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पलामू: जान हथेली पर लेकर ट्रेन के नीचे से पटरी पार कर स्कूल जाते हैं विद्यार्थी

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Dilip Kumar

Palamu: पलामू जिले के उंटारी रोड स्थित राजकीयकृत गांधी +2 उच्च विद्यालय के विद्यार्थियों को स्कूल पहुंचने के लिए रेल की पटरियां पार करनी पड़ती हैं. यूं तो पटरी पार कर स्कूल जाना सामान्य सी बात लगती है, पर यह सामान्य सी लगनेवाली बात इतनी सामान्य भी नहीं. स्कूल के वक्त वहां रेलगाड़ी खड़ी रहती है. विद्यार्थियों के सामने दो ही रास्ते होते हैं या तो वे घूम कर दूसरे रास्ते से स्कूल जायें या फिर उस रेलगाड़ी के नीचे से पटरी पार करें. घूम कर स्कूल पहुंचने में उन्हें और अधिक चलना पड़ता है.

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एक किलोमीटर दूर है वैकल्पिक रास्ता

ऐसा नहीं है कि बच्चों को स्कूल तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक रास्ता नहीं है, लेकिन उसकी दूरी करीब एक किलोमीटर है. दरअसल, यह स्कूल उंटारी रोड स्टेशन के दूसरे छोर पर अवस्थित है, लेकिन वहां कोई ओवरब्रिज मौजूद नहीं है. बस यही कारण है कि लम्बी दूरी से बचने के लिए पिछले कई वर्षों से स्कूली बच्चे हर दिन अपनी जान को जोखिम में डालते हैं. हद तो तब हो जाती है जब ट्रैक पर कोई ट्रेन या मालगाड़ी खड़ी होती है और इसके नीचे से ये बच्चे गुजरते हैं. इस बीच कभी कोई ट्रेन या मालगाड़ी आगे बढ़ जाये तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता.

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पढ़ाई करने के लिए उठाती हैं जोखिम

न्यूज विंग टीम ने गांधी +2 उच्च विद्यालय में पढ़नेवाली कई छात्राओं से बात की. छात्राओं ने ट्रैक पार करने की अपनी पीड़ा साझा करते हुए कहा कि ट्रेन के नीचे से पटरियां पार करने में उन्हें बहुत डर लगता है, लेकिन पढ़ाई के लिए जोखिम उठाना पड़ता है. एक छात्रा ने तो यहां तक बताया कि एक बार वह और एक अन्य छात्रा खड़ी ट्रेन के नीचे से पटरियां पार कर रही थीं, तभी ट्रेन चल पड़ी. किसी तरह उन्होंने अपनी जान बचायी.

ओवरब्रिज का निर्माण जरूरी हैः प्राचार्य

स्कूल के प्राचार्य ने कहा कि यह स्थिति हादसे को आमंत्रित करनेवाली है. बच्चों की पीड़ा को देखते हुए जल्द ही यहां ओवरब्रिज का निर्माण होना चाहिए.

2015 से हो रही फ्लाइओवर के निर्माण की मांग

गौरतलब है कि वर्ष 2015-16 से यहां फ्लाइओवर के निर्माण की मांग होती रही है. स्थानीय ग्रामीणों ने इस सिलसिले में कई बार डीआरएम को मांग पत्र सौंपा है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई पहल नहीं हुई है. दुःखद यह है कि यह सब देखते-जानते हुए भी सांसद स्थानीय विधायक और जिम्मेवार जनप्रतिनिधि के कानों में जूं तक नहीं रेंग रहे हैं.

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