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पलामू : 20 कट्ठा में लगी पोस्ते की फसल को पुलिस ने किया नष्ट, दो को किया गिरफ्तार

Palamu : पोस्ते की खेती (अफीम के स्रोत) को रोकने के लिए कई स्तरों पर कार्रवाई तेज की गयी है, लेकिन अधिक मुनाफे की चाह में सुदूरवर्ती इलाकों में लगातार खेती की जा रही है. पलामू जिले के मनातू थानांतर्गत और नक्सल प्रभावित करमा गांव में पिछले कई दिनों से पोस्ते की फसल की जा रही थी. सूचना मिलने पर पुलिस की ओर से शुक्रवार को कार्रवाई की गयी और 15 से 20 कट्ठा जमीन पर लगी पोस्ते की फसल को नष्ट किया गया. इस दौरान फसल में सिंचाई कर रहे दो लोगों को गिरफ्तार किया गया. मनातू के थाना प्रभारी चंद्रशेखर कुमार ने बताया कि पुलिस अधीक्षक इंद्रजीत महथा को गुप्त सूचना मिली थी कि करमा गांव में बड़े पैमाने पर पोस्ते की फसल उगायी गयी है. उसे तैयार किया जा रहा है. सूचना पर उनके नेतृत्व में और मिटार पिकेट के जवानों के सहयोग से छापामारी की गयी. गांव में पहुंचने पर देखा गया कि 15 से 20 कट्ठा में पोस्ते की फसल उगायी गयी थी. इस दौरान ट्रैक्टर के माध्यम से जहां फसलों को नष्ट किया गया, वहीं सिंचाई कार्य में लगे झाबर गंझू और विदेशी सिंह को मौके से गिरफ्तार किया गया. दोनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. इन दोनों सहित चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है.

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मनातू और पांकी क्षेत्र में धड़ल्ले से होती है पोस्ते की खेती 

बिहार के सीमावर्ती और मनातू थाना क्षेत्र में और लातेहार तथा चतरा थाना क्षेत्र से सटनेवाले पांकी क्षेत्र में धड़ल्ले से पोस्ते की खेती होती है. पांकी का केकरगढ़ पोस्ते की खेती के लिए जाना जाता है. इसी प्रखंड की ताल, होटाई पंचायत क्षेत्र भी पोस्ता की खेती के लिए जानी जाती है. इसी तरह मनातू का मिटार और चक के इलाके में पोस्ते की फसल लहलहाती रहती है. बड़े पैमाने पर पोस्ते की फसल होने के पीछे नक्सलियों और अपराधियों के संरक्षण से इनकार नहीं किया जा सकता है. इस इलाके से तैयार अफीम को पंजाब तस्करी कर ले जाया जाता है. कई मौकों पर की गयी कार्रवाइयों में अफीम की तस्करी करते केकरगढ़, ताल इलाके के ग्रामीण तस्कर पकड़े गये हैं.

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