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पंचायती राज व्यवस्था झारखंड में फेल : सुनीता सिंह

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Ranchi : लोकतांत्रिक व्यवस्था में सत्ता का विकेंद्रीकरण पंचायती राज व्यवस्था के माध्यम से होता है. एक सशक्त पंचायती राज व्यवस्था ही सरकारी योजनाओं को आम लोगों तक पहुंचाने का भारतीय लोकतंत्र में एकमात्र जरिया है, जो हर गांव को पंचायत से जोड़ता है. लेकिन, झारखंड में पंचायती राज व्यवस्था ‘मुख्यमंत्री केंद्रित’ हो गाया है, जो भारतीय लोकतंत्र के लिए ‘अशुभ संकेत’ है. सत्ता के विकेंद्रीकरण का मतलब सिर्फ चुनाव नहीं, बल्कि हर पंचायत को शक्ति प्रदान करना होता है, जो झारखंड में नहीं हो पा रहा है. उक्त बातें जेवीएम की केंद्रीय प्रवक्ता सुनीता सिंह ने राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहीं. उन्होंने कहा कि राज्य निर्वाचन आयोग को 2104 पंचायत पदों के लिए हो रहे उपचुनाव में 798 पंचायत पद के उम्मीदवार नहीं मिले, जिससे त्रिस्तरीय पंचायती राज के पदों में 769 ग्राम पंचायत सदस्य, 9 पंचायतों में मुखिया का पद और पंचायत समिति सदस्य के 20 पद खाली रह गये हैं. वहीं, पंचायत उपचुनाव में 2104 में 1117 का निर्विरोध चुना जाना भी शक के दायरे में है, जो कि जांच का विषय बना हुआ है.

पंचायती राज व्यवस्था को नकारने की कोशिश कर रही सरकार

सुनीता सिंह ने कहा कि एक ओर जहां पंचायती राज व्यवस्था के प्रति राज्य में लोग जागरूक हो रहे हैं. ग्राम विकास समिति और आदिवासी विकास समिति के माध्यम से ग्रामीण विकास योजना चलाने का ‘फरमान’ मुख्यमंत्री ने जारी किया और यह उस समय जारी किया गया, जब प्रदेश में चयनित पंचायती व्यवस्था पहले से कायम है. इससे लगता है कि राज्य सरकार की ओर से पंचायती राज व्यवस्था को नकारने की कोशिश है.  इसका असर उपचुनाव में भी देखने को मिल रहा है, जहां मुखिया प्रत्याशी तक नहीं मिल पा रहा है. राज निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आंकड़े यह प्रमाणित कर रहे हैं कि झारखंड में ‘पंचायती राज व्यवस्था’ फेल हो गयी है.

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