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पलामू: बाजारों में बिक रहा फलों के नाम पर जहर, बिहार की चमकी बीमारी जैसी त्रासदी की आशंका

Dilip kumar

Palamu :  बिहार में एक अजनबी बीमारी चमकी कई बच्चों की जान ले चुकी है.  पूरे बिहार में हड़कम्प मचा हुआ है. विशेषज्ञ चिकित्सक भी इस बीमारी की गुत्थी सुलझा पाने में अब तक विफल रहे हैं. हालांकि अब तक इस बीमारी के जो कारण सामने आये हैं, उनमें कथित तौर पर खाली पेट अधपकी लीची खाना और मिलावटी खाद्य पदार्थों को प्रमुख माना जा रहा है. पलामू में भी इस बीमारी को लेकर अलार्मिंग स्थिति है, क्योंकि इसकी सीमा से सटे औरंगाबाद तक चमकी बीमारी अपने पांव पसार चुकी है.

पलामू के लिए अलार्मिंग स्थिति इसलिए है क्योंकि यहां लीची की आवक बिहार से ही होती है.  यहां फलों को पकाने के लिए जिस प्रकार के रसायनों का इस्तेमाल हो रहा है, वह ‘चमकी’ जैसी त्रासदी को आमंत्रित करने के लिए काफी है.

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प्रतिबंधित एथिलीन पाउडर से पकाये जा रहे फल

गुरुवार को हमारी टीम ने स्थानीय बाजार में जाकर केमिकल से फल पकाने का रियलिटी चेक किया तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आये. यहां फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड  ऑफ इंडिया (एफएसएसआई) के मानकों के तहत प्रतिबंधित कैल्शियम कार्बाइड पाउडर के अलावा प्रतिबंधित एथिलीन पाउडर से  आम, लीची, केला, तरबूज आदि पकाये जा रहे थे. कैल्शियम कार्बाइड या एथिलीन पाउडर घातक कैंसरकारक केमिकल है, लेकिन फलों के व्यापारी अपने फायदे के लिए लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं.

दरअसल, आम या अन्य फलों को कैरेट में पैक करते समय एथिलीन को उसमें डाल दिया जाता है. यह केमिकल मात्र दो से तीन घंटे में न केवल फलों को पका देता है बल्कि उनपर चमक भी ला देता है.

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एथिलीन से होने वाले नुकसान

कार्बाइड या एथिलीन पाउडर से पकाये गये फलों पर पाउडर लगा रह जाता है. पेट में एथिलीन  जाने से लूज मोशन, बुखार, उल्टियां होने के अलावा दिमाग पर भी असर पड़ता है. इससे कैंसर होने का खतरा भी बढ़ जाता है. फेफड़ों पर बुरा असर पड़ता है और फूड प्वाइजनिंग भी हो सकती है.

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रंगी हुई सब्जी भी कम घातक नहीं

पलामू जिले में सब्जी को रंग कर बेचने का भी गोरखधंधा लगातार चलता रहा है. व्यवसायी सब्जी को हरा व तरोताजा दिखाने के लिए कृत्रिम रंगों का प्रयोग करते हैं.  रंगी हुई सब्जियों के सेवन से लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. हालांकि वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने के कारण लोग इन्हीं घातक सब्जियों को खाने के लिए विवश हैं. सब्जियों को रंगने के लिए कापर सल्फेट का प्रयोग किया जाता है.

रंगी जाने वाली सब्जियों में आलू, परवल, करेला, भिंडी, बैगन, मटर, बोदी, टमाटर आदि शामिल हैं. सब्जी बाजार में तरबूज को ज्यादा लाल दिखाने की होड़ लगी रहती है. इसलिए व्यवसायी तरबूज में इंजेक्शन के माध्यम से लाल रंग उसके अंदर पहुंचाते हैं. इसके अलावा खाद्य पदार्थों में भी मिलावट चरम पर है.

नहीं होती सैंपल की जांच

फल, सब्जी एवं अन्य खाद्य पदार्थों में विष घोलने का धंधा जिले में धड़ल्ले से चल रहा है, लेकिन आज तक इन धंधेबाजों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है. कभी किसी ठेले या दुकान से जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा फल या सब्जी के सैंपल नहीं लिये जाते, जिसकी लेबोरेट्री जांच करायी जा सके कि वे मनुष्य के लिए कितना नुकसानदेह है.

कभी पनीर, खोवा, रिफाइन या अन्य खाद्य सामग्रियों की भी जांच नहीं करायी जाती, जबकि इसके लिए जिले में फूड एंड सेफ्टी इंस्पेक्टर पदस्थापित हैं. इतने के बावजूद न ही जिला प्रशासन की ओर से और न ही निगम प्रशासन या हेल्थ डिपार्टमेंट की ओर से ही कोई कदम उठाया जा रहा है. यही वजह है कि इंसानी जान से खिलवाड़ करने वाले इन व्यवसायियों का मनोबल बढ़ता जा रहा है.

कार्बाइड या एथिलीन से पकाये गये फल बेहद खतरनाक : चिकित्सा पदाधिकारी

सदर अस्पताल में चिकित्सा पदाधिकारी और आबादगंज स्थित एसएच हास्पिटल के प्रबंध निदेशक डा. रोहित पांडेय का कहना है कि कार्बाइड या एथिलीन से पकाये गये फल और रंगी हुई सब्जियां सेहत के लिए बेहद खतरनाक हैं. शरीर के लिए ये केमिकल किसी जहर से कम नहीं है. कार्बाइड या एथिलीन से लूज मोशन, बुखार, उल्टी होने का खतरा बढ़ जाता है. इसके अलावा इसका प्रभाव मेमोरी पावर पर भी पड़ता है. इसी प्रकार रंगी हुई सब्जियों से डायरिया, उल्टी चक्कर और पेट की कई बीमारियां हो सकती हैं.

प्रशासनिक सांठगांठ से होते हैं ऐसे कार्य : बसंत जौहरी

सामाजिक कार्यकर्ता बसंत जौहरी ने कहा है कि फलों को पकाने और सब्जियों को तरोताजा दिखाने के लिए जिस प्रकार का खेल जिले में हो रहा है, उस पर तत्काल अंकुश लगाना जरूरी है. उन्होंने आरोप लगाया कि फल व्यवसायियों का बेखौफ होकर इस प्रकार की करतूत को अंजाम देना कहीं न कहीं प्रशासनिक सांठगांठ का संकेत देता है।  इस पर रोक लगाने के लिए प्रशासनिक हस्तक्षेप जरूरी है.

पलामू में चमकी का कोई असर नहीं : सीएस

जिले के सिविल सर्जन डा एफ कनेडी ने बताया कि चमकी जैसी बीमारी का जिले में दूर-दूर तक कोई प्रभाव नहीं है. इस बीमारी से निपटने के लिए या फिर तैयारी को लेकर सरकार से किसी तरह दिशा-निर्देश प्राप्त नहीं हुआ है. बावजूद अगर ऐसी स्थिति बनती है तो चाइल्ड वार्ड उनके यहां संचालित है, वहीं तत्काल व्यवस्था  कर दी जायेगी.

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