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पलामू : थाना, ओपी और पिकेट पड़े खाली, 70% पुलिसकर्मी चुनाव डयूटी में व्यस्त, सुरक्षा व विधि व्यवस्था बनी चुनौती

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Palamu : देश के सातवें व राज्य के चौथे चरण के चुनाव को लेकर झारखंड पुलिस ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. पलामू जिला बल के 70 फीसद जवान व पदाधिकारी चुनाव डियूटी पर भेज दिए गए हैं, जबकि पलामू नक्सल प्रभावित एक संवदेनशील जिला के रूप में विख्यात है.

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यहां सड़कों से खाकी गायब है. जिले के 20 थाने, एक दर्जन से अधिक ओपी और पिकेट खाली पड़ चुके हैं. महज गिने-चुने पदाधिकारी व जवान ही थाने में हैं. ऐसे में सुरक्षा से लेकर जिले में विधि व्यवस्था बनाए रखना चुनौती बन गया है.

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अंगरक्षक, पीसीआर, टाइगर व थाना बल लगे हैं चुनाव डयूटी में

वीआईपी के अंगरक्षकों, पीसीआर, टाइगर व थाना पुलिस चुनाव डियूटी में लगा दिए गए हैं. पलामू से करीब 1200 जवान व पदाधिकारियों को चुनाव डियूटी पर भेज दिया गया है. ऐसी स्थिति में इतनी अधिक संख्या में फोर्स को हटाना खतरनाक साबित हो सकता है. क्योंकि पलामू संसदीय सीट पर वोटिंग से पहले नक्सली हमला हो चुका है. बिहार की सीमा से सटे हरिहरगंज में बीजेपी के चुनाव कार्यालय को बम विस्फोट से उड़ा दिया था.

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तीन राज्यों की सीमावर्ती पलामू में हमेशा रहता है खतरा

पलामू जिले को नक्सल प्रभावित जिले में शामिल होने के पीछे इसके तीन राज्यों के सीमावर्ती होना मुख्य कारण रहा है. कुछ वर्ष पहले तक नक्सली आसानी से पलामू जिले में आपराधिक घटनाओं को अंजाम देते थे और फिर बड़े आराम से बिहार, यूपी और छतीसगढ़ की सीमा में प्रवेश कर जाते थे.

हाल के दिनों में नक्सल गतिविधियों पर तो रोक लगी है, लेकिन इसे पूरी तरह से अंकुश लगना नहीं कहा जा सकता. हरिहरगंज में पलामू संसदीय सीट पर मतदान से तीन दिन पहले बीजेपी चुनाव कार्यालय को विस्फोटक लगाकर उड़ा देना, इसकी एक बानगी है.

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सेंट्रल जेल में बंद हैं कई बड़े अपराधी और नक्सली

मेदिनीनगर सेंट्रल जेल में कई बड़े अपराधी और बड़े नक्सली बंद हैं. कुछ कैदियों को धनबाद, दुमका, हजारीबाग से लाकर यहां रखा गया है. ऐसे में इन्हें सुरक्षित रखना, वर्तमान समय में पुलिस के लिए बड़ी चुनौती होगी. अंतिम फेज का चुनाव आगामी 19 मई को होगा.

झारखंड में प्रथम और देश के चौथे चरण में पलामू संसदीय सीट पर वोट डाले गए थे. उस समय तक सारे जवान और अधिकारी पलामू और गढ़वा जिले में ही तैनात थे, लेकिन पांचवे और छठे चरण का चुनाव कराने के लिए जवानों और पुलिस पदाधिकारियों को जिला छोड़ना पड़ा.

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हर दिन सड़क जाम, गर्मी से हलकान रहते हैं शहरवासी

एक साथ सैकड़ों पुलिसकर्मियों को चुनाव डयूटी में लगाए जाने के कारण कई आवश्यक कार्यों पर बुरा असर पड़ा है. ट्रैफिक प्रभारी और जवानों के अभाव में जहां शहर की प्रमुख सड़कें जाम रही हैं, वहीं इसमें फंसने वाले लोग गर्मी से परेशान रहते हैं.

शहर की यातायात व्यवस्था पहले से काफी लचर है. ऊपर से व्यवस्था संभाल रहे पुलिसकर्मियों के चले जाने से इसका बुरा असर व्यवस्था संधारण पर पड़ा है. हालांकि चुनाव डयूटी पर लगाए गए पुलिसकर्मियों की जगह सहायक पुलिस जवानों को ट्रैफिक और पीसीआर में पेट्रोलिंग पर लगाया गया है, लेकिन पूरी तरह ट्रेंड नहीं होने के कारण जवानों को खासकर यातायात संभालने में भारी परेशानी आ रही है.

 

फोर्थ फेज में राज्य की तीन सीटों पर चुनाव

चौथे चरण में राजमहल, दुमका और गोड्डा सीट पर चुनाव होना है. 19 मई को यहां वोट डाले जायेंगे. राज्य में अबतक तीन चरण के चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो चुके हैं. ऐसे में चुनाव आयोग चाहेगा कि राज्य के अंतिम चरण का चुनाव भी सही तरीके से हो जाए. ऐसे में पलामू समेत राज्य के करीब-करीब सारे जिले से बल मंगाकर चुनाव डयूटी में लगाने की तैयारी है.

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