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पलामू: मिट्टी के बर्तनों की प्रदर्शनी में दिख रहा कुम्हारों का हुनर, मिट्टी के फ्रिज व कुकर बने आकर्षण

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Daltonganj: मानव सभ्यता का जब उदय हो रहा था, तब से आज तक इन बर्तनों का कोई स्थान नहीं ले पाया है. समय के साथ हालांकि इनकी मांग में कमी आयी है, लेकिन अब ये स्टेटस सिंबल बनकर सामने आ रहे हैं. हम बात कर रहे हैं मिट्टी के बर्तनों की. राज्य माटी कला बोर्ड के सदस्य अविनाश देव की पहल पर दीपावली के उपलक्ष्य में डालटनगंज के को-आपरेटिव भवन में तीन दिवसीय प्रदर्शनी में मिट्टी के बर्तन आकर्षण का केन्द्र बने हुए हैं. यहां मिट्टी के कुकवेअर, किचनवेअर के साथ-साथ खूबसूरत डिजाइनों में बने कई बर्तन डिस्प्ले किये गये हैं. मिट्टी के ये बर्तन इस कदर खूबसूरत हैं कि इन्हें घर में सजाने का मन होता है. वैसे तो इन सभी बर्तनों को वास्तविक रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है. लेकिन, इसकी खूबसूरती इन्हें डेकोरेटिव पीस भी बना देती है.

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मिट्टी के खास बर्तनों के फायदे

प्रदर्शनी में मिट्टी के प्रेशर कुकर, केसरोल्स, फ्रिज, डिनर सेट, टी सेट आकर्षण के केन्द्र बने हुए हैं. प्रेशर कुकर में बाकायदा गास्केट और सीटी भी लगी है. मिट्टी का फ्रिज तो लोगों को काफी लुभा रहा है. इसमें बिना बिजली के दूध और दूध से बने प्रोडेक्ट को दो दिन और फल सब्जियों को चार दिनों तक ताजा रखा जा सकता है. माटीकला बोर्ड के सदस्य अविनाश देव बताते हैं कि ये सभी बर्तन गुजरात से मंगाये गये हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर भी इन बर्तनों का उत्पादन शुरू किया जायेगा. इसके लिए कुम्हारों के लिए न केवल प्रशिक्षण की व्यवस्था की जा रही है, बल्कि उन्हें इलेक्ट्रिक चाक उपलब्ध कराने की पहल की गयी है. श्री देव बताते हैं कि इन बर्तनो को बनाने में किसी तरह का रंग या केमिकल यूज नहीं किया जाता है, इसलिए ये हेल्थ के लिए सुरक्षित हैं.

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