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पलामू: पुलिस पिटायी मामले में एसपी सख्त,  छत्तरपुर एएसआई लाइन हाजिर, जांच शुरू

पुलिस अधीक्षक अजय लिंडा ने पिटायी करने के आरोपी सहायक पुलिस अवर निरीक्षक टुनटुन तिवारी को लाइन हाजिर कर दिया है.

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Palamu:  जिले के छत्तरपुर थाना क्षेत्र में अजय प्रजापति के साथ हुई पुलिस पिटायी मामले में कार्रवाई शुरू हो गयी है. पुलिस अधीक्षक अजय लिंडा ने पिटायी करने के आरोपी सहायक पुलिस अवर निरीक्षक टुनटुन तिवारी को लाइन हाजिर कर दिया है. साथ ही जांच के आदेश दिए हैं. साथ ही पिटायी का मामला सही पाये जाने पर एएसओ के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की जायेगी.

इस खबर को न्यूज विंग ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था. खबर छपने के बाद ही पुलिस प्रशासन हरकत में आया और 10 दिन पुराने मामले में अब कार्रवाई शुरू की. खबर वायरल होने के बाद एसपी अजय लिंडा ने गंभीरता दिखायी और छत्तरपुर एसडीपीओ को जांच का आदेश दिया.

छत्तरपुर के एसडीपीओ शंभू कुमार सिंह ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा कि आरोप लगने के बाद एएसआई को लाइन हाजिर कर दिया गया है. साथ ही मामले में जांच की जा रही है. अगर पिटायी का मामला सही साबित हुआ तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की जायेगी.

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पुलिस पिटायी से पसलियों के टूटने का मामला गलत : एसडीपीओ

एसडीपीओ ने बताया कि पूरे मामले की जांच की जा रही है. इस मामले में ग्रामीणों का भी बयान लिया गया है. अभी तक की जांच में अजय प्रजापति की पुलिस पिटायी से पसलियों के टूट जाने का मामला गलत साबित हुआ है. ग्रामीणों ने बताया कि अजय प्रजापति और उसके चाचा विलास प्रजापति के बीच जमीन विवाद चल रहा है. विवाद के बीच अजय प्रजापति मकान की छत पर चढ़ गया था और कच्चे मकान के छप्पर उखाड़ रहा था. यहां से गिरने पर उसे काफी चोटें आयी. इसी घटना में उसकी पसलियां टूट गयी.

एसडीपीओ ने बताया कि छत्तरपुर थाना आने पर अजय प्रजापति के साथ मारपीट मामले की जांच की जा रही है. यहां डांट डपट किया जा सकता है, लेकिन बेरहमी से पिटायी का मामला सही नहीं लगता.

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क्या है आरोप?

अजय प्रजापति और उसके चाचा विलास प्रजापति के बीच जमीन विवाद चल रहा है. पंचायत ने मामले को सुलझा दिया था.  लेकिन कुछ दिन बाद विलास ने घर पर कब्जा करने की नीयत से कच्चे दीवार के अंदर ही अंदर पक्की दीवार का निर्माण करा लिया. इस बात को लेकर अजय और विलास में कहासुनी हुई.

इसके बाद 30 जून को अचानक अजय के घर पर पुलिस पहुंची. अजय घर पर नहीं था. अजय ने कहा, घर पर मेरा नाबालिग बेटा मिला और  पुलिस ने निर्ममता से उसकी पिटाई कर दी. मेरे पिता बचाने गये तो पुलिसकर्मियों ने उन्हें भी डांट-डपट दिया.

साथ ही अजय का आरोप है कि पुलिस ने उसके बेटे संतोष को इतना पीटा कि, उसके कान खराब हो गये. इस बात की सूचना मिलने पर वह थाना गया तो उसके कागजात देखे बिना एएसआई टुनटुन कुमार ने उन्हें कमरे में बंद कर दिया. अजय का कहना है कि बंद कमरे में एएसआइ ने कहा कि तुम उग्रवादी हो और मुझे 20 हजार रुपये लाकर दो. इसके बाद एएसआइ न लाठी व पैर के जूते से मेरी बुरी तरह पिटाई कर दी.

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