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Palamu : पलामू किला मेला में मांस-मदिरा की बहार, चूर-चूर हुए राजा मेदिनीराय के आदर्श

Palamu : पलामू प्रमंडल ही नहीं झारखंड के सर्वोत्तम राजाओं में से एक राजा मेदिनीराय के आदर्शों को पलामू किला मेला में चूर-चूर कर दिया गया. राजा मेदिनी राय की सोच और उनके सकारात्मक पहलुओं को किसी ने नहीं समझा. मेला में एक दो नहीं, बल्कि मांस-मदिरा की सैकड़ों दुकानें लगी हुई थीं. उन दुकानों पर हजारों की संख्या में शराब और मांस का सेवन करनेवाले झूमते हुए देखे गये. इधर, रस्सी वाला गेम का संचालक चिल्लाते हुए कहता है इधर आओ और 1000 लगाओ, 2000 पाओ.

मेला परिसर में खुलेआम ग्राहकों को बुलाने के लिए शराब दुकान के संचालक चिल्लाते हुए कह रहे थे कि आइये और महुआ दारू 50 रुपये का बोतल पीजिए. हड़िया 30 रु में एक बोतल, ताड़ी प्रति बोतल 50 रु और अंग्रेजी पव्वा 180 में ले जाइये और जम कर लुत्फ उठाइये.

वहीं मेला में टेबल कुर्सी के साथ पेटी पर शराब रख कर धड़ल्ले से बेची जा रही थी, जबकि फुलवरिया स्थित पलामू किला मेला परिसर में मुर्गा, मांस, मछली और सूअर का मांस सैकड़ों जगह पर बना कर बेचा जा रहा था. करीब एक हजार से ज्यादा चूल्हा और बर्तन के साथ महिला पुरुष ग्राहकों को चखना के तौर पर परोस रही थीं. दो दिवसीय मेला का समापन केवल खाने-पीने और इंजॉय तक सीमित रह गया. मेला में परंपरागत हथियार, लकठो, बादाम, पकौड़ी, चावल-दाल सब्जी, सिंघाड़ा आदि खूब बिके.

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राजा मेदिनीराय के आदर्शों पर चलने की जरूरत

पलामू किला मेला के संयोजक अवधेश सिंह चेरो ने कहा कि राजा मेदिनी राय के आदर्शों पर चलने की जरूरत है. राजा मेदनीराय की सोच थी की पलामू प्रमंडल के साथ उनके अधीनस्थ क्षेत्रों में दूध-दही की भरमार हो. तमाम दुर्गुण को त्याग लोग एक दूसरे के सुख-दुख में शामिल रहें. उनका शासनकाल सर्वोत्तम शासन का एक नमूना था. 400 वर्षों तक 16 चेरो राजाओं ने पलामू किले पर राज किया था.

क्षेत्र के नामी-गिरामी पंडित अक्षयवट नाथ पांडे कहते हैं कि राजा मेदिनी राय के आदर्शों को अपनानेवाले लोगों ने मेला में आकर उनके सपनों को चकनाचूर कर दिया.

विदित हो कि छठ पूजा के अगले दिन से दो दिनों तक पलामू के प्रसिद्ध पलामू किला परिसर में मेला का आयोजन किया जाता है. औरंगा नदी तट पर सतबरवा प्रखंड के फुलवरिया में मेला के आयोजन के पीछे राजा मेदिनी राय के आदर्शों को जन जन तक पहुंचाना है, लेकिन समय के साथ मेला के आयोजन का उद्देश्य खत्म होता जा रहा है.

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