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#Palamu: कोरोना को लेकर अफवाह का बाजार गर्म, दो संदिग्धों को जबरन भेजा गया इलाज के लिए

Palamu: कोरोना वायरस को लेकर पलामू में भी हड़कंप मचा हुआ है. सर्दी, जुकाम या खांसी होने पर इसे कोरोना का असर मान लिया जा रहा है और संबंधित व्यक्ति पर इलाज के लिए दबाव बनाया जा रहा है.

पलामू जिले के सतबरवा प्रखंड क्षेत्र में मंगलवार को कुछ इसी तरह की स्थिति बनी रही. दो युवकों को संदिग्ध कोरोना का रोगी मान कर उन पर इलाज कराने के लिए दबाव दिया गया. दोनों को स्वास्थ्य उपकेंद्र में जांच कराने के बाद मेदिनीनगर पीएमसीएच भेज दिया गया.

मंगलवार को सतबरवा स्वास्थ्य उपकेंद्र में ग्रामीणों के दबाव पर जांच कराने दो कथित मरीज पहुंचे. उन्हें सर्दी खांसी की शिकायत थी. दोनों मरीज बीते तीन माह से केरल में मजदूरी करते थे.

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पलामू मेडिकल कॉलेज भेजा गया

वे शनिवार को सतबरवा के कमारू गांव पहुंचे. हालांकि इन मरीजों की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही कोरोना वायरस होने की पृष्टि की जा सकती है. इन दोनों संदिग्ध को सवारी टेम्पो वाहन पर बैठा कर मेदिनीनगर के पलामू मेडिकल कॉलेज भेजा गया है. जरूरत पड़ने पर दोनों को आइसोलेशन वार्ड में रखा जा सकता है.

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उपकेंद्र की चिकित्सा पदाधिकारी डॉक्टर रिद्धी कुमारी ने बताया कि दोनों में सर्दी-खांसी, सीने में दर्द और सांस फूलने के लक्षण पाये गये हैं. सतबरवा में जांच की व्यवस्था नहीं है. यह कोरोना वायरस का लक्षण हो सकता है? दूसरे प्रदेश में काम करने के कारण दोनों को सुरक्षा की दृष्टि से जांच के लिए मेदिनीनगर भेजा गया है. पृष्टि होने पर आइसोलेशन वार्ड में भेजा जा सकता है.

बताया गया कि इलाज के लिए दोनों संदिग्ध मरीजों के पास रुपये नहीं थे. इसलिए वे भीड़भाड़ वाले भारतीय स्टेट बैंक की सतबरवा शाखा में पैसा निकालने के लिए आधा घंटा तक लाइन में लगे रहे. इन युवकों ने बताया कि रास्ते में ट्रेन में आते समय तबियत खराब हो गयी. केरल से जो पैसा भेजा करते थे, उसे बैंक से निकालने पहुंचे थे. हालांकि केवाइसी नहीं होने के चलते पैसा नहीं निकाल पाये. बैंक में जरूरी कागजात मांगा गया.

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सतबरवा का मामला महज अफवाह

जिले के सिविल सर्जन डॉ जॉन एफ कनेडी ने बताया कि सतबरवा का मामला महज अफवाह है. पलामू सहित पूरे देश में कोरोना का व्यापक असर नहीं है. विदेश से आनेवाले मरीजों में ही इस वायरस का संक्रमण हो सकता है. चूंकि इस बीमारी को लेकर ग्रामीणों में भय का माहौल है. इसलिए सर्दी-खांसी होने पर ही लोग उसे कोरोना का रोगी मान ले रहे हैं और उस पर इलाज के लिए दबाव बनाया जा रहा है.

जागरूक होना बहुत जरूरी है. इससे काफी हद तक कोरोना से बचा जा सकता है. अफवाह पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है. किसी तरह सूचना देने के लिए कंट्रोल रूम बनाया गया है और संबंधित पदाधिकारियों के मोबाइल नंबर सार्वजनिक किये गये हैं.

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