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पलामू : पलामू टाइगर रिजर्व में बाघ होने का पुख्ता सबूत न मिलना चिंताजनक, रेंज अफसरों की टीम ईमानदारी से जुटाए प्रमाण: निदेशक

Palamu : पलामू व्याघ्र परियोजना क्षेत्र के बेतला स्थित एनआईसी सेंटर में विश्व बाघ दिवस के मौके पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया. इसमें मुख्य अतिथि के रुप में पीटीआर डायरेक्टर आशुतोष कुमार ने संबोधित करते हुए कहा कि पलामू टाइगर रिजर्व क्षेत्र में बाघ होने का पुख्ता सबूत करीब दो वर्षों से नहीं मिलना, जो काफी दुख की बात है.

उन्होंने सभी रेंज अफसरों को अपनी पूरी टीम के साथ ईमानदारी पूर्वक अपने अपने क्षेत्रों में बाघों के पदचिन्ह पर विशेष नजर बनाए रखने के निर्देश दिए. उन्होंने बताया कि पीटीआर क्षेत्र में बाघों के पुख्ता सबूत नहीं मिलने के कारण केंद्र सरकार से पीटीआर को प्रतिवर्ष मिलने वाली राशि बंद कर दी जाएगी.

इसलिए पीटीआर क्षेत्र के सभी वन क्षेत्र पदाधिकारी अपनी पूरी टीम के साथ मिलकर जितना जल्द हो सके कैमरा टेªक के माध्यम से या अन्य सोर्स के माध्यम से पुख्ता सबूत देने का कोशिश करें.

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मौके पर कोस्ट गार्ड व वन रक्षियों ने अपने अनुभव एवं बाघों की गतिविधियों के पुख्ता सबूत इकट्ठा किया जाए, इसके बारे में सुझाव दिए.

मौके पर डीएफओ कुमार आशीष एवं मुकेश कुमार, बेतला रेंजर प्रेम प्रसाद, छिपादोहर रेंजर उमाशंकर सिंह, बारेसांड़ रेंजर तरुण कुमार सिंह ने भी लोगों को संबोधित किया एवं अपने अनुभव साझा किए. साथ ही दिशा-निर्देश भी दिए.

मौके पर वनपाल उमेश दुबे, संतोष कुमार, रजनीश कुमार सिंह, शशांक शेखर पांडे, अखिलेश कुमार, दीपक कुमार, अभिषेक कुमार, विकास कुमार, धीरज कुमार, निरंजन कुमार, संदीप कुमार, देवेंद्र कुमार देव सहित कई टेकर गार्ड वनकर्मी मौजूद थे.

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फरवरी 2020 के बाद से पीटीआर में नहीं दिखा है बाघ

पलामू टाइगर रिजर्व के इलाके में मार्च 2020 के बाद बाघ नहीं दिखा है. फरवरी 2020 में बाघिन मृत मिली थी. उसके बाद पीटीआर में एक भी बाघ नहीं दिखा है. 1974 में पूरे देश में बाघों को संरक्षित करने के लिए एक साथ नौ इलाकों में टाइगर प्रोजेक्ट की योजना शुरू की गयी थी.

पलामू टाइगर रिजर्व उन नौ इलाकों में से एक है, जहां बाघों को संरक्षित करने का काम शुरू हुआ था. 1974 में पलामू टाइगर प्रोजेक्ट के इलाके में 50 बाघ बताए गए थे. देश मे पहली बार 1932 बाघों की गिनती पलामू से ही शुरू हुई थी.

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1974 में पलामू टाइगर प्रोजेक्ट शुरू हुआ था तो बताया गया था कि 50 बाघ हैं. 2005 में जब बाघों की गिनती हुई तो बाघों की संख्या घटकर 38 हो गई. 2007 में जब फिर से गिनती हुई तो बताया कि पलामू टाइगर प्रोजेक्ट में 17 बाघ हैं. 2009 में वैज्ञानिक तरीके से बाघों की गिनती शुरू हुई तो बताया गया कि सिर्फ आठ बाघ बचे हैं.

उसके बाद से कोई भी नया बाघ रिजर्व एरिया में नही मिला. 2018 में हुई जनगणना में पीटीआर के इलाके में बाघों की संख्या शून्य बताई गयी.

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