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Palamu : मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 24 घंटे तक नहीं हुआ मध्य प्रदेश से भटक कर आये युवक का इलाज

Palamu : मध्य प्रदेश से भटक कर आये युवक का इलाज मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 24 घंटे तक नहीं हुआ. वह दर्द से कराहता रहा, ठंड से ठिठुरता रहा. किसी ने सुधि नहीं ली.

पैर टूट जाने और हाथ-सिर में दर्द की शिकायत लेकर पहुंचे उस युवक का सिर्फ इसलिए 24 घंटे तक इलाज नहीं हो पाया, क्योंकि उसके साथ कोई नहीं था. उसे देखनेवाला कोई नहीं था. उसके साथ उसके परिजन नहीं थे. बाद में कुछ लोगों के दबाव के बाद उसका इलाज शुरू हुआ. मरीज अब धीरे-धीरे स्वास्थ्य लाभ ले रहा है.

ऑटो चालक ने भर्ती कराया था

शुक्रवार की सुबह मेदिनी राय मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एक मरीज को ऑटो चालक ने भर्ती कराया. उसका एक पैर टूटा हुआ था. सिर और हाथ में चोटें आयी थीं. उस वक्त मौजूद डॉ दशरथ ने उसे देखा और एक्स-रे व दवाइयां उसकी पर्ची पर लिख दीं. उस मरीज को ओटी में ड्रेसर ने बैंडेज करके इमरजेंसी वार्ड के बेड पर रख दिया.

उसके बाद उस मरीज को न तो कोई डॉक्टर देखने गया और न ही कोई कर्मी. 24 घंटे बीतने के बाद तक मरीज का न एक्स-रे हुआ और न ही उसके टूटे हुए पैर में प्लास्टर किया गया था. पूरे समय वह दर्द से कराहते और ठंड से ठिठुरते नजर आया.

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रात भर ऐसे ही छोड़ दिया

वहां के कर्मियों से जब लोगों ने उसके इलाज की बात कही तो कर्मियों ने कहा कि उसके घरवाले अभी तक नहीं आये हैं. आने के बाद इलाज शुरू होगा. इससे यह साफ जाहिर हो रहा था कि किसी को भी उस मरीज की फिक्र नहीं थी.

बाद में उस मरीज को इमरजेंसी वार्ड से फीमेल वार्ड में भेज कर कर्मियों ने अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली. उसे न ओढ़ने के लिए चादर दी गयी और न ही खाना. वह पूरी रात ठंड में यूं ही पड़ा रहा. फीमेल वार्ड के कर्मियों ने भी उस मरीज पर खास ध्यान नहीं दिया और मरीज की स्थिति को देख कर उसे वैसे ही छोड़ दिया गया.

जानकारी प्राप्त करने पर मालूम हुआ कि मरीज लावारिस है और इसका पैर टूटा हुआ है. शनिवार की सुबह कुछ लोगों ने उस मरीज के इलाज के लिए फीमेल वार्ड के इंचार्ज से संपर्क साधा. इसकी जानकारी दी. इसके बाद फीमेल वार्ड के कर्मियों ने मिल कर मरीज का इलाज शुरू किया.

फिलहाल मरीज फीमेल वार्ड में भर्ती है और उसका इलाज चल रहा है. उससे बातचीत में मालूम चला है कि उसका नाम बुधराम है. वह मध्य प्रदेश के सिल्दा गांव का निवासी है. वह सही तरीके से बात भी नहीं कर पा रहा है. वह पलामू के मेदिनीनगर कैसे पहुंचा, इसकी जानकारी नहीं मिल पायी है.

यहां यह कहना जरूरी है कि अगर मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज अस्पताल के डॉक्टर व कर्मी सक्रियता दिखाते तो उस मरीज का इलाज समय से ही शुरू हो जाता. 24 घंटे में इसकी स्थिति और बेहतर हो सकती थी, लेकिन सभी की लापरवाही के कारण मरीज का इलाज 24 घंटे बाद किसी अन्य व्यक्ति के दबाब में शुरू किया गया. अब देखना यह है कि क्या अब इस मरीज का इलाज सही ढंग से डॉक्टर व कर्मी करते हैं या नहीं?

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