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Palamu : अनलॉक-3 लागू, नहीं चलेंगी बसें, पलामू में अबतक बस मालिकों को हो चुका 2 करोड़ का नुकसान

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Palamu : कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए केन्द्र सरकार के आदेश पर लागू लॉकडाउन ने बस संचालकों की कमर तोड़ दी है. पलामू की अधिकांश यात्री बसें जंग खाने लगी हैं. बसों के आस-पास लंबी-लंबी घास उग आयी है. पिछले चार माह में करीब दो करोड़ रुपये का नुकसान हो गया है. बस के कारोबार पर निर्भर करीब एक हजार से अधिक लोग बेरोजगार हैं और उनके समक्ष भुखमरी की स्थिति बनी हुई है.

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पलामू से खुलती हैं 250 बसें

पलामू ट्रांस्पोर्ट ऐसोसिएशन के प्रवक्ता किरण कुमार सिंह ने जानकारी दी कि पलामू में 250 यात्री बसों का परिचालन होता था. इस कारण बस संचालकों सहित उनके कर्मचारियों के समक्ष रोजी-रोटी का संकट उत्पन्न हो गया है. मेदिनीनगर से रांची और औरंगाबाद, बिहार रूट के लिए 40 से 45 बसें हर दिन खुलती हैं. इसी तरह छत्तीसगढ़, यूपी, बिहार के गया, पटना, सासाराम के लिए अलग-अलग बसों का परिचालन होता है.

कई इलाकों में बस ही आवागमन का मुख्य सहारा

प्रवक्ता ने बताया कि पलामू, गढ़वा, लातेहार से होकर दूसरे जिले और राज्यों के लिए कई इलाकों में बसें ही यात्रा का एकमात्र साधन थीं. ऐसे इलाकों में मेदिनीनगर के महुआडांड़ (वाया-बेतला-गारू), मेदिनीनगर के गढ़वा के बड़गड़ (वाया चैनपुर रमकंडा),  मेदिनीनगर से मनातू के चक (वाया पाटन-नावाजयपुर), मेदिनीनगर से लातेहार के बालूमाथ (वाया पांकी-हेरहंज), मेदिनीनगर से पांडू (वाया पंडवामोड़-विश्रामपुर), मेदिनीनगर से गढ़वा के चिनिया (वाया करसो, केल्हार और रंका), मेदिनीनगर से बिहार के इमामदगंज, बिहार (छतरपुर-डुमरिया) शामिल हैं.

उम्मीद पर पानी फिर गया

बस मालिकों को आशा थी कि अनलॉक-3 में उनको राज्य सरकार से जरूर राहत मिलेगी और बसों का परिचालन प्रारंभ होगा, लेकिन बसों के परिचालन पर 31 अगस्त तक रोक लगा दी गयी है. होटलों के खुलने पर भी रोक है. किन्तु आरोप है कि मेदिनीनगर के कुछ होटलों में लगातार बैठकें या छोटे-मोटे कार्यक्रम किये जा रहे हैं. प्रशासन वहां आंखें मूंद लेता है, लेकिन बसों का सड़क पर निकालना ही जुर्म है.

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चोरों व चूहों की मौज

लॉकडाउन के कारण बसें खड़ी रहने का फायदा सबसे ज्यादा चोरों ने उठाया. बसों के कई सामान चोरी हो गये. वहीं चूहों ने भी टायर कुतर डाले, सीटों का बखिया उधेड़ दी है. इस तरह बस संचालकों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है. राज्य सरकार को बसों के परिचालन की शीघ्र अनुमति देनी चाहिए.

पूरे झारखंड में करीब 28 करोड़ के कारोबार का नुकसान

झारखंड प्रदेश बस ऑनर एसोसिएशन के अध्यक्ष सच्चिदानंद सिंह का कहना है कि लॉकडाउन से लेकर अब तक 27 करोड़ 86 लाख रुपये का नुकसान हो चुका है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस पूरी अवधि का टैक्स माफ करे. जब बसों के चलने पर रोक है तो टैक्स की वसूली क्यों? टैक्स लेना उचित नहीं है.

श्री सिंह ने बताया कि राज्य में करीब सात हजार बसें हैं. बंदी के कारण 70 हजार परिवारों की आर्थिक हालत खराब हो चुकी है. सरकार द्वारा स्टाफ को सहायता राशि मिलनी चाहिए. उन्होंने कहा कि ट्रेनें बंद हैं. बसों के चलाने पर पाबंदी है. इसका बुरा प्रभाव बाजार की अर्थव्यवस्था पर पड़ा है. बाहरी ग्राहकों के नहीं आने से व्यवसायी वर्ग भारी परेशानी झेल रहा है.

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