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पारामेडिकल कर्मियों ने कहा- वार्ता के बाद ही टूटेगी हड़ताल, इधर विभाग के तेवर तल्ख

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Ranchi. अनुबंध पर काम करने वाले करीब 10 हजार पारामेडिकल कर्मी अपनी मांगों को लेकर बुधवार से हड़ताल पर हैं. कोरोना आपदा के इस दौर में हड़ताल का सीधा असर स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ रहा है. ऑल इंडिया एनएचआरएम के राष्ट्रीय सचिव विनय कुमार का कहना है कि बुधवार से ही हम लोग हड़ताल पर हैं. लेकिन सरकार की तरफ से वार्ता के लिए कोई पहल नहीं की जा रही है.

प्रशासन दे रहा हड़ताल खत्म करने की धमकी

जब तक सरकार की तरफ से सकारात्मक वार्ता नहीं की जाती है, हड़ताल जारी रहेगी. आपदा एक्ट के बारे पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि हमें किसी एक्ट की जानकारी नहीं है. हम अपनी मांग पर अड़े हुए हैं. प्रशासन हमें हड़ताल खत्म करने की धमकी दे रहा है. लेकिन बिना सरकार के साथ वार्ता के हम हड़ताल खत्म नहीं कर सकते.

आपदा एक्ट 2005 के तहत हो सकती है कार्रवाई

आपदा के मद्देनजर भारत सरकार की तरफ से आपदा एक्ट 2005 बनायी गयी है. भारत सरकार की ही तरफ से देश भर में कोरोना को देखते हुए आपदा घोषित किया गया है. स्वास्थ्यकर्मी और लॉ एंड ऑर्डर से जुड़ा हर सरकारीकर्मी आपदा के दौरान इस एक्ट के अंतर्गत आता है. ऐसे में आपदा एक्ट 2005 की धारा 51 से लेकर 60 तक जो प्रावधान हैं, उसके मुताबिक पैरामेडिकल कर्मियों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज हो सकता है साथ ही इनकी गिरफ्तारी भी हो सकती है.

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स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से इस बाबत बात करने पर उनके तेवर तल्ख दिखे. उनका कहना है कि आपदा के दौर में पारामेडिकल कर्मियों को हड़ताल नहीं करना चाहिए. अगर वो नहीं माने तो उनके खिलाफ गिरफ्तारी की कार्रवाई हो सकती है.

यूपी सरकार ने 22 जून को ही लगा दिया था एस्मा

लॉकडाउन के बीच सरकारी मशीनरी को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए योगी आदित्यननाथ सरकार ने राज्य में एस्मा (Essential Services Management Act) कानून लागू कर दिया है. एस्मा कानून के लागू किए जाने के बाद अति आवश्यक सेवाओं में लगे कर्मचारी न तो छुट्टी ले सकेंगे और न ही हड़ताल पर जा सकेंगे. साफ है कि सभी अति आवश्यक कर्मचारियों को सरकार के निर्देशों का पालन करना अनिवार्य होगा और जो इस नियम को नहीं मानेगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी.

पारामेडिकल कर्मियों की मांगें

  • अनुबंधित पैरामेडिकल कर्मियों को स्थाई करें.
  • स्थायी होने तक समान काम-समान वेतन लागू करें.
  • आउटसोर्सिंग कर्मियों के बकाए का भुगतान.
  • कोविड-19 में लगे कर्मियों को बिहार हरियाणा और ओड़िशा जैसा अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि मिले
  • अनुबंध कर्मियों की मौत पर वो सारे लाभ मिलें जो स्थाई कर्मचारी को मिलते हैं.

जामताड़ा में भी हड़ताल का असर

हड़ताल का असर जामताड़ा में भी देखने को मिला. स्वास्थ्य कर्मियों की हड़ताल का आज तीसरा दिन है. हड़ताल के कारण स्वास्थ्य सेवा पूरी तरह चरमरा गई हैं. स्वास्थ्य केंद्रों में ताले लटक गई हैं. गांव के केंद्रों में प्रसव भी नहीं हो रहा है. झारखंड राज्य एनआरएचएम एएनएम जीएनएम अनुबंध कर्मचारी संघ के पूर्व जिलाध्यक्ष रेखा कुमारी के नेतृत्व में आज हड़ताल का तीसरा दिन भी सफल रहा.

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कर्मचारियों को संबोधित करते हुए रेखा कुमारी ने कहा की आज जामताड़ा जिले में टीकाकरण पूर्ण रूप से ठप रहा. झारखंड सरकार को झारखंड की जनता की चिंता नहीं है, क्योंकि आज वैश्विक महामारी कोविड-19 का तांडव पूरे शहर में है. इसके बावजूद भी अनुबंध कर्मियों को हड़ताल पर बैठने को विवश कर रहे हैं

धमका रही है सरकार

सरकार अनुबंध कर्मियों को प्रोत्साहित करने के जगह डरा धमका रही हैं. आज स्वास्थ्य सेवा पर हड़ताल का असर साफ दिख रहा है. इसी कारण सरकार हड़ताल को वापस लेने की धमकी देकर महामारी एक्ट के तहत फंसाने को लेकर राज्य स्तर से लेकर जिला स्तर पर संगठन प्रतिनिधियों को धमकाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि सरकार जिस समय पूर्व सरकार को गिराने के लिए अनुबंध कर्मियों को हथकंडा बनाकर अपना काम कर लिया. लेकिन जिसके बदौलत सरकार बनाई, उसको नजरअंदाज किया जा रहा है.

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समायोजन का किया था वादा

सरकार की घोषणा थी कि सरकार बनते ही अनुबंध कर्मियों का सीधा समायोजन किया जाएगा, लेकिन अनुबंध कर्मियों के समायोजन की बात तो दूर आज खतरे में जीवन को डालकर करोना योद्धा बनकर पूरे राज्य में 3.50 करोड़ आबादी की सेवा कर रही है, उसे ना प्रोत्साहित किया गया और न ही उसके उचित मांगों पर सरकार उचित कोई पहल कर रही है.

आज करोना महामारी में आम जनता त्रस्त है. करोना योद्धा बनकर स्वास्थ्य विभाग के लोग ही सरकार की प्रतिष्ठा को बचाए हुए हैं. आज बाध्य होकर सरकार से हमलोग अनिश्चितकालीन हड़ताल में हैं.

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