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पलामू: रवींद्र राय ने अपने ही विधायकों को कठघरे में खड़ा कर दिया : दिलीप नामधारी 

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Palamu :  झारखंंड विकास मोर्चा (प्रजातांत्रिक) के युवा नेता एवं पूर्व विधानसभा अध्यक्ष इंदर सिंह नामधारी के पुत्र दिलीप सिंह नामधारी ने छह विधायकों के दल-बदल मामले पर टिप्णी करते हुए कहा है कि भाजपा के पूर्व अध्यक्ष रवीन्द्र राय ने झाविमो के केंद्रीय अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी के आरोपों का जवाब देते हुए अपने ही छह बागी विधायकों को कठघरे में खड़ा कर दिया.

मरांडी बीजेपी में विलय नहीं चाहते थे

मीडिया को संबोधित करते हुए रवींद्र राय ने स्वीकार किया की झारखंड विकास मोर्चा के प्रमुख बाबूलाल मरांडी नहीं चाहते थे कि जेवीएम का विलय बीजेपी में हो और विलय को लेकर जब उन्होंने दूरभाष पर बाबूलाल मरांडी से बात की, तब मरांडी ने कहा था कि ये मेरे लिए संभव नहीं है और मैं ऐसा करने से अपने विधायकों को भी रोकूंगा. मतलब साफ़ है कि बाबूलाल मरांडी बीजेपी में विलय नहीं चाहते थे. विलय से जुडी भ्रांतियों का खंडन आज खुद भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रवीन्द्र राय ने ही कर दिया. ऐसे में बड़ा सवाल ये उठता है कि जब पार्टी नेतृत्व ही बीजेपी में विलय नहीं चाहता था तब बागी विधायकों ने विधानसभा में स्पीकर के कोर्ट में विलय होने की बात कैसे कही. इसलिए विधायकों का दल-बदल गंभीर भ्रष्टाचार का मामला है.

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सरकार की कथनी और करनी में तालमेल नहीं

सौदेबाजी और समझौते की राजनीति से जुड़े इस मामले की जांच सीबीआई से होनी चाहिए. आज जो लोग सत्ताधारी दल में हैं उनकी कथनी और करनी में कोई तालमेल नजर नहीं आता है. एक तरफ भ्रष्टाचार पर जीरो टालरेंस का दावा करते हैं, दूसरी तरफ जब ऐसे मामले सामने आते हैं तो उनकी जांच से सरकार पल्ला झाड़ते नजर आती है. राज्यसभा चुनाव प्रकरण में चुनाव आयोग के द्वारा जब राज्य के एक वरीय पुलिस अधिकारी एवं मुख्यमंत्री के तत्कालीन राजनीतिक सलाहकार पर एफआईआर दर्ज करने और जांच कराने की बात कही तो उस मामले को भी राज्य सरकार ने ठंडे बस्ते में डालने का काम किया. श्री नामधारी ने कहा कि मौजूदा प्रकरण में जांच इसलिए आवश्यक है क्योंकि ऐसे मामले राज्य को बार-बार शर्मशार कर रहे हैं. सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जिन विधायकों पर संविधान की 10 वीं अनुसूची के तहत विधानसभा की अदालत में मामला पहले से विचाराधीन हो, वैसे विधायकों को भाजपा के द्वारा लाभ के पदों पर मंत्री एवं चेयरमैन के रूप में नियुक्त किया जाना अपने आप में राजनैतिक सौदेबाजी की गवाही देता है.

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गुजरात राज्यसभा चुनाव में डरा-धमका कर विधायकों की खरीद-फरोख्त की कोशिश

उन्होंने कहा कि भाजपा के शासनकाल में विधायकों के दल बदल का मामला आज पूरा देश में देखने को मिल रहा है. भाजपा ने गुजरात राज्यसभा चुनाव में डरा-धमका कर विधायकों की खरीद-फरोख्त करने का प्रयास किया, फिर भी विफल साबित हुआ. इसी तरह कर्नाटका, मणिपुर, गोवा विधानसभा चुनाव में विधायकों को खरीदने का काम भाजपा ने किया है, जो लोकतंत्र को कलंकित करता है. एक तरफ लोग राजनीति में सूचिता, नैतिकता, चाल, चरित्र और चेहरे की बात करते है और इसके विपरित कानून और संविधान की धज्जियां उड़ाते हुए ऐसे लोगों को पुरस्‍कृत करते हैं. जो निहित राजनैतिक लाभ के लिए सौदेबाजी और समझौते करते हैं.

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