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#Palamu: अधिवक्ताओं के न्यायिक कार्य बहिष्कार का व्यापक असर, 5 हजार मामलों की नहीं हो सकी सुनवाई

Palamu: पलामू व्यवहार न्यायालय में सोमवार को दूसरे दिन भी करीब पांच सौ अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य का बहिष्कार किया. इससे करीब पांच हजार मामलों की सुनवाई नहीं हो सकी. न्यायालय में सन्नाटा पसरा रहा और दूर दराज से आये लोग परेशान दिखे.

बताते चलें कि 15 फरवरी को पलामू के प्रभारी प्रधान जिला व सत्र न्यायाधीश पंकज कुमार द्वारा अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष सचिदानंद तिवारी के साथ दुर्व्यवहार किया गया था. घटना के समय से पलामू बार एसोसिएशन से जुड़े सभी अधिवक्ताओं ने स्वयं को न्यायिक कार्य से अलग रखा है. शनिवार को घटना के विरोध में जम कर हंगामा किया था.

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प्रभारी पीडीजे की बर्खास्तगी की मांग पर अड़े हैं अधिवक्ता

पलामू बार एसोसिएशन के महासचिव सुबोध कुमार सिन्हा ने कहा कि सारे अधिवक्ता प्रभारी पीडीजे की बर्खास्तगी की मांग पर अड़े हैं. जब तक उन्हें बर्खास्त नहीं किया जाता, अधिवक्ता न्यायिक कार्य को खुद से अलग रखेंगे. यह भी कहा कि एसोसिएशन के अध्यक्ष के साथ दुर्व्यवहार किया जाना निंदनीय है. ऐसी घटना से न्यायिक अधिकारी और अधिवक्ताओं के बीच समन्वय स्थापित करना मुश्किल होगा.

दुर्व्यवहार और विरोध की पहली घटना नहीं

अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष सचिदानंद तिवारी उर्फ नेहरू, महासचिव सुबोध कुमार सिन्हा के अलावा अन्य अधिवक्ताओं ने कहा कि किसी भी न्यायिक अधिकारी की गैर जिम्मेदाराना हरकत को बर्दाश्त नहीं किया जायेगा.

पंकज कुमार पूर्व में भी अधिवक्ताओं के साथ दुर्व्यवहार करते रहे हैं. उनका आचरण पूर्व से ही अमर्यादित रहा है. डालटनगंज रेलवे दंडाधिकारी रहते हुए उन्होंने 30 अप्रैल 2004 को अधिवक्ताओं के साथ बुरा व्यवहार किया था. इस कारण 1 मई 2004 से 4 मई 2004 तक इनके विधिक कार्य से अधिवक्ता अलग रहे थे. इसी तरह 29 नवम्बर 2017 को भी इनके न्यायालय (षष्टम जिला एवं सत्र न्यायाधीश) के कार्यों से अधिवक्ता अलग रहे थे.

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निंदा प्रस्ताव पारित

न्यायिक कार्य का बहिष्कार करते हुए अधिवक्ताओं ने प्रभारी प्रधान जिला व सत्र न्यायाधीश पंकज कुमार के विरुद्ध निंदा प्रस्ताव पारित किया. साथ ही माननीय उच्च न्यायालय से उन्हें अविलंब बर्खास्त करने की मांग की. प्रस्ताव लानेवालों में संघ के अध्यक्ष सचिदानंद तिवारी, उपाध्यक्ष मांधारी दुबे, महासचिव सुबोध कुमार सिन्हा, जय किशोर पाठक, संयुक्त सचिव दीपक कुमार, विनोद तिवारी, शशि भूषण दुबे संतोष कुमार पांडेय, शंकर कुमार, चितरंजन कुमार पांडे, अनिल पांडे, रामदेव यादव, आजाद सिंह, अजय कुमार सिंह, सुरेंद्र पांडे, शशि शेखर दुबे, संतोष तिवारी, अजय महतो, वीण मिश्रा, संतोष कुमार दुबे समेत दर्जनों अधिवक्ता शामिल थे.

रांची बार एसोसिएशन ने की भर्त्सना

मामले की जानकारी होने पर रांची बार एसोसिएशन ने भी इस घटना की भर्त्सना की है. एसोसिएशन के महासचिव कुंदन प्रकाशन ने कहा कि सोमवार को इस घटना के विरोध में रांची बार एसोसिएशन से जुड़े अधिवक्ताओं ने स्वयं को सभी तरह के न्यायिक कार्य से अलग रखा.

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