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पलामू : पत्थर खनन से सरकार को रॉयल्टी और ग्रामीणों के हिस्से बंजर होते खेत, बीमारी और ठेकेदार का अत्याचार

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  • पलामू बना पत्थर खनन का अड्डा, प्रशासन की शह पर खनन में लगे ठेकेदार कर रहे ग्रमीणों पर अत्याचार
  • कोई नहीं सुनता ग्रामीणों की शिकायत

Pravin Kumar

Trade Friends

Palamu : झारखंड के खनिज बहुल राज्य होने के कारण सरकार के राजस्व का एक बड़ा स्रोत खनिज से मिलनेवाली रॉयल्टी है. विभाग के पास खनन कार्यों की देखरेख करनेवाले कर्मचारियों की किल्लत की वजह से अवैध खनन को भी वैध खनन बनाने का खेल राज्य में बदस्तूर जारी है. इससे अछूता पलामू जिला भी नहीं है. यहां नियमों को ताक पर रखकर खनन किया जा रहा है. मामला पलामू जिला के छतरपुर प्रखंड की चीरू पंचायत स्थित भलही का है, जहां पिछले तीन साल से दबंगता के साथ खनन किया जा रहा है. इसकी शिकायत जिला प्रशासन से करने के बाद भी जिला प्रशासन और स्थानीय थाना नहीं सुन रहे हैं. खनन कार्य गांव के बीचोंबीच किया जा रहा है, जिससे ग्रामीणों की आजीविका पर भी संकट आ गया है. कृषि योग्य भूमि बंजर हो रही है. खदान में विस्फोट का प्रभाव ग्रामीणों की बसाहट पर भी पड़ रहा है. ग्रामीणों के घरों में दरार पड़ जा रही है. पत्थर खनन कंपनी ने ग्रामीणों में भय उत्पन्न कर बेरोक-टोक खनन कर रही है. एक साल पूर्व जिला खनन विभाग की ओर से जांच कर खनन को सही ठहराया जा चुका है. ग्रामीणों की ओर से शिकायत करने पर भी जिला प्रशासन कार्रवाई नहीं कर रहा है. वहीं, ग्रामीणों का आरोप है कि पत्थर खदान के ठेकेदार अंजनी सिंह उनके घरों पर भी कब्जा कर रहे हैं, फिर भी प्रशासन मौन है. ग्रामीण जिन बहुफसलीय खेतों में गेहूं, धान, उड़द, गन्ना, प्याज इत्यादि लगाया करते थे, खनन की वजह से वे खेत अब बंजर हो गये हैं. गांव के अधिकतर चापानल और कुएं सूख गये हैं. एक रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि पत्थर खनन से निकलनेवाली धूल के कारण ग्रामीण टीबी की बीमारी से ग्रसित हो रहे हैं. इस बीमारी से कई ग्रमीणों की मौत भी हो चुकी है.

कहां हो रहा है खनन

पलामू जिला के छतरपुर प्रखंड की चीरू पंचायत स्थित भलही गांव में पत्थर खदान खोली गयी थी. खनन कार्य 50 फीट ऊंची चट्टान पर शुरू कर दिया गया, जो अब 200 फीट गहरा हो चुका है. गांव के लगभग 1000 पेड़ खनन कंपनी ने काट दिये हैं. खनन कार्य जहां किया जा रहा है, उसके चरों ओर घनी आबादी है. उत्तर की ओर हेनहे गांव है, जहां 200 परिवार हैं. इनमें 15 आदिवासी और शेष यादव परिवार हैं. खदान से 150 मीटर दूर भलही गांव है, जहां 150 उरांव परिवार की बसाहट है. खनन कार्य से सबसे ज्यादा प्रभावित भलही गांव है. पूर्व में पटगही के कई टोला हैं. वहीं, पश्चिम में पटगही और चूरी गांव हैं.

क्या कहते हैं ग्रामीण

ग्रामीण तेतरी देवी कहती हैं, “खान में विस्फोट होने के मेरा मिट्टी का घर टूट चुका है. नया घर बनाया, तो उसमें भी दरार पड़ गयी है. प्रशासन के लोग भी घर आकर देख चुके हैं, फिर भी कार्रवाई नहीं की गयी. गांववाले कई सालों से पत्थर खदान का विरोध कर रहे हैं. ग्रामीण जब थाना में शिकायत करने जाते हैं, तो केस नहीं लिया जाता है और जो लोग थाना में शिकायत लेकर जाते हैं, उन्हें ही फर्जी मुकदमे में प्रशासन फंसा देता है.”

लक्ष्मणिया देवी की बहू कहती है, “मेरी सास पत्थर खदान में हुई ब्लास्टिंग से जख्मी हो गयी. विरोध करने पर प्रशासन द्वारा गांव के लोगों को जेल में डाल दिया जा रहा है.

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क्या कहते हैं एसडीपीओ शंभु सिंह

मामला पुराना है. ग्रामीणों द्वारा प्रतिरोध कई बार किया गया है. लॉ एंड ऑर्डर का मामला है, वह पुलिस प्रशासन देख रहा है. कोई अप्रिय घटना वहां पर न हो, इसको ध्यान में रखा जा रहा है. जो व्यक्ति कानून-व्यवस्था को अपने हाथ में लेने का प्रयास करता है, उस पर पुलिस कार्रवाई कर रही है.

क्या कहते हैं छतरपुर थाना प्रभारी

चीरू पंचायत स्थित भलही में पत्थर खदान पर ग्रामीणों के अरोप के संबंध में पूछने पर थाना प्रभारी कहते हैं कि ऐसा कोई मामला नहीं है, ग्रामीणों को किसी तरह का नुकसान नहीं हो रहा है. इतना कहकर छतरपुर थाना प्रभारी ने कॉल डिसकनेक्ट कर दिया.

क्या कहते हैं पलामू के माइनिंग ऑफिसर

पत्थर खदान के संबंध में शिकायत आयी है, जिसकी जांच के लिए खनन विभाग और वन विभाग की टीम जल्द जाकर मामले की जांच करेगी और रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपी जायेगी.

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