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पलामू: खासमहल लीज लैंड कब होगा फ्री-होल्ड, चुनावी घोषणा अबतक साबित हुई झुनझुना

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Dilip Kumar

Palamu: 17वीं लोकसभा चुनाव से पहले झारखंड सरकार ने कुछ घोषणाएं की थी. लेकिन चुनाव बाद कई घोषणाएं हवा-हवाई साबित हुई. इनमें से एक है खासमहल लीज लैंड को फ्री-होल्ड करना.

झारखंड कैबिनेट के निर्णय के पश्चात फ्री-होल्ड के लिए एक कमिटी भी गठित की गई. लेकिन राजस्व विशेषज्ञों की समिति में शामिल अधिकारियों ने दस मार्च से 23 मई तक कोई महत्वपूर्ण कार्य का निष्पादन नहीं किया.

क्योंकि आचार संहिता लागू होने के कारण कई कार्यों को लंबित रखना बाध्यता थी. हालांकि, अब आदर्श चुनाव आचार संहिता के समाप्त हुए एक माह हो चुका हैं.

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तनाव झेल रहे हैं लीजधारक

प्राप्त जानकारी के अनुसार, अभी तक फ्री-होल्ड पर कोई निर्णय दिखाई नहीं दिया. राजस्व विभाग की इस लेट लतीफी के कारण राज्य में खासमहल जमीन के लीजधारक अनावश्यक तनाव झेलने को विवश हैं.

लीज भूमि पर किसी तरह के निर्माण पर रोक

लीज नवीकरण न होने के कारण लीजधारक अपनी जमीन पर किसी प्रकार का निर्णय या भवन का विस्तारीकरण नहीं करा पा रहे हैं. नगर निगम ने लीज भूमि पर किसी भी निर्माण पर रोक लगा दी है.

लीज नवीकरण न होने के कारण नगर निगम द्वारा भवन आदि के नक्शे भी पास नहीं किए जा रहे हैं.  हालांकि इस प्रकार का नियम उन ‘बेचारों’ के लिए है, जो कानून को मानते हैं. लेकिन कई लोग, निगम अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत से खुलेआम निर्माण कार्य करा रहे हैं.

विधानसभा चुनाव को लेकर सता रहा डर

लीजधारियों के समक्ष अब खतरा यह है कि कहीं विधानसभा चुनावों की घोषणा न हो जाये. और फिर वही पुराना राग ‘क्या करें भाई-आदर्श चनुाव आचार संहिता लागू है.’

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ऐसा इसलिए भी सोचा जा रहा है, क्योंकि मुख्यमंत्री रघुवर दास द्वारा हर विभाग के कार्यों की समीक्षा बैठके ताबड़तोड़ की जा रही हैं. मुख्यमंत्री की इस स्पीडी कार्य संस्कृति को देखकर यह संभावना और पुख्ता हो जाती है कि चुनाव नजदीक है.

अगर मुख्यमंत्री ने खासमहल लीज भूमि के फ्री होल्ड किए जाने की घोषणा को शीघ्र अमलीजामा नहीं पहनाया तो एक बार फिर लोगों को भारी मायूसी का सामना करना पड़ सकता है.

लघु या गृह उद्योग के लिए भी वित्तीय संस्थान कर्ज देने को तैयार नहीं

लीजधारियों के समक्ष यह परेशानी भी है कि उनको गृह ऋण देने से बैंक इनकार कर रहे हैं. किसी लघु या गृह उद्योग के लिए भी वित्तीय संस्थान कर्ज देने को तैयार नहीं हैं. आखिर लीजधारी जाये तो जाये कहां?

इस स्थिति में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इस नारे का क्या होगा-‘सबका साथ-सबका विकास और सबका विश्वास.’ लोगों का विश्वास हासिल करने के लिए जारी की गई घोषणाएं शीध्र लागू होनी चाहिए.

मेदिनीनगरी में 1622 लीजधारक, 224.53 एकड़ रकबा लीज के

पलामू जिले की बात करें तो जिला मुख्यालय मेदिनीनगर (डालटनगंज) में 1622 लीजधारक हैं. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, लीजभूमि का रकबा मात्र 224.53 एकड़ है. मेदिनीनगर में खासमहल भूमि का कुल रकबा 622.45 एकड़ है. बाकी बची भूमि का सरकार उपयोग कर रही है.

यानि कुल 622.45 एकड़ में से 224.53 एकड़ भूमि ही लीज पर है. यह बात भी सामने आ रही है कि कई दबंग लोगों ने खासमहल भूमि पर अवैध ढंग से कब्जा जमा लिया है. सरकार इसकी जांच के लिए गंभीर नहीं दिखती.

मालिकाना हक के लिए उम्मीद लगाये बैठे लोग

लोगों को बेसब्री से इंतजार है कि झारखंड सरकार लीजधारियों को राहत देते हुए शीघ्र उनको मालिकाना हक देने की प्रक्रिया को पूरा करेगी. किन्तु इस संबंध में फिलहाल कोई सुगबुगाहट नहीं सुनायी दे रही है. कहीं ऐसा न हो कि लीजधारी एक बार फिर मुंह ताकते रह जाये.

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