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Parakram Diwas 2022 : सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती पर राष्ट्रपति-पीएम ने दी श्रद्धांजलि

Ranchi: तुम मुझे खून दो, मैं तुम्‍हें आजादी दूंगा….! जय हिन्द! जैस नारों से आजादी की लड़ाई को नई ऊर्जा देने वाले नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आज 125वीं जयंती है. देश उनकी जयंती को पराक्रम दिवस के रूप में मना रहा है. उनकी जयंती के मौके पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि दी. सुभाष चंद्र बोस भारत के उन महान स्वतंत्रता सेनानियों में शामिल हैं जिनसे आज के दौर का युवा वर्ग प्रेरणा लेता है.

राष्ट्रपति कोविंद ने लिखा,  नेताजी के आदर्श और बलिदान हर भारतीय को हमेशा प्रेरित करते रहेंगे. राष्ट्रपति कोविंद ने ट्वीट किया, नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती पर भारत कृतज्ञतापूर्वक श्रद्धांजलि देता है. स्वतंत्र भारत के विचार के प्रति अपनी उग्र प्रतिबद्धता दिखाने के लिए उन्होंने- आजाद हिंद के गठन जैसे साहसी कदम उठाए. ये उन्हें राष्ट्रीय प्रतीक बनाते हैं. उनके आदर्श और बलिदान हर भारतीय को हमेशा प्रेरित करते रहेंगे.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लिखा, सभी देशवासियों को पराक्रम दिवस की ढेरों शुभकामनाएं. नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती पर उन्हें मेरी आदरपूर्ण श्रद्धांजलि. राष्ट्र के प्रति उनके योगदान पर हर भारतीय को गर्व है.

कटक में हुआ बोस का जन्म

23 जनवरी 1897 को सुभाष चन्द्र बोस का जन्म ओडिशा के कटक में हुआ था. बोस के पिता का नाम जानकीनाथ बोस और मां का नाम प्रभावती था. जानकीनाथ बोस कटक शहर के मशहूर वकील थे. प्रभावती और जानकीनाथ बोस की कुल मिलाकर 14 संतानें थी, जिसमें 6 बेटियां और 8 बेटे थे. सुभाष चंद्र उनकी 9वीं संतान और 5वें बेटे थे.

इंग्लैंड के केंब्रिज विश्वविद्यालय में की पढ़ाई

बोस की प्रारंभिक पढ़ाई कटक के रेवेंशॉव कॉलेजिएट स्कूल में हुई. इसके बाद उनकी शिक्षा कोलकाता के प्रेजीडेंसी कॉलेज और स्कॉटिश चर्च कॉलेज से हुई. इसके बाद भारतीय प्रशासनिक सेवा (इंडियन सिविल सर्विस) की तैयारी के लिए उनके माता-पिता ने बोस को इंग्लैंड के केंब्रिज विश्वविद्यालय भेज दिया.

सिविल सर्विस की नौकरी छोड़ी

1920 में उन्होंने इंग्लैंड में सिविल सर्विस परीक्षा पास की लेकिन भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष में हिस्सा लेने के लिए उन्होंने जॉब छोड़ दी थी. सिविल सर्विस छोड़ने के बाद वह देश के अंग्रेजों के चंगुल से आजाद कराने के लिए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ जुड़ गए.

ऑस्ट्रियन युवती एमिली से की शादी

नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने साल 1937 में अपनी सेक्रेटरी और ऑस्ट्रियन युवती एमिली से शादी की. दोनों की एक बेटी अनीता हुई, और वर्तमान में वो जर्मनी में अपने परिवार के साथ रहती हैं.

कांग्रेस से किया किनारा

साल 1938 में नेताजी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष निर्वाचित किए गए, जिसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय योजना आयोग का गठन किया. 1939 के कांग्रेस अधिवेशन में नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने गांधी जी के समर्थन से खड़े पट्टाभी सीतारमैया को हराकर विजय प्राप्त की. इस पर गांधी और बोस के बीच अनबन बढ़ गई, जिसके बाद नेताजी ने खुद ही कांग्रेस को छोड़ दिया.

18 अगस्त, 1945 को विमान दुर्घटना में मौत

18 अगस्त, 1945 को ताइपेई में हुई एक विमान दुर्घटना के बाद नेताजी लापता हो गए थे. घटना को लेकर तीन जांच आयोग बैठे, जिसमें से दो जांच आयोगों ने दावा किया कि दुर्घटना के बाद नेताजी की मृत्यु हो गई थी. जबकि न्यायमूर्ति एमके मुखर्जी की अध्यक्षता वाले तीसरे जांच आयोग का दावा था कि घटना के बाद नेताजी जीवित थे. इस विवाद ने बोस के परिवार के सदस्यों के बीच भी विभाजन ला दिया था.

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