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परमवीर चक्र विजेता अल्बर्ट एक्का : जिसने पाकिस्तानियों की मशीनगनों को जवाब अपनी राइफल की संगीन से दिया था

शहादत दिवस पर विशेष

Ranchi : 3 दिसंबर 1971 की वह सर्द सुबह थी. भारतीय सेना के 14 गार्ड्स के लांस नायक अल्बर्ट एक्का और उनके साथियों को अगरतल्ला की सीमा पर गंगासागर रेलवे स्टेशन के पास हमले के आदेश मिले. सामने पाकिस्तानी सेना के बंकर थे.

जब भारतीय जवान आगे बढ़े तो सुरक्षित पोजीशनों पर तैनात पाकिस्तानी सेना ने भी फायरिंग शुरू कर दी. पाकिस्तानी सैनिक बंकरों में जमे थे और मशीनगनो से हैवी फायरिंग कर रहे थे. इससे भारतीय सेना आगे नहीं बढ़ पा रही थी.

इस बीच अल्बर्ट एक्का की निगाहों ने उस बंकर की पोजीशन भांप ली जिससे भारतीय सैनिकों पर मशीनगनों से गोलियों की बौछार आ रही थी. इसके बाद अल्बर्ट एक्का ने एक कठिन फैसला लिया. अपनी संगीन लगी राइफल के साथ चलती गोलियों के बीच रेंगते हुए उस बंकर तक पहुंचने में सफल रहे. जब वे पाकिस्तानी सैनिकों के बंकर में घुसे तो वहां दो सैनिक मौजूद थे.

दोनों लगातार भारतीय जवानों की और फायरिंग कर रहे थे. अचानक से अल्बर्ट एक्का को सामने देख वे भौचक्के रह गए. अल्बर्ट एक्का शेर की तरह झपटे और दोनों को अपनी राइफल की संगीन से मौत की नींद सुला दिया. पाक सेना की मशीनगन को खामोश करना युद्ध में जीत की ओर पहला कदम था.

घायल और खून से लथपथ अल्बर्ट इतने पर नहीं रूके और गोलियां बरसाते हुए दूसरे बंकर की ओर बढ़े। संगीनों से दुश्मनों के शरीर को बेधते और ग्रेनेड से दुश्मनों के बंकरों को उड़ाते हुए वे आगे बढ़ते रहें.

थोड़ी देर में युद्ध का नजारा बदल चुका था. पाकिस्तानी सेना की मशीनगनें एक खामोश हो चुकी थीं. पाकिस्तानी सैनिकों के बीच अफरा-तफरी मच चुकी थी. उन्हें भारत की ओर से ऐसे घातक हमले की उम्मीद नहीं थी. अल्बर्ट एक्का ने अपने साथियों के लिए रास्ता खोल दिया था. इसके बाद भारतीय सेना को रोकने के लिए पाकिस्तानी सेना के पास कोई रास्ता नहीं था.

गोलियों से छलनी और बुरी तरह घायल अल्बर्ट एक्का ने अपनी शहादत दे दी. उनके शौर्य का दुश्मनों के पास कोई जवाब नहीं था. उनकी असाधारण वीरता ने उनके साथियों के बीच वह जज्बा भर दिया कि संख्या में कम होने के बाद भी भारतीय सैनिक पाकिस्तानियों पर भारी पड़े.

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एक नजर में

  • युद्ध 3 दिसंबर 1971 को शुरू हुआ था और और पहले ही दिन अल्बर्ट एक्का ने अपनी शहादत दी थी. उस समय उनकी उम्र 29 वर्ष की थी.
  • 16 दिसंबर 1971 को तकरीबन 90000 पाकिस्तानी सैनिकों के साथ पाकिस्तानी सेना के जनरल नियाजी ने आत्मसमर्पण किया था. यह युद्ध के इतिहास का सबसे बड़ा आत्मसमर्पण था.
  • इस युद्ध के बाद दुनिया में एक नए राष्ट्र बांग्लादेश का उदय हुआ.
  • गंगासागर रेलवे स्टेशन से अगरतल्ला तकरीबन 6 किलोमीटर दूर था. इस जीत ने पाकिस्तानी सेना की अगरतल्ला पर आक्रमण की योजना को बेकार कर दिया था और भारत की जीत की बुनियाद रखी.
  • लांस नायक अल्बर्ट एक्का ने जिस असाधारण शौर्य और वीरता का प्रदर्शन किया था उसकी वजह से उन्हें वीरता का सर्वोच्च सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया.

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