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पलामू: 30 वर्षों से खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर है पाचु मुसहर का परिवार, आवास-राशन कार्ड की भी सुविधा नहीं

Palamu: सभी गरीबों को पक्का मकान देने के सरकार के दावे के बावजूद पलामू जिले के छतरपुर में पाचु मुसहर पिछले 30 वर्षों से सड़क किनारे झुग्गी में रहने को मजबूर है. छत्तरपुर-जपला पथ पर लठेया के झरगड़ा मोड़ के समीप पाचु अपने परिवार के साथ रहता है. बरसात, ठंड और गर्मी, सभी मौसम में पाचु का यहीं पर आशियाना बना रहता है.

पत्नी, तीन बेटियों और एक बेटे के साथ रहता है पाचु

पाचु अपनी पत्नी, तीन बेटियां व एक बेटे के साथ खुले आसमान के नीचे रहता है. बारिश का मौसम आता देख पाचु चिड़ियों की तरह तिनकों के सहारे झोपड़ी खड़ा करने की मशक्कत कर रहा है, ताकि वह अपने परिवार को सुरक्षित रख सके.

20 वर्ष तक लठेया में रहे, फिर आ गये सड़क किनारे

पाचु ने बताया कि होश संभालने के बाद से वह लठेया के समीप सड़क किनारे लगभग 20 वर्षों से रहता आ रहा था. पर जिस जगह पर वह रहता था, वहां पर मोटर गैराज खुलने की वजह से उस स्थान से उसे हटा दिया गया. इसी बीच उसकी शादी हो गयी और चार बच्चे हुए, लेकिन रहने को आशियाना न मिला तो सड़क किनारे ही परिवार संग रहने को विवश हो गया.

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मधु बेचकर करता है गुजर बसर

पाचु जंगल में मधुमक्खियों के छत्ते से मधु निकाल कर बेचता है और उससे जो कुछ भी पैसे वह कमाता है उसी से अपने परिवार का भरण पोषण करता है. पत्नी कौशिला मजदूरी कर किसी तरह गुजारा करती है. इसके बावजूद उस परिवार को अंत्योदय योजना के तहत लाल कार्ड व प्रधानमंत्री आवास योजना की सुविधा से वंचित रखा गया है.

डीएम साहब आये, लेकिन कोई योजना नहीं दिये: कौशिला

पाचु की पत्नी कौशिला बताती है कि इस रास्ते से कितने अफसर साहब गुजरते हैं पर हमलोग की पीड़ा को देखकर भी उनको दया नहीं आती है. अभी कुछ महीने पहले ही झारखंड सरकार द्वारा सभी प्रखंडों में ‘सरकार आपके द्वार’ कार्यक्रम में जिला के बड़का अफसर ‘डीएम साहब’ आये थे. फिर भी हमलोग को कोई भी सरकारी योजना नहीं दिये. ‘हमनी रउनी से मांग करइत ही कि कम से कम रहने के लिए एक छत व खाने के लिए अनाज की व्यवस्था करा दिहु.’

स्कूल जाने पर बच्चों का उड़ाया गया मजाक

वहीं पाचु ने बताया कि बेटियों को पढ़ने का बहुत शौक है. पर जब बच्चों को पास के सरकारी स्कूल में भेजा तो वहां सभी उनका मजाक उड़ाया गया. कहा गया कि घर-घर घूमकर भीख मांग कर खाने वाले पढ़ कर क्या करोगे? तो सभी बच्चों ने स्कूल जाना छोड़ दिया. जब एक स्थानीय प्रतिनिधि ने पाचु की पांच साल की बेटी मुन्नी से स्कूल जाने के बारे में पूछा तो वह जिद्द करने लगी कि मुझे भी पढ़ना है. स्कूल जाना है-स्कूल जाना है और रोने लगी.

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अपना घर रहे, पाचु का है सपना

सड़क किनारे रह रहे इस परिवार पर किसी भी अधिकारी की नजर नहीं पड़ती. और न ही पाचु को समुचित सरकारी लाभ मिल सका है. उसका बस सपना है कि अपना घर होता. छत्तरपुर अनुमंडल मुख्यालय से महज 14 किलोमीटर की दूरी पर पाचु अपने सपरिवार के साथ गुजर-बसर करता है.

क्या कहना है प्रशासनिक अधिकारियों का?

छतरपुर के एसडीओ नरेंद्र कुमार गुप्ता के कहा कि झारखंड में इस तरह के लोग हैं जो झोपड़ी में रहते हैं. उन्हें आवास का लाभ चाहिए तो बीडीओ के पास आवेदन दें. आवेदन नहीं देंगे तो सागर में गागर कैसे खोजा जा सकता है.

बीडीओ तेज कुमार हस्सा ने कहा कि प्रखंड में कितने मुसहर जाती के लोग रहते हैं, इसका कोई आंकड़ा नहीं है. ऐसे लोग खाना बदोश की तरह रहते हैं. इस वजह से इन्हें लाभ नहीं मिल पाता. अगर ऐसा कोई मामला सही में है तो सरकारी प्रावधान के अनुरूप लाभ दिया जाएगा.

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