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पलामू: छह वर्ष बाद जागा प्रशासन, उतराखंड त्रासदी की राशि केरल भेजने का निर्णय

उत्तराखंड त्रासदी की राशि केरल में बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए भेजी जायेगी.

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Palamu: छह वर्ष बाद पलामू जिला प्रशासन की नींद टुटी है. वर्ष 2013 में उत्तराखंड त्रासदी के लिए एकत्र की गयी राशि केरल बाढ़ प्रभावितों की मदद के लिए भेजने का निर्णय ले लिया गया है. इस सिलसिले में गुरूवार को सदर अनुमंडल अधिकारी नंद किशोर गुप्ता की अध्यक्षता में एक बैठक आयोजित की गयी, जिसमें रेडक्रॉस सोसाइटी की पलामू इकाई के पदाधिकारी भी उपस्थित थे. बैठक में यह निर्णय लिया गया कि दान दाताओं की सहमति से उत्तराखंड त्रासदी की राशि केरल में बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए भेजी जायेगी.

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पलामू के लोगों ने राहत कोष के लिए भरपूर सहयोग दिया था

गौरतलब है कि उतराखंड त्रासदी के प्रभावितों की राहत हेतु प्रधानमंत्री की अपील पर पूरे भारत में प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष के लिए धन संग्रह पूरे जोर-शोर से प्रारंभ हुआ था. पलामू जिले के लोगों ने भी राहत कोष के लिए भरपूर सहयोग दिया था. वर्ष 2013 में आई इस भीषण त्रासदी में पलामू के भी कई लोग बद्रीनाथ-केदारनाथ यात्रा के दौरान प्रभावित हुए थे. डालटनगंज के नावाटोली निवासी प्रतिष्ठित व्यवसायी सुरेश अग्रवाल और उनकी पत्नी उस भयानक तूफान में खो गये और आज तक उनका कुछ पता नहीं चल पाया.

इस त्रासदी के प्रभावितों की मदद के लिए पलामू जिला प्रशासन ने भी पहल शुरू की थी. पलामू के तत्कालीन उपायुक्त मनोज कुमार ने दानदाताओं, व्यवसायियों, समाजसेवियों, शिक्षण संस्थानों एवं सामाजिक संस्थानों से जुड़े लोगों की बैठक बुलायी थी. उपायुक्त की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में भारतीय रेडक्रॉस सोसाइटी पलामू शाखा के माध्यम से धन संग्रह करने का निर्णय लिया गया था. उपायुक्त कुमार रेडक्रॉस पलामू के पदेन अध्यक्ष थे और उनकी मंशा थी कि प्रशासन सीधे तौर पर धन संग्रह में सम्बद्ध ना हो, क्योंकि लोग इसे दबाव के रूप में देखेंगे.

संग्रह हेतु रेडक्रॉस आपदा प्रबंधन का गठन कर इसके लिए तत्कालीन सदर एसडीओ विन्देश्वरी ततमा और रेडक्रॉस पलामू के तत्कालीन परियोजना निदेशक दुर्गा जौहरी के संयुक्त हस्ताक्षर से भारतीय स्टेट बैंक की डालटनगंज मुख्य शाखा में एकाउंट खोल दिया गया था. हालांकि उपायुक्त ने संगठनों से यह भी कहा कि अगर लोग सहयोग राशि सीधे तौर पर प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष, नई दिल्ली को भेजना चाहते हैं तो वे स्वतंत्र हैं.

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3 लाख 680 रूपये ब्याज की राशी जमा हुई

आधिकारिक सूचना के अनुसार एसबीआई में रेडक्रॉस आपदा प्रबंधन का खाता खुलने के बाद कुल 53 व्यक्तियों या संस्थाओं द्वारा लगभग 12 लाख 82 हजार 41 रूपये की राशी उस मद में जमा कराई गई थी. रेडक्रॉस पलामू के रक्षक उक्त एकाउंट में ब्याज की बढ़ती राशि देखकर फूले नहीं समा रहे हैं. आज नवीनतम जानकारी के अनुसार आज यह राशि 15 लाख 50 हजार 864 रूपये हो गयी है. यानि 3 लाख 680 रूपये ब्याज की राशी इसमें शामिल हो गई थी. अब प्रश्न यह उठता है कि जिस संस्था के अध्यक्ष स्वयं उपायुक्त हों, उस संस्था का यह कैसा आचरण है कि जनता के पैसे पर करीब छह वर्ष तक कुंडली मारकर जमे रही. उपायुक्त मनोज कुमार के तबादले के पश्चात कृपानंद झा उपायुक्त बने. झा के बाद के श्रीनिवासन डीसी बने और वर्तमान में अमीत कुमार पलामू के उपायुक्त हैं और रेडक्रॉस पलामू के पदेन अध्यक्ष भी हैं.

