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पलामू में 10 वर्ष से बंद पड़ी राजहरा कोलियरी में फिर लौटी बहार

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Dilip Kumar

Palamu : एशिया फेम के उच्च गुणवत्तायुक्त, धुंआरहित कोयला उत्पादन में अपने समय में सिरमौर रही पलामू जिले की राजहरा कोलियरी में एक बार फिर उत्पादन शुरू हो गया है. सेंट्रल कोलफिल्ड लि. के अंतर्गत आने वाली इस कोलियरी का सोमवार को पलामू के सांसद वीडी राम, छतरपुर विधायक सह भाजपा के मुख्य सचेतक राधाकृष्ण किशोर, सीसीएल के सीएमडी गोपाल सिंह, महाप्रबंधक कोटेश्वर राव ने संयुक्त रूप से पुर्न उद्घाटन किया.

49 लाख 30 हजार टन कोयला निकालने का लक्ष्य : सांसद 

मौके पर सांसद ने कहा कि 15 वर्षों में इस कोलियरी से 49 लाख 30 हजार टन कोयला निकालने का लक्ष्य है. हालांकि इसकी क्षमता 80 लाख टन है. उन्होंने बताया कि प्रत्येक वर्ष 3 से 5 लाख टन कोयला निकाला जायेगा. कोलियरी के चालू हो जाने से सीसीएल को डेड रॉयलिटी देने से मुक्ति मिलेगी. इसके अलावे 28 करोड़ का हो रहा घाटा नहीं होगा. रोजगार के अवसर बढ़ेंगे. उन्होंने बताया कि माईंस में पड़ने वाली दो एकड़ भूमि के रैयत के परिवार के एक सदस्य को नौकरी और प्रावधान के अनुसार मुआवजा दिया जायेगा. एक वर्ष में तीन महीने बरसात के कारण कोलियरी में बंद रहेगी.

ओपन कास्ट माइंस है रजहरा

राजहरा कोलियरी सीसीएल का ओपन कास्ट माइंस है. कोलियरी नदी के किनारे मौजूद है, जिस कारण बरसात के दिनों में पानी भरने का डर रहता है. कोलियरी से 12 में से नौ महीने उत्पादन होगा. 49.30 लाख टन कोयला का उत्पादन अगले 15 वर्षों में किया जाना है.

2009 से बंद पड़ी थी कोलियरी

वर्ष 2009-10 से रजहरा कोलियरी बंद पड़ी थी. उद्घाटन के बाद इसके पुनः शुरू हो जाने से पूरे पलामू के लोगों में खुशी की लहर है. एक अनुमान के तहत इस कोलियरी से प्रत्यक्ष एवं प्रत्यक्ष रूप से करीब पांच हजार लोगों को रोजगार मिलेगा. इस कोलियरी के बंद हो जाने से पलामू जिले की अर्थ-व्यवस्था पर भी प्रतिकूल असर पड़ा था.

कोलियरी का कैसा रहा है इतिहास

जानकार बताते हैं कि अंग्रेजी हुकूमत के समय राजहरा कोलियरी की शुरुआत की गयी थी. वर्ष 1842 में बंगाल कोल कंपनी के प्रबंधन में खनन कार्य शुरू किया गया था. बाद में सन 1969 में बंगाल कोल कंपनी ने इसका मालिकाना हक पंजाब के एक औद्योगिक घराने रामशरण दास को छह लाख 67 हजार रुपये में हस्तांतरित कर दिया. नये स्वामी के लिए उत्पादन यानि रेजिंग कांट्रेक्ट पलामू के सूरत पांडेय को ही दिया गया. किन्तु सन 1973 में केंद्र सरकार द्वारा इस कोलियरी का सरकारी करण कर सीसीएल को इसका प्रबंध सौंप दिया गया.

कोलियरी बंदी का कारण बना पानी

विगत 24 अक्टूबर 2010 को कोलियरी की भलही खदान में निकटवर्ती सदाबह नदी का पानी भर गया था. इससे उत्खनन कार्य में लगी शॉवेल मशीन डूब गयी थी. इसके पश्चात इस दुर्घटना की जांच करने के लिए 10 नवंबर 2010 को डीजीएमएस द्वारा सुरक्षा मानकों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए उत्पादन पर पूर्णतः रोक लगा दी. इस रोक के पश्चात क्षेत्र के लोगों और कोलियरी में कार्यरत कामगारों ने धरना-प्रदर्शन तक किए, लेकिन केंद्र सरकार की ओर से कोई सकारात्मक जवाब नहीं लिया.

सांसद के प्रयास रंग लाया

पिछले लोकसभा चुनावों में पलामू संसदीय सीट से भारी मतों से जीते भाजपा के विष्णुदयाल राम ने राजहरा कोलियरी के पुनः प्रारंभ हेतु कवायद शुरू कर दी. उन्होंने लोकसभा में तो आवाज बुलंद की, साथ ही प्रधानमंत्री तक अपनी आवाज उठायी. उनके प्रयास से गत 17 मार्च 2015 को डीजीएमएस ने सेक्शन 22 हटा दिया. लेकिन मामला वन एवं पर्यावरण विभाग में लटक गया. पर्यावरण स्वीकृति हेतु पलामू के तत्कालीन उपायुक्त के. श्रीनिवासन की अध्यक्षता में 23 जनवरी 2016 को जनसुनवायी की गयी. इसका परिणाम सुखद रहा. सभी पक्षों ने कोलियरी यथाशीघ्र प्रारंभ करने पर सहमति जतायी.

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