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पलामू: पानी के लिए सब परेशान, ठोस प्रबंध पर ध्यान नहीं, सेकेंड फेज की जलापूर्ति योजना अधर में, लगातार मिट रहे जलस्रोत

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Dilip Kumar

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Palamu: पलामू जिले में इन दिनों पेयजल की भारी किल्लत मची है. सुबह से शाम तक लोग पानी जुटाने में परेशान रह रहे हैं. निगम के साथ जिला प्रशासन मामले को लेकर गंभीर नजर आ रहा है. लेकिन सभी लोग इस चिंता में हैं कि फिलहाल लोगों को पानी मिल जाये. कोई भी इस बात के लिए गंभीर नहीं है कि इस समस्या का परमानेंट हल कैसे निकाला जाये.

पेयजलापूर्ति के ठोस प्रबंधन को लेकर कोई भी गंभीर नजर नहीं आ रहा है. यही कारण है कि मेदिनीनगर शहर को पानी मुहैया कराने के लिए सेकेंड फेज की जलापूर्ति योजना लंबे समय से ठंडे बस्ते में पड़ी है. जलस्रोतों पर लगातार कब्जा होता जा रहा है. जलस्रोतों को संरक्षित कर उसका वजूद बनाये रखा जाये इस पर किसी का ध्यान नहीं है.

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खत्म हो रहे जलस्रोत

अलग झारखंड राज्य बने 19 वर्ष हो गये हैं. लेकिन इतने लंबे वर्षों में सरकार, प्रशासन और जनप्रतिनिधि मेदिनीनगर शहरी क्षेत्र में न तो ठोस जलापूर्ति का प्रबंध कर पाये हैं और न ही तालाब, कुंआ, नदी को अतिक्रमण से मुक्त रखने में कामयाब हो पाये हैं.

शहर के कई तालाबों का जहां अतिक्रमण के कारण वजूद मिट गया है, वहीं कुंओं का तो नामो निशान नजर नहीं आता. कोयल सहित अन्य छोटी नदियों के किनारे लगातार निर्माण हो रहे हैं. कुंआ, तालाब और नदियों में पानी रहने से चापाकलों का जलस्तर बना रहता है. निगम और जिला प्रशासन चापाकलों की कथित मरम्मत और टैंकर से जलापूर्ति कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ले रहा है.

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सूख गयी हैं पलामू की नदियां

पलामू में मंझौली नदियों के रूप में कोयल, कनहर और अमानत की खास पहचान है. इनका अस्तित्व मिटता जा रहा है. इन मंझौली नदियों की सहायक नदियों में भी पानी नदारद है. बांकी, झांझी, धुरिया सदाबह आदि नदियां बिल्कुल सूख गयी हैं. उनमें पानी की एक छोटी सी धारा भी दिखायी नहीं दे रही है.

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धड़ल्ले से हो रहा पानी का कारोबार

पलामू की जीवन दायिनी कोयल नदी का भी बुरा हाल है. भूगर्भीय जल की कमी पूरा पलामू झेल रहा है. दूसरी ओर पलामू जिला मुख्यालय मेदिनीनगर एवं आस-पास के कस्बों में डीप बोरिंग कर पानी की फैक्ट्रियां धड़ल्ले से चल रही हैं. पानी बेचने का धंधा आजकल खूब फलफूल रहा है. जार और बोतल बंद पानी की बिक्री देख कोई भी हैरान हो सकता है. इस शहर में जार भर कर ठंडा पानी बेचने के लिए करीब 50 फैक्ट्रियां चल रही हैं. इनमें से अधिकांश के पास कोई अनुमति पत्र या लाइसेंस तक नहीं है.

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कहां लापता हो गये तालाब?

पलामू जिला मुख्यालय मेदिनीनगर में मात्र निगम क्षेत्र में ही पांच बड़े तालाब थे. इनमें से नावाटोली का तालाब, थाना रोड के निकट बड़ा तालाब, आबादगंज मिशन स्कूल रोड पर स्थित तालाब एवं रेड़मा के पुरानी रांची रोड के निकट तालाब प्रमुख हैं. इनमें से आबादगंज तालाब कहां गायब हो गया, इसकी जानकारी न निगम के अधिकारी दे रहे हैं और न ही जिला प्रशासन के उच्च पदाधिकारी.

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तालाबों को भर कर खड़ी की गयीं अट्टालिकाएं

प्राप्त जानकारी के अनुसार उक्त तालाब को भर कर अट्टालिकाएं खड़ी कर दी गयी हैं. इस तालाब पर दबंग और अतिप्रभावशाली लोगों का कब्जा हो चुका है. इसी तरह नावाटोली का तालाब, जिसे सेंडर्स बांध कहा जाता है, उस पर भी शहर के प्रभावशाली लोगों ने अतिक्रमण कर अपने भवनों का विस्तार कर लिया है. बड़ा तालाब पर भी धीरे-धीरे कब्जा जारी है. बड़ा तालाब के किनारे दुकानें बन गयी हैं.

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कई तालाबों के नामोनिशान तक नहीं

इस शहर के मानचित्र में नावाहाता-धोबी मुहल्ला के पास भी तालाब था, लेकिन आज उसका नामो निशान नहीं है. रेड़मा तालाब पर भी लोगों की बुरी नजर है. इतना ही नहीं अंग्रेजों के जमाने मे शहर में जनहित के उद्देश्य से करीब एक दर्जन कुएं बनाये गये थे. उनका भी कुछ पता नहीं. सूत्र बताते हैं कि कोयल नदी के तट पर भी लोगों ने अपने आवास बना लिये हैं और धीरे-धीरे नदी पर कब्जा जमाने के प्रयास में जुट गये हैं.

इस प्रकार की परिस्थिति में भूगर्भीय जल पर संकट मंडरा रहा है. इन जलस्रोतों से भूमि में व्याप्त नमी के कारण चापानल और व्यक्तिगत कूपों में पानी का बहाव बनता था. किन्तु नदी-नालों, तालाब पर अवैध ढंग से कब्जा जमाने वालों की हरकत से भूमिगत नमी समाप्त हो गयी है और कुएं सूख गये हैं. चापानल निष्क्रिय हो गये हैं.

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