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पंचायती राज स्वशासन परिषद : गठन के बाद से ना हुई बैठक और ना ही कोई काम

दो सालों में एक भी बैठक पंचायत स्वयंसेवकों, सखी मंडली सदस्यों या अन्य सामुदायिक संस्थाओं के साथ नहीं की गई

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Chhaya

Ranchi : सरकारी सुविधाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए सरकार परिषदों और समितियों का गठन तो करती है. लेकिन इन परिषदों का संचालन नहीं हो पाता और ना ही ये सही से कार्य करते हैं. 20 जुलाई 2017 को ग्रामीण विकास विभाग की ओर से पंचायती राज स्वशासन परिषद का गठन किया गया.

गठन के साथ ही परिषद् को कई कार्यभार दिए गए. इसमें न सिर्फ राज्य के पंचायतों से संबधित कार्य थे. बल्कि पेसा एक्ट, पंचायत स्वयंसेवकों और सखी मंडलियों के साथ समन्वय स्थापित कर कार्य करने का निर्देश दिया गया था. परिषद के गठन को लगभग दो साल होने को है, लेकिन अब तक परिषद् की ओर से न ही सखी मंडली और न ही पंचायत स्वयं सेवकों के साथ बैठक की गई.

जबकि गठन के संबध में जारी अधिसूचना में बताया गया है कि इस संस्था का काम सामुदायिक संस्थाओं, सखी मंडलियों समेत पंचायत स्वयं सेवकों के साथ समन्वय स्थापित कर उनका मार्गदर्शन और समस्याओं का समाधान करना है.

टीएसी की तर्ज पर किया गया था गठन

पंचायती राज स्वशासन परिषद : गठन के बाद से ना हुई बैठक और ना ही कोई काम

अधिसूचना में कहा गया था कि पंचायती राज व्यवस्था का निरंतर विकास करना जरूरी है. इसके लिए हितधारकों, चिंतकों, विद्वानों के साथ विचार विमर्श जरूरी है. जिस वजह से जनजातीय परामर्श दात्री परिषद् ; (टीएससी) की तर्ज पर पंचायत राज स्वशासन परिषद् का गठन किया जा रहा है.

लेकिन जब विभाग के कई अधिकारियों और इसके सदस्य सचिवों से इस बारे में जानकारी ली गई तो उन्होंने कहा कि ठीक से याद नहीं है. सब कुछ याद नहीं रहता. कुछ सचिवों ने कहा कि ग्रामीण विकास विभाग की ओर से बैठक तो दो-तीन बार बुलाई गई, लेकिन उसमें अन्य अधिकारियों को भेजा गया है.

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सामुदायिक संस्थाओं से परिषद् की नहीं होती चर्चाएं

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परिषद् अपने गठन के उद्देश्यों को दो सालों में पूरा नहीं कर पायी. इसमें बताया गया था कि परिषद् पंचायत स्वयंसेवकों को प्रशिक्षण देगी, उनका चयन समेत कार्यों के लिए मार्गदर्शन करेगी.

जबकि पंचायत स्वयंसेवकों से पूछने पर यह जानकारी सामने आयी कि पंचायत सेवकों के साथ एक भी बैठक परिषद् की ओर से नहीं की गई. वहीं सखी मंडलियों के साथ भी परिषद् ने एक भी बैठक नहीं किया.

पंचायत स्वयं सेवकों की ओर से जानकारी दी गई कि सेवकों की ओर से कई बार विभाग को परिषद् के तहत बैठक कराने की मांग की गई. लेकिन एक भी बैठक नहीं हो पाई.

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ग्रामीण विकास मंत्री हैं अध्यक्ष

परिषद् के अध्यक्ष ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री होते हैं. वहीं सदस्यों में मुख्य सचिव, विकास आयुक्त, पेयजल स्वच्छता विभाग के सचिव समेत अन्य विभाग के सचिवों को सदस्य बनाया गया है.

इस संबध में जानकारी लेने के लिए कई बार मंत्री को फोन लगाया गया. लेकिन संपर्क नहीं हो पाया. वहीं विभागीय अधिकारियों ने किसी तरह का जवाब नहीं दिया.

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