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सरकार के आश्वासन को टालने का बहाना मानते हैं #ParaTeachers, पढ़िये क्या कह रहे हैं

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Ranchi: झारखंड सरकार ने 65 हजार पारा शिक्षकों की हड़ताल को समाप्त कराने में सफलता हासिल कर ली है.

सरकार ने आश्वासन दिया है कि विधानसभा चुनाव के लिए आचार संहिता लगने से पहले वेतनमान निर्धारण की नियमावली तैयार कर ली जायेगी.

पारा शिक्षकों के संघ के पदाधिकारी ने दुर्गापूजा तक नियमावली जारी करने का आग्रह किया है. हालांकि हड़ताल को समाप्त कर दिया गया है.

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पारा शिक्षकों के एक समूह को सरकार पर अब भी विश्वास नहीं है. उन्हें लगता है कि सरकार सिर्फ चुनाव भर मामले को टाल रही है. ऐसा पहले भी हो चुका है.

इस मुद्दे को लेकर पारा शिक्षक व आम लोग फेसबुक व व्हाट्सएप ग्रुप पर जो प्रतिक्रिया दे रहे हैं उन्हें हम प्रकाशित कर रहे हैं ताकि सत्ता को उनके राय का पता चल सके.

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धनेश्वर प्रसाद

जहां तक सरकार के आश्वासन पर पारा शिक्षकों का भरोसा करने की बात है तो आज तक सिर्फ आश्वासन ही तो मिला है. जब-जब हम आंदोलन की रूपरेखा तैयार करते हैं शिक्षा विभाग और सरकार अपनी आश्वासन की पोटली ढूंढ़ती है, न कि हमेशा के लिए पारा समस्या का समाधान करती है.

वर्तमान सरकार जब से सत्ता में आई है, पारा शिक्षक कल्याण हेतु उच्चस्तरीय कमिटी और निम्नस्तरीय कमिटी बनाकर अन्य राज्यों में भम्रण की. इतना ही उपलब्धि पारा हित में है. पिछला आन्दोलन 90 दिन में नियमावली व स्थायीकरण का सपना दिखाकर समाप्त किया गया.

90 दिन बीतने के बाद भी जब पारा शिक्षक के हित की दिशा में किसी प्रकार की सरकार की गतिविधि ना देख पुनः पारा शिक्षकों ने अपना दुख प्रधानमंत्री के झारखंड आगमन पर प्रधानमंत्री को सुनाने की रणनीति बनायी.  तब सरकार की नींद खुलती है और उच्च स्तरीय कमिटी के बुलावे का एक और आश्वासन की घूंटी पिलाकर पारा शिक्षक की उग्रता को शांत किया गया.

वर्तमान में दो-दो बैठक में परिणाम शून्य, कैसे भरोसा करें. सरकार के आश्वासन से हम पारा शिक्षकों का विश्वास उठ चुका है, लेकिन अब हम चाहकर भी दूसरे रास्ते में जाने के लायक नहीं रहे. हां, आश्वासन की बड़ी-बड़ी अक्षरों में प्रिंट मीडिया लिखकर प्रचार-प्रसार कर आगामी चुनाव में जनता के बीच पारा हित में कल्याणकारी उपहार का ढ़िढोरा पीटकर जनता के सामने पारा टीचर का उपहास बनाया जायेगा. जब तक पारा शिक्षकों को कुछ मिलता नहीं, कोरा आश्वासन मात्र हमारे लिए एक अच्छा मजाक है और कुछ नहीं.

कमला टूटी

सर टेट वाला को नियमावली मिल गयी होगी, इसीलिए आंदोलन को स्थगित कर रहे हैं. धन्यवाद भाइयों को.

बीणा लकड़ा

मैं कहना चाहूंगी कि जब तक सरकार हमारी मांगों को पूरा नहीं करती तब तक हमें आगे की रणनीति बनाने की जरूरत है. टेट की बात कहें तो, टेट पास साथी बिना टेट पास पारा शिक्षकों का साथ छोड़ दे रहे हैं.

पॉवेल कुमार

राष्ट्रपति जी का आगमन है. सरकार चुनावी जुमला बोल रहा है. जो सरकार 5 साल डबल इंजन वाली कुछ न कर सकी, क्या भरोसा दोबारा आकर करेगी. मैं सरकार की वार्ता से संतुष्ट नही हूं. जुमला बाजी बंद कर सरकार कैबिनेट की मीटिंग बुला कर सभी संघों पर कार्रवाई करती, तो इनकी इच्छा शक्ति का सही मायने में लोहा माना जा सकता है.

जैसे महल के सामने झोपड़ा रहने से महल की शोभा कम हो जाती है, उसी प्रकार धरना-प्रदर्शन से महामहिम के आवभगत में कमी हो जायेगी. इसीलिए एसडीओ की ओर से सभी संगठन को हटाने का आदेश दिया गया.

नसीम अहमद

गूंगी बहरी सरकार की मनसा सही नहीं. ये शिक्षकों का सिर्फ और सिर्फ शोषण करना जानती है. इनका इरादा नेक नहीं.

शौकत अंसारी

कोई संतुष्ट नहीं है.

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