करीब दो वर्ष पूर्व एक बैठक के दौरान उन्हें रेडक्रॉस के सदस्यों से ज्ञात हुआ कि राहत कोष के नाम पर जमा राशि अभी तक बैंक की शोभा बढ़ा रही है, तो वह बैंक गये लेकिन सोसाइटी के कुछ सदस्यों ने उपायुक्त को सुझाव दिया कि इस राशि को रेडक्रॉस पलामू की परियोजनाओं में इस्तेमाल किया जाय तो अच्छा होगा. उपायुक्त ने कहा कि अगर सभी दानदाता अपनी सहमति लिखित रूप से व्यक्त कर दें तो इस निधि का स्वरूप परिवर्तित किया जा सकता है. इसी क्रम में रेडक्रॉस पलामू के सचिव डॉ. सत्यजीत गुप्ता और उनके तथाकथित सलाहकारों ने यह तय कर लिया कि प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष की इस राशि से रेडक्रॉस भवन का निर्माण किया जाए या प्राथमिक चिकित्सा सुविधाओं से लैस वातानुकूलित चलंत चिकित्सा वाहन खरीद लिया जाए.

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इसी प्रकरण पर 11 मई 2017 को तत्कालीन एसडीओ सदर श्रीमती नैन्सी सहाय की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गयी किन्तु उसमें मात्र तीन दानदाता ही पहुंचे. समझा जाता है कि दानदाता प्रशासन द्वारा रेडक्रॉस को उनकी सहयोग राशि से प्रमोट करने की इच्छा से खुश नहीं थे.

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आरटीआई कार्यकर्ता  ने राष्ट्रपति को लिखा था पत्र

उल्लेखनीय है कि नगर पर्षद मेदिनीनगर की ओर से राहत कोष में 27 हजार 500 रूपये दिये गये थे, जबकि पलामू क्लब की ओर से तत्कालीन सचिव केशरी सिंह ने 6002 रूपये तथा मुहर्रम इंतजामियां कमिटी नें 15 हजार रूपये दिया गया था. अब यह प्रश्न उठना भी जरूरी है कि रेडक्रॉस की पूर्व की कमिटी ने यह राशि क्यों नहीं प्रेषित की थी. इसे रेडक्रॉस के पदधारियों की घोर लापरवाही माना जाए या ऐसा जानबूझ कर किया गया है. हालांकि कई सदस्यों ने तत्कालीन अध्यक्ष (उपायुक्त) और सचिव डॉ. आरपी सिन्हा पर राशि भेजने के लिए दबाव बनाया लेकिन टालमटोल रवैया जारी रहा. इतना ही नहीं कुछ सदस्यों ने इसकी शिकायत झारखंड स्टेट रेडक्रॉस सोसाइटी के अध्यक्ष सह महामहिम राज्यपाल से भी लिखित तौर पर की लेकिन वहां से भी कोई कार्रवाई नहीं हुई.

वर्ष 2017 में सोसाइटी के एक सक्रिय सदस्य और आरटीआई कार्यकर्ता पवन कुमार ने एक पत्र राष्ट्रपति महोदय को भेजा है. माननीय राष्ट्रपति भारतीय रेडक्रॉस सोसाइटी के पदेन अध्यक्ष हैं. वैसे पूर्व कमिटी के पदधाकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाया जा सकता है, लेकिन उक्त कमिटी ने कभी इस राशि को रेडक्रॉस पलामू के लिए इस्तेमाल करने की मंशा व्यक्त नहीं की थी. किन्तु नयी कमिटी ने अपने कार्यकाल में रेडक्रॉस के सदस्यों की घोर उपेक्षा तो की ही हैं साथ ही आपदा प्रबंधन की राशि पर हाथ साफ करने की अपनी मंशा जगजाहिर कर दी है.

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देर आए, दुरूस्त आए

अगर किसी कारण से या किसी की लापरवाही से यह राशि उतराखंड त्रासदी के प्रभावितों के काम नहीं आ सकी, तो इस गलती को सुधारने की जरूरत थी. इस राशि को पहले ही प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में भेजकर इसे सार्थक किया जा सकता था. ऐसा इसलिए भी जरूरी था, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लगातार यह अपील करते रहे हैं कि आपदा राहत कोष को मजबूत करने में लोग सहयोग करें. ताकि देश में किसी भी विपत्ति के समय इस धन का उपयोग किया जा सके. बहरहाल, जिले के उपायुक्त अमीत कुमार की पहल पर इस सहभावना राशि केरल भेजने का निर्णय देर आए, दुरूस्त आए की संज्ञा दी जा सकती है.

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