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पंचायत चुनावः दीपक प्रकाश ने हेमंत सरकार की मंशा पर उठाये सवाल, कहा- कोरोना तो है बहाना

Ranchi : राज्य में पंचायत चुनाव कराने के मुद्दे पर हेमंत सोरेन की मंशा को लेकर भाजपा ने सवाल उठाये हैं. शनिवार को प्रदेश अध्यक्ष और सांसद दीपक प्रकाश ने कहा कि राज्य सरकार टालमटोल का रवैया अपनाए हुए है. गांव के जमीनी मुद्दों से सरकार मुंह चुरा रही है. उसे डर है कि पंचायत चुनाव होंगे तो लोग झारखंड मुक्ति मोर्चा- कांग्रेस-राजद की सरकार को जबर्दस्त झटका देंगे. चुनाव भले दलीय आधार पर नहीं होंगे, पर सरकार जानती है कि लोग इन पार्टियों द्वारा समर्थित उम्मीदवारों के खिलाफ मतदान करेंगे.

चुनाव नहीं करा कर राज्य सरकार ग्रामीण विकास कार्य को बाधित कर रही है. चुनाव नहीं होने से मनरेगा में लोगों को काम नहीं मिल पा रहा है जिस कारण राज्य में तेजी से पलायन बढ़ रहा है.

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कोरोना की आड़ में छिपा रही नाकामी

दीपक प्रकाश ने कहा कि दिसंबर 2020 में ही राज्य में पंचायत के कार्यकाल खत्म हो गया था. पड़ोस के राज्यों ने अपने अपने पंचायत चुनाव करा कर पंचायत को अधिकार देने का काम किया है पर यह सरकार बार-बार कोरोना या अन्य बहाना बना कर चुनाव को टालते जा रही है.

इसके पहले राज्य निर्वाचन आयोग ने वर्ष जनवरी 2021 में जारी मतदाता सूची के आधार पर चुनाव की तैयारी पूरी कर ली थी लेकिन अब जनवरी 2022 के अहर्ता को ध्यान में रख कर चुनाव कराने का निर्णय लिया गया है.

राज्य में 2 वर्षों से लंबित पंचायत चुनाव की तिथि निर्धारित करने पर फरवरी के दूसरे सप्ताह के बाद ही राज्य सरकार विचार करने का निर्णय लिया है. चुनाव नहीं कराने की राज्य सरकार की इच्छाशक्ति की कमी के कारण चुनाव को बार बार बहाना बना कर टाला जा रहा है.

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जल-जंगल-जमीन का नारा देने वाले जंगल को कर रहे खत्म

हेमन्त सोरेन की सरकार ने सत्ता में आने के लिए जल-जंगल-जमीन बचाने का नारा का सहारा लिया. पर सत्ता में बैठते ही सत्ता के संरक्षण में माफियों द्वारा तेजी ने जंगलों का दोहन शुरू हो गया है. फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया के रिपोर्ट के मुताबिक झारखंड में 2019 मे घना वन क्षेत्र 2603.02 वर्ग किलोमीटर था और 2021 के सर्वे में 2601.05 वर्ग किलोमीटर हो गया.

इसका अर्थ यह कि 2 वर्ग किलोमीटर की कमी आयी है. राज्य में संथाल परगना के पाकुड़, लोहरदगा, लातेहार और कोडरमा जिला में घने वन क्षेत्र में कमी आयी है.

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23 लाख कार्डधारियों को नहीं मिला काम

मनरेगा में झारखंड में 23,30,103 परिवारों को मनरेगा के तहत 1 दिन का भी काम नहीं मिल सका है. राज्य के 45,80,269 जॉब कार्डधारी परिवारों में से 22,50,166 परिवार ही ऐसे हैं जिन्हें 1 या उससे अधिक दिन काम मिला है. राज्य में केवल 54041 परिवार को ही 100 दिनों का काम मिल सका है.

एक तरफ जहां राज सरकार ज्यादा से ज्यादा लोगों को काम देने का निर्देश दे रही है वहीं दूसरी ओर गरीबों को काम से वंचित रखा जा रहा है.

90% से अधिक लोगों ने राज्य सरकार से काम मांगा पर राज्य सरकार की निष्क्रियता के कारण लोगों को काम नहीं मिल सका जिस कारण लाखों लोगों का पलायन फिर से आरंभ हो गया. वित्तीय वर्ष 2021-22 समाप्त होने में 75 दिन बचे हैं. ऐसे में अब सभी को काम मिलना असंभव है.

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Nayika

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