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पलामू का हाल-ए-चुनाव : न प्रचार का शोर, न दिख रहे बैनर व पोस्टर, सड़कों पर पसरा है सन्नाटा

Dilip Kumar

Palamu : लोकसभा चुनाव 2019 का परिदृश्य बहुत आश्चर्यजनक है. कहीं भी भोंपू बजता दिखाई नहीं दे रहे हैं. पूर्व में जितने भी चुनाव हुए, उनमें ऐसी खामोशी नहीं देखी गई थी. लेकिन इस चुनाव में निर्वाचन आयोग के डंडे ने प्रचार के शोर को ऐसा ठंडा किया कि पता ही नहीं चलता कि राष्ट्र का महापर्व चुनाव हो रहा है. सात चरणों में होने वाले इस संसदीय चुनाव के दो चरण पूरे हो चुके हैं और तीसरे चरण का मतदान हो रहा है.

चौथे चरण में पलामू, चतरा और लोहरदगा में वोटिंग 

झारखंड की पारी चौथे चरण से शुरू होगी. झारखंड के पलामू, चतरा और लोहरदगा सीट के लिए मदतान 29 अप्रैल को होगा. लेकिन किसी भी संसदीय क्षेत्र में प्रचार का शोर नहीं मिल रहा है.

ध्वनिविस्तारक यंत्रों से कान फाड़ने वाले प्रचार इस बार 20 प्रतिशत से भी कम पर पहुंच गया है. इस संवाददाता ने पलामू संसदीय क्षेत्र के दौरे में जो कुछ देखा, वह चौंकाने वाला है.

रविवार और सोमवार को इसपर संवाददाता ने पलामू के छत्तरपुर, पंडवा, नावाबाजार और हरिहरगंज इलाके का जायजा लिया. कुछ जगहों पर एक्का-दुक्का झंडे नजर आए, लेकिन न ही कहीं भोंपू से प्रचार सुनायी दिया.

सड़कों पर सन्नाटा था. वाहन बहुत कम संख्या में दिखाई दिए और यात्री बसें या मालवाहक नगण्य थे. लेकिन पूरे इलाके में चुनाव का महौल दिखाई नहीं दिया.

इधर  एनएच 39 पर सतबरवा में एक जगह देखा कि राजद की सभा चल रही है. लेकिन अधिकतर कुर्सियां खाली थीं. प्रत्याशी का इंतजार किया जा रहा था. सतबरवा से आगे एक जगह पलामू के लिए भाजपा प्रत्याशी वीडी राम का होर्डिंग दिखाई दिया.

इतना ही नहीं डालटनगंज के निगम क्षेत्र में भी चुनाव के प्रति कोई उत्साह नहीं दिखाई दे रहा है. वैसे सतबरवा में एक दुकानदार पप्पु प्रसाद से पूछा गया कि क्या रूझान है? उसने बिना किसी हिचकिचाहट के कहा कि हमलोग मोदी भक्त हैं. उम्मीदवार से क्या लेना देना.

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उसी दुकान पर खड़े शिक्षक रामदयाल ने कहा कि मोदी है तो मुमकिन है- अब कुछ नामुमकिन नहीं है. इसी प्रकार पोल-पोल में भी यही फिजां दिखाई दी. सब्जी विक्रेता से ककड़ी खरीदने के बहाने जो बातें हुई, उससे यह बात सामने आयी कि इस इलाके में राजद की लालटेन का भी कहीं-कहीं दबदबा है. चियांकी में एक-एक होर्डिंग भाजपा और राजद का नजर आया. चियांकी से रेड़मा के रास्ते एक जगह बसपा प्रत्याशी अंजना भुईयां का बैनर भी दिख गया. बस इस तरह चल रहा है प्रचार अभियान.

जनसंपर्क पर जोर

गांव-गांव, घर-घर, टोला-मोहल्ला उम्मीदवार व्यक्तिगत तौर पर जा रहे हैं. लोगों से मिल रहे हैं. इसके अलावा कई स्थानों पर जनसभाएं या नुक्कड़ सभाएं हो चुकी हैं. भाजपा के कई शीर्ष नेता भी पलामू आ रहे हैं. आज हुसैनाबाद में गृहमंत्री राजनाथ सिंह की सभा है.

कई पार्टी नेताओं से बात की गयी तो उन्होंने कहा कि भोंपू बजाकर बहुत कुछ हासिल नहीं होता, जनसंपर्क से समर्थन बढ़ता है. योजनाबद्ध ढंग से कार्य किया जा रहे हैं. भाजपा नेता दुर्गा जौहरी ने कहा कि हमारा बूथ मैनेजमेंट बहुत मजबूत है. देखा जाए तो राजद प्रत्याशी घुरन राम और बसपा प्रत्याशी अंजना भुईयां का भी जनसंपर्क पर ज्यादा ध्यान है.

बसपा उम्मीदवार के लिए उसके पति दुलाल भुईयां पूरे दमखम से चुनाव प्रचार में व्यक्तिगत दिलचस्पी दिखा रहे हैं, उसका असर कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में नजर आ रहा है. जबकि झारखंड के एक दिग्गज नेता इंदर सिंह नामधारी राजद के घुरन के पक्ष में खड़े हैं.

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मोदी-शाह के सहारे

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के सहारे भाजपा इस बार के चुनाव को जीतना चाह रही है. भाजपा के प्रति पूरे देश में उत्साह है, समर्थन है, लेकिन 2014 जैसे परिणाम पर प्रशन चिन्ह भी लगा हुआ है.

भाजपा का जोर है, भाजपा का शोर है, लेकिन यह जोर और शोर वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव का स्मरण करा देता है. तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में चुनाव लड़ा गया.

पूरे मुल्क में भाजपा के स्लोगन का शोर था. हर जगह सुनाई दे रहा था. ‘इंडिया शाईनिंग या शाईनिंग इंडिया’. लेकिन लोगों के अनुमान पर पानी फिर गया. भाजपा पर भारी पड़ गई कांग्रेस और यूपीएस की सरकार बनी, डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में.

यह सरकार 2009 में भी बरकरार रही और भाजपा का स्लोगन ‘फीलगुड’ भी फ्लॉप हो गया. इसलिए भाजपा नेता या कार्यकर्ता किसी गलतफहमी को न पालें और चुनाव प्रचार को धार-धार बनाने का प्रयास करें. प्रचार की धीमी गति देखकर तो यह प्रतीत हो रहा है कि कोई भी पार्टी प्रचार के मामले में गंभीर नहीं है.

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