस्ताव दिया.

प्रस्ताव में टेट पास पारा शिक्षकों को अनुभव के आधार पर सहायक शिक्षक के पद पर समायोजित करने और ऐसे शिक्षकों को वेतन नौ हजार से 34,800 करने, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार प्रशिक्षित पारा शिक्षकों को 5,200 से 20,000 तक का वेतनमान दिया जाये, अप्रशिक्षित पारा शिक्षकों को प्रशिक्षण के लिये 31 मार्च 2020 तक का समय देने की मांग शामिल है.

साथ ही ये प्रावधान भी करने का प्रस्ताव दिया गया है कि पारा शिक्षकों के प्रशिक्षित होते ही उन्हें 5,200 से 20,200 तक का वेतन और ईएसआइ, पीएफ समेत सभी सुविधाएं दी जायें.

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मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव के कहने पर पारा शिक्षकों ने टाला था आंदोलन

दस सिंतबर को पारा शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल की बैठक मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव सुनील वर्णवाल के साथ हुई थी. जिसमें पारा शिक्षकों को यह आश्वासन दिया गया था कि उच्चस्तरीय बैठक में पारा शिक्षकों के हित में निर्णय लिया जायेगा.

जिसके बाद पारा शिक्षकों ने 12 सिंतबर को प्रधानमंत्री कार्यक्रम के दौरान तिरंगा लेकर न्याय मांग और 16 सितंबर को जमशेदपुर में मुख्यमंत्री आवास घेराव का कार्यक्रम स्थगित कर दिया.

उच्चस्तरीय बैठक 25 सिंतबर को ही होनी थी, लेकिन शिक्षा परियोजना की ओर से बैठक 26 सिंतबर कर दिया गया.

उच्चस्तरीय कमेटी में नहीं थे पारा शिक्षक

25 सिंतबर को बुलायी गयी उच्चस्तरीय कमेटी की बैठक में पारा शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल को नहीं बुलाया गया था. इसी दिन मोर्चा के शीर्ष सदस्यों के नाम राज्य शिक्षा परियोजना की ओर से पत्र दिया गया, जिसमें 26 को होने वाली बैठक में पारा शिक्षकों को बुलाया गया.

17 जनवरी 2019 को पारा शिक्षकों के आंदोलन के समाप्ति के साथ मुख्यमंत्री और पारा शिक्षकों के बीच समझौता हुआ था. इसी दौरान पारा शिक्षकों के नियमावली और वेतनमान के लिये उच्चस्तरीय कमेटी भी बनायी गयी.

लेकिन इसमें पारा शिक्षकों को शामिल नहीं किया. इसके पहले जितनी भी पारा शिक्षकों से संबधित कमेटियां बनी, सब में पारा शिक्षकों का प्रतिनिधिमंडल शामिल रहा है.

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