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पलामू : लोक अदालत में 167 मामले निष्पादित, 12 लाख 42 हजार रुपये का सेटलमेंट 

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Palamu : जिला विधिक सेवा प्राधिकार, पलामू के तत्वावधान में व्यवहार न्यायालय परिसर में लगी इस वर्ष की दूसरी मासिक लोक अदालत में 167 मामले निष्पादित किये गये. मामलों के निष्पादन के लिए सात बेंचों का गठन किया गया था, जिसमें एक-एक न्यायिक पदाधिकारी और अधिवक्ता थे. फरियादियों की सुविधा के लिए एक बेंच अलग से ‘मे आई हेल्प यू’ से संबंधित था.

रेल एक्ट से कुल 11 मामले निष्पादित किये गये

लोक अदालत में मामलों के निपटारे के पश्चात 12 लाख 42 हजार 293 रुपये का सेटलमेंट हुआ, जबकि 5 लाख 32 हजार 293 रुपये का रियलाइजेशन हुआ. पीठ संख्या दो एमएसीटी एवं विद्युत विभाग से संबंधित थे, जहां कुल नौ मामले निपटाये गये. पीठ संख्या चार आपराधिक मामलों से संबंधित पीठ में कुल 63 वाद निष्पादित किये गये, जिसमें उत्पाद विभाग के 36, वन विभाग के 21 मामले भी शामिल हैं. उत्पाद के मामलों के निष्पादन के फलस्वरूप विभाग को एक लाख 94 हजार 900, जबकि वन को 2 लाख 38 हजार 408 क्षतिपूर्ति के रूप में प्राप्त हुये.

पीठ संख्या पांच से 25 मामले बीएसएनएल के निष्पादित किये गये. इसमें विभाग को 29 हजार 85 रुपये क्षतिपूर्ति के रूप में प्राप्त हुए. पीठ संख्या से 59 मामले, रेल एक्ट से कुल 11 मामले निष्पादित किये. इससे रेल विभाग को 5 हजार 900 रुपये प्राप्त हुए. पीठ संख्या एक और तीन से एक भी मामले निष्पादित नहीं हुये.

सुलभ न्याय का सर्वोतम मंच है लोक अदालत : पीडीजे

मौके पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश विजय कुमार ने लोक अदालत सुलभ न्याय का सर्वोतम मंच बन गयी है. लोक अदालत की महता इन दिनों काफी बढ़ गयी है. लोग सुलभ न्याय पाने के लिए लोक अदालत का रास्ता अपना रहे हैं. लोक अदालत में मामले निस्तारण से बैमनस्यता सदा सर्वदा के लिए पक्षकारों में दूर हो जाता है. समाज में आपसी सद्भाव प्रेम बढ़ाने का काम लोक अदालत करता है.

लोक अदालत में किसी पक्ष की हार व जीत नहीं होती

प्राधिकार के सचिव प्रफुल्ल कुमार ने कहा कि लोक अदालत में मामला निस्तारण से समय व शक्ति की बचत होती है. उन्होंने कहा कि लोक अदालत वैकल्पिक विवाद निपटारे का सशक्त माध्यम है. अधिवक्ता संघ के उपाध्यक्ष मंधारी दुबे ने कहा कि पलामू जिले में लोक अदालत के माध्यम से अधिक से अधिक मामले का निस्तारण कर एक इतिहास कायम किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि लोक अदालत में किसी पक्ष की हार व जीत नहीं होती है. यहां दोनों पक्ष आपसी रजामंदी से मामले का निस्तारन करते हैं और खुशी-खुशी घर लौटते हैं.

सर्व प्रथम पीडीजे विजय कुमार एवं अन्य के द्वारा दीप जलाकर लोक अदालत का उद्घाटन किया गया. अध्यक्षता पीडीजे ने की, जबकि संचालन प्राधिकार के सचिव प्रफुल्ल कुमार ने किया. लोक अदालत में अन्य लोगों के अलावा जिला अधिवक्ता संघ के उपाध्यक्ष मनधारी दुबे, कुटुम्ब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश बीडी तिवारी, जिला जज प्रथम डी.के पाठक समेत कई अन्य न्यायिक पदाधिकारी, अधिवक्ता और मामले से संबंधित पक्षकार भी उपस्थित थे.

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