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पलामू : सफदर हाशमी की याद में कवि सम्मेलन सह मुशायरा

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Palamu : सफदर हाशमी की याद में इप्टा द्वारा आयोजित शहादत सप्ताह का समापन कवि सम्मेलन सह मुशायरा के साथ हुआ. मेदिनीनगर के भगत सिंह चौक पर नुक्कड़ कवि सम्मेलन सह मुशायरा कार्यक्रम का आगाज इप्टा के कलाकारों ने सफदर हाशमी की शहादत को याद करते हुए डॉ हरिवंश प्रभात द्वारा लिखित सफदर की ललकार है नवजवानों हल्ला बोल.. गीत से किया.

इसके बाद परिमल संस्था के अध्यक्ष डॉ. विजय शुक्ला ने कहा कि सभी सुखी स्वच्छ हों, सबका हो कल्याण, किसी को दुख का तिनका न छुए, सब जन रहें महान….उमेश कुमार पाठक रेणु ने तीनों बंदर शीर्षक से अपनी कविता का पाठ किया. कवियत्री सुषमा श्रीवास्तव ने हिंद में हिंदी की शान पर कविता सुनायी. डॉ हरिवंश प्रभात ने कहा कि हरेक बात सियासी कबूल मत करना, चांद को रोटी समझने की भूल मत करना….

शायर डॉ मकबूल मंजर ने कहा कि सच जो लिखने को नहीं तैयार है, हाथ में ऐसा कलम बेकार है… समेत अन्य मजमून भी पढ़े. अलाउद्दीन चिराग ने कहा कि चैन अपना गवाना नहीं चाहिए, दिल किसी से लगाना नहीं चाहिए…. वरिष्ठ शायर कयूम रूमानी ने कहा कि डूबेगा जो सूरज तो काली रात न होगी, एक जलता दीया फर्श पर हर शाम रहेगी. नुदरत नवाज ने कहा कि जमीर के तकददुस का खरीददार हो गया, हर शख्स अपने-आप में बाजार हो गया, चिराग जल रहा था मेरे लहू के दम से, वह भी हवाओं का कर्जदार हो गया….

कार्यक्रम का संचालन करते हुए एमजे अजहर ने कहा कि मेरे अदु का पुश्त से वार हो गया, मेरे खून से रंगीन अखबार हो गया…. कवि इस्तेखार ने अपनी कविता यहां की मिट्टी में आन बान है, परचम-ए-तिरंगा वतन की शान है… सुनाया. युवा कवि पंकज सिंह ने कहा कि पढ़ता आया मिली आजादी, बहुत साल पुरानी है एक और संग्राम बाकी है आजादी को लाने में….

मौके पर केडी सिंह, पंकज श्रीवास्तव, शिवशंकर प्रसाद, उपेंद्र मिश्रा, शब्बीर अहमद, गणेश रवि, ललन प्रजापति, अभय मिश्रा, समरेश सिंह, बेतला महोत्सव के संयोजक राजेश पाण्डेय, नई संस्कृति सोसायटी के अजीत पाठक समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे.

याद आते हैं सफदर नामक नाटक का हुआ मंचन

सफदर हाशमी शहादत सप्ताह के समापन को लेकर इप्टा के कलाकारों ने प्रेम प्रकाश की लिखित व निर्देशित ‘याद आते हैं सफदर’ नामक नाटक प्रस्तुत किया. सफदर हाशमी के कई नाटकों के महत्वपूर्ण और समसायिक संवादों को मिलाकर तैयार किए गए नाटक में कलाकारों ने वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था में नेता व मंत्रियों पर व्यंग करते हुए आगामी चुनाव में जनता से खामोश नहीं रहने का संदेश दिया. वहीं नाटक में धर्म के ठेकेदारों की ओर से फैलाए जा रहे दहशतगर्दी पर चोट किया. बताने की कोशिश की कि ऐसे समय में आम-आवाम को एकजुट होकर संघर्ष करें. नाटक के अंत में ऐसे फैसले का वक्त है तू आ कदम मिला… गीत प्रस्तुत किया गया. नाटक में शशि पांडेय, यश प्रकाश, मनीष कुमार, अजीत ठाकुर, दिनेश कुमार शर्मा, रवि शंकर व भूपेश कुमार शर्मा आदि सक्रिय थे.

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