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पंचायतें करेंगी ग्राम विकास के काम, आदिवासी विकास समिति और ग्राम विकास समिति को नहीं मिलेगी राशि

Ranchi : वित्तीय वर्ष 2020-21 में आदिवासी विकास समिति और ग्राम विकास समितियों की किसी तरह का वित्तीय समर्थन सरकार से नहीं मिलेगा. दो सालों तक सभी जिलों में गठित समितियों को 5-5 लाख रुपये की मदद मिली थी. इस बार बजट में कोई आवंटन नहीं किये जाने से अब इन समितियों के गठन का औचित्य भी ख़त्म हो जाने की उम्मीद है. विवाद के केंद्र में रही विकास समितियों की बजाय ग्राम विकास कार्यों में लगे जनप्रतिनिधि ही अपने गांवों को संवारेंगे. मुखिया संघ ने सरकार के इन प्रयासों का स्वागत किया है.

दो सालों में समितियों ने बनायी थी 6578 योजनाएं, पूरी की 602

समितियों को पहली बार वित्तीय वर्ष 2018-19 में और उसके बाद 2019-20 में विभिन्न योजनाओं को पूरा करने के लिए राशि आवंटित की गयी. डोभा, सिंचाई कुआं, तालाब, वृक्षारोपण, पेवर्स ब्लॉक, छज्जा, मेड बंदी, सोख्ता, भूमि समतलीकरण जैसे कार्य करने के लिए उन्हें अवसर दिया गया. योजना निर्माण के बाद इसमें व्यय होने वाली राशि के लिए 80 फीसदी राशि सरकार से और शेष समिति को अपने श्रमदान या अन्य माध्यम से करने का प्रावधान किया गया था.

2018-19 में कुल 2862 योजनाएं कार्य करने को स्वीकृत की गयीं जबकि 2019-20 में 3716. इनमें से पहले साल में 508 योजनाओं को पूर्ण किया जा सका, दूसरे में 94. यानी 2018 और 2019 में कुल 602 योजनाओं को पूरा कर लिया गया.

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 16641 गांवों में आदिवासी विकास समिति का गठन किया गया है

राज्य में अब तक 16641 गांवों में आदिवासी विकास समिति का गठन किया जा चुका है. 755 गांवों में अब भी यह काम बाकी है. इसी तरह 11519 ग्राम विकास समिति का गठन हो चुका है और 645 में इसे नहीं किया जा सका है. गठित समितियों को निर्धारित कार्यों के लिए वित्तीय वर्ष 2018-19 में कुल 60 करोड़ रुपये आवंटित किये गए. 2019-20 में उनके बीच 1,12,74,80,000 रुपये यानी दो सालों में कुल 1,72,74,80,000 रुपये का आवंटन किया गया है.

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विकास समितियों के लिए बजट में नहीं हुआ है प्रावधान : निदेशक

पंचायती राज निदेशक विनय कुमार राय के अनुसार सरकार ने अबकी बजट में विकास समितियों के लिए कोई आवंटन नहीं किया है. उनके लिए कोई टेक अप नहीं किये जाने की सूचना है. झारखण्ड मुखिया संघ ने राज्य सरकार के इस निर्णय का स्वागत किया है. संघ के प्रमुख विकास महतो के अनुसार पिछली सरकार राज्य में विकेंद्रीकृत शासन प्रणाली को सुनियोजित तरीके से समाप्त करने पर तुली हुई थी.

मुख्यमंत्री के आदेश पर राज्य के मंत्रिमंडल ने यह निर्णय लिया था कि राज्य के सभी 32,000 गांवों में ग्राम विकास समिति तथा आदिवासी विकास समिति का गठन कर ग्रामीण विकास का कार्य किया जायेगा. छोटे-छोटे विकास कार्यों की जिम्मेदारी इन्हीं विकास समितियों के जिम्मे होगी. ये समितियां पांच लाख रुपए तक के काम कराएंगी. ग्रामीण विकास विभाग (पंचायती राज) के इस प्रस्ताव को 13 मार्च 2018 को कैबिनेट ने मंजूरी भी दे दी थी.

पिछली सरकार के आदेश के कारण विकास समितियों और पंचायतों के बीच अनबन की स्थिति बन गयी थी. सरकार के निर्णय के खिलाफ हाईकोर्ट में भी मामला गया था. मंत्री आलमगीर आलम और रामेश्वर उरांव ने विकास समितियों को पैसे नहीं दिये जाने का मौखिक आश्वासन फरवरी माह में दिया था. अब पंचायतें ही अपने ग्राम विकास के लिए पूर्व की भांति सभी योजनाएं बनाकर लागू करवा सकेंगी.

